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Faridabad News: प्रतिनिधित्व के अभाव में बढ़ रहीं समस्याएं, उत्तराखंड के लोगों ने उठाई आवाज
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शहर में करीब चार लाख से अधिक उत्तराखंडवासी करते हैं निवास
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद में वर्षों से रह रहे उत्तराखंड मूल के लोगों ने प्रतिनिधित्व के अभाव में आ रही समस्याओं को लेकर आवाज उठाई है। कुमाऊं सांस्कृतिक मंडल की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में समाज के लोगों ने कहा कि लाखों की आबादी होने के बावजूद उनके समुदाय से अब तक कोई जनप्रतिनिधि नहीं चुना गया है, जिसके चलते उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
कार्यक्रम में पूरन सिंह बिष्ट, हरीश बिष्ट, मोहित रावत, नितिन सिंह बिष्ट, नंदन सिंह रावत, मोहन चंद्र सती, नंदन सिंह कड़ाकोटी, गोविंद, केशव दत्त और बिशन सिंह रावत सहित अन्य सदस्यों ने बताया कि शहर में करीब चार लाख से अधिक उत्तराखंडवासी निवास करते हैं। इसके बावजूद समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें अन्य जनप्रतिनिधियों की सिफारिश का सहारा लेना पड़ता है, जिससे कई बार कार्यों में देरी होती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि उनके समाज से भी एक प्रतिनिधि को मौका दिया जाए, ताकि उनकी समस्याओं का समय पर समाधान हो सके और वे शहर के विकास में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।
कुमाऊं सामुदायिक भवन की उठी मांग
समाज के लोगों ने यह भी बताया कि बड़ी आबादी होने के बावजूद उनके पास अब तक कोई सामुदायिक भवन नहीं है, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक आयोजन किए जा सकें। उन्होंने सरकार से मांग की कि खाली पड़ी सरकारी जमीन पर कुमाऊं सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जाए, जिससे उनकी सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
मंडल के प्रधान दिगंबर सिंह बिष्ट ने कहा कि यदि उनके समाज को प्रतिनिधित्व मिलता है तो लोगों को सीधा लाभ होगा। वहीं कोषाध्यक्ष तरण रावत ने कहा कि लाखों की आबादी होने के बावजूद उनके लिए कोई भवन नहीं होना चिंताजनक है। प्रताप सिंह खनायत ने समय पर समस्याओं का समाधान न होने पर चिंता जताई, जबकि उपप्रधान दिगंबर सिंह खाती ने कहा कि अपनी संस्कृति को जीवित रखने के लिए समाज लगातार प्रयासरत है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद में वर्षों से रह रहे उत्तराखंड मूल के लोगों ने प्रतिनिधित्व के अभाव में आ रही समस्याओं को लेकर आवाज उठाई है। कुमाऊं सांस्कृतिक मंडल की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में समाज के लोगों ने कहा कि लाखों की आबादी होने के बावजूद उनके समुदाय से अब तक कोई जनप्रतिनिधि नहीं चुना गया है, जिसके चलते उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
कार्यक्रम में पूरन सिंह बिष्ट, हरीश बिष्ट, मोहित रावत, नितिन सिंह बिष्ट, नंदन सिंह रावत, मोहन चंद्र सती, नंदन सिंह कड़ाकोटी, गोविंद, केशव दत्त और बिशन सिंह रावत सहित अन्य सदस्यों ने बताया कि शहर में करीब चार लाख से अधिक उत्तराखंडवासी निवास करते हैं। इसके बावजूद समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें अन्य जनप्रतिनिधियों की सिफारिश का सहारा लेना पड़ता है, जिससे कई बार कार्यों में देरी होती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि उनके समाज से भी एक प्रतिनिधि को मौका दिया जाए, ताकि उनकी समस्याओं का समय पर समाधान हो सके और वे शहर के विकास में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।
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कुमाऊं सामुदायिक भवन की उठी मांग
समाज के लोगों ने यह भी बताया कि बड़ी आबादी होने के बावजूद उनके पास अब तक कोई सामुदायिक भवन नहीं है, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक आयोजन किए जा सकें। उन्होंने सरकार से मांग की कि खाली पड़ी सरकारी जमीन पर कुमाऊं सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जाए, जिससे उनकी सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
मंडल के प्रधान दिगंबर सिंह बिष्ट ने कहा कि यदि उनके समाज को प्रतिनिधित्व मिलता है तो लोगों को सीधा लाभ होगा। वहीं कोषाध्यक्ष तरण रावत ने कहा कि लाखों की आबादी होने के बावजूद उनके लिए कोई भवन नहीं होना चिंताजनक है। प्रताप सिंह खनायत ने समय पर समस्याओं का समाधान न होने पर चिंता जताई, जबकि उपप्रधान दिगंबर सिंह खाती ने कहा कि अपनी संस्कृति को जीवित रखने के लिए समाज लगातार प्रयासरत है।