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Faridabad News: सरसों की आवक शुरु, नहीं सुधरीं मंड़ी में व्यवस्थाएं
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-नहीं शुरू हुई सरकारी खरीद, पेयजल समेत अन्य इंतजाम भी नदारद
दिनेश देशवाल
नूंह। जिले में सरसों की फसल की कटाई इन दिनों जोरों पर है और किसान फसल निकालने के बाद उसे सीधा मंड़ी पहुंचाने लगे है। लेकिन मंड़ी में न तो अभी सरसों की सरकारी खरीद शुरु हो पाई है और न ही फसल बेचने के लिए आने वाले किसानों के लिए मंड़ी प्रशासन ने पेयजल, शौचालय, बारिश की स्थिति में टिनशेड के नीचे फसल रखने जैसी सुविधाएं दुरुस्त की है। जिससे एक बार फिर से मंड़ी व जिला प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है। सोमवार को अमर उजाला की टीम ने मंड़ी की व्यवस्थाओं का जायजा लिया तो हालात काफी चिंताजनक पाए गए।
औने-पौने दाम में खरीदी जा रही सरसों :
सरकार ने सरसों का एमएसपी 6200 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। लेकिन अभी सरकारी खरीद शुरु नहीं होने के कारण आढ़ती किसान की फसल को औने-पौने दामों में खरीद रहे है। बड़ौजी के किसान रामरतन ने बताया कि उसने अपनी फसल को सोमवार को 5800 रुपये व 6000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में बेचा है।
शौचालय समेत अन्य व्यवस्थाएं नदारद
: मंड़ी में दो सार्वजनिक शौचालय बने हुए है। जिनमें से साइबर थाने के पास वाला शौचालय कंडम अवस्था में है तो दूसरे शौचालय की हालत काफी खराब है। किसान, मजदूर व आमजन की प्यास बुझाने के लिए मंड़ी में चार वाटरकूलर लगे हुए है। लेकिन उनके ऊपर रखी टंकियों की न तो लंबे समय से सफाई की गई और न ही उनमें नियमित पानी आता है। वाटर कूलर भी खराब हालत में है। मंडी में फसल लाने के दौरान यदि मौसम खराब होता है तो अपनी फसल को बचाने के लिए किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बड़े-बड़े टिनशेड बनाए हुए है। लेकिन उनमें से सिर्फ एक टिनशेड खाली है बाकी सभी पर आढ़तियों के कब्जे हैं।
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सड़कें टूटी, लगे गंदगी के ढेर
अनाजमंड़ी की सड़कें टूटी हुई है। जिनसे पैदल निकलना भी लोगों के लिए मुश्किल होता है। किसानों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से मंड़ी की सड़कें बदहाल है। मंड़ी में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। जगह-जगह गंदगी के ढेर, गंदे पानी का सड़कों पर कब्जा जो मंड़ी की अव्यवस्थाओं की कहानी स्पष्ट कर रहा है।
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बोले किसान
किसान अलीम, अख्तर, सुलेमान, अलीजान व सुरेश का कहना है कि सरसों की कटाई के बाद फसल सीधे मंडी में लाई जाएगी, लेकिन मौजूदा हालात देखते हुए व्यवस्थाएं नाकाफी नजर आ रही हैं। मंडी में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं और नालियों की नियमित सफाई भी नहीं हो रही। वहीं सड़कें टूटी हुई है और शौचालय भी पूरी तरह बदहाल हैं।
अफसर आते नहीं कैसे हो सुधार:
मार्केट कमेटी के वाइस चेयरमैन थान सिंह कश्यप ने कहा कि मंड़ी की व्यवस्थाओं को देखने के लिए नूंह में डीएमईओ सुल्तान सिंह तथा सचिव मनोज कुमार तैनात है, लेकिन वे मंड़ी आते ही नहीं है, जिसके कारण मंड़ी की हालत काफी बदहाल है। जल्द इस बारे में मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा। मंड़ी की हालात सुधारने के लिए सरकार ने करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये मंजूर किए हुए है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण काम नहीं हो पा रहा है।वहीं मंड़ी सचिव मनोज कुमार से फोन कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं कर पाने के कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
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दिनेश देशवाल
नूंह। जिले में सरसों की फसल की कटाई इन दिनों जोरों पर है और किसान फसल निकालने के बाद उसे सीधा मंड़ी पहुंचाने लगे है। लेकिन मंड़ी में न तो अभी सरसों की सरकारी खरीद शुरु हो पाई है और न ही फसल बेचने के लिए आने वाले किसानों के लिए मंड़ी प्रशासन ने पेयजल, शौचालय, बारिश की स्थिति में टिनशेड के नीचे फसल रखने जैसी सुविधाएं दुरुस्त की है। जिससे एक बार फिर से मंड़ी व जिला प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है। सोमवार को अमर उजाला की टीम ने मंड़ी की व्यवस्थाओं का जायजा लिया तो हालात काफी चिंताजनक पाए गए।
औने-पौने दाम में खरीदी जा रही सरसों :
सरकार ने सरसों का एमएसपी 6200 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। लेकिन अभी सरकारी खरीद शुरु नहीं होने के कारण आढ़ती किसान की फसल को औने-पौने दामों में खरीद रहे है। बड़ौजी के किसान रामरतन ने बताया कि उसने अपनी फसल को सोमवार को 5800 रुपये व 6000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में बेचा है।
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शौचालय समेत अन्य व्यवस्थाएं नदारद
: मंड़ी में दो सार्वजनिक शौचालय बने हुए है। जिनमें से साइबर थाने के पास वाला शौचालय कंडम अवस्था में है तो दूसरे शौचालय की हालत काफी खराब है। किसान, मजदूर व आमजन की प्यास बुझाने के लिए मंड़ी में चार वाटरकूलर लगे हुए है। लेकिन उनके ऊपर रखी टंकियों की न तो लंबे समय से सफाई की गई और न ही उनमें नियमित पानी आता है। वाटर कूलर भी खराब हालत में है। मंडी में फसल लाने के दौरान यदि मौसम खराब होता है तो अपनी फसल को बचाने के लिए किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बड़े-बड़े टिनशेड बनाए हुए है। लेकिन उनमें से सिर्फ एक टिनशेड खाली है बाकी सभी पर आढ़तियों के कब्जे हैं।
सड़कें टूटी, लगे गंदगी के ढेर
अनाजमंड़ी की सड़कें टूटी हुई है। जिनसे पैदल निकलना भी लोगों के लिए मुश्किल होता है। किसानों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से मंड़ी की सड़कें बदहाल है। मंड़ी में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। जगह-जगह गंदगी के ढेर, गंदे पानी का सड़कों पर कब्जा जो मंड़ी की अव्यवस्थाओं की कहानी स्पष्ट कर रहा है।
बोले किसान
किसान अलीम, अख्तर, सुलेमान, अलीजान व सुरेश का कहना है कि सरसों की कटाई के बाद फसल सीधे मंडी में लाई जाएगी, लेकिन मौजूदा हालात देखते हुए व्यवस्थाएं नाकाफी नजर आ रही हैं। मंडी में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं और नालियों की नियमित सफाई भी नहीं हो रही। वहीं सड़कें टूटी हुई है और शौचालय भी पूरी तरह बदहाल हैं।
अफसर आते नहीं कैसे हो सुधार:
मार्केट कमेटी के वाइस चेयरमैन थान सिंह कश्यप ने कहा कि मंड़ी की व्यवस्थाओं को देखने के लिए नूंह में डीएमईओ सुल्तान सिंह तथा सचिव मनोज कुमार तैनात है, लेकिन वे मंड़ी आते ही नहीं है, जिसके कारण मंड़ी की हालत काफी बदहाल है। जल्द इस बारे में मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा। मंड़ी की हालात सुधारने के लिए सरकार ने करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये मंजूर किए हुए है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण काम नहीं हो पा रहा है।वहीं मंड़ी सचिव मनोज कुमार से फोन कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं कर पाने के कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।