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Faridabad News: स्वच्छता, पर्यावरण और सेवा से बदल रहीं जिले की तस्वीर
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नीरज धर पाण्डेय
फरीदाबाद। नवरात्र के पावन अवसर पर जहां शक्ति स्वरूपा की आराधना की जा रही है, वहीं जिले की महिलाएं धरातल पर उसी शक्ति का सजीव उदाहरण बनकर सामने आ रही हैं। रसोई और परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सेवा और मानवता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देकर समाज में सकारात्मक बदलाव की अगुवाई कर रही हैं।
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी भूमिका
स्मार्ट सिटी को स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में सेक्टर-86 स्थित समर पाम सोसाइटी की महासचिव बबीता सिंह ने मिसाल पेश की है। बबीता सिंह ने सोसाइटी स्तर पर कचरा प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था लागू की, जिसमें घरों से निकलने वाले कूड़े को गीला, सूखा और प्लास्टिक में अलग किया जाता है। गीले कूड़े से 25 से 30 दिनों में जैविक खाद तैयार कर उसे पेड़-पौधों में उपयोग किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वच्छता को भी बढ़ावा मिल रहा है।
लावारिस नवजातों को मिला मां का स्नेह
मिरेकल चैरिटेबल सोसाइटी की संचालक सिमरन लांबा ने मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है। वर्ष 2017 से अब तक उन्होंने फरीदाबाद और गुरुग्राम में लावारिस हालत में मिले सैकड़ों नवजात और बच्चों को नया जीवन दिया है। कूड़े के ढेर और सुनसान जगहों से मिले इन बच्चों का इलाज, पालन-पोषण और पुनर्वास सुनिश्चित कर सिमरन ने उन्हें सुरक्षित भविष्य दिया। अब तक वह करीब 300 बच्चों को गोद दिलवा चुकी हैं, जबकि कई बच्चे आज भी उनकी देखरेख में पल रहे हैं।
बेटी की स्मृति में हरियाली का संकल्प
पूर्णिमा रस्तोगी ने 2013 में अपनी बेटी को खोने के बाद पर्यावरण संरक्षण को अपना लक्ष्य बना लिया। सैनिक कॉलोनी में पेड़ों की कमी और बुजुर्गों को छाया न मिलने की समस्या को देखते हुए उन्होंने शुरुआत में 93 पौधे लगाए, जो आज बड़े पेड़ बन चुके हैं। इसके बाद उन्होंने नगर निगम के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाया और हजारों पौधे लगाए। उनके प्रयासों से आज कॉलोनी और आसपास के क्षेत्र में हरियाली बढ़ी है, जिससे लोगों को छाया, स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण मिल रहा है।
पीड़ित महिलाओं के आत्मसम्मान की रक्षा
सामाजिक कार्यकर्ता कविता गुप्ता ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में प्रोस्थेटिक ब्रेस्ट ब्रा डिजाइन कर जरूरतमंद महिलाओं को निशुल्क उपलब्ध कराना शुरू किया। उनका उद्देश्य केवल एक उत्पाद देना नहीं, बल्कि महिलाओं का आत्मविश्वास और सम्मान बनाए रखना है। कविता गुप्ता अब तक कई महिलाओं को मानसिक और सामाजिक रूप से सशक्त बना चुकी हैं।
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स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी भूमिका
स्मार्ट सिटी को स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में सेक्टर-86 स्थित समर पाम सोसाइटी की महासचिव बबीता सिंह ने मिसाल पेश की है। बबीता सिंह ने सोसाइटी स्तर पर कचरा प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था लागू की, जिसमें घरों से निकलने वाले कूड़े को गीला, सूखा और प्लास्टिक में अलग किया जाता है। गीले कूड़े से 25 से 30 दिनों में जैविक खाद तैयार कर उसे पेड़-पौधों में उपयोग किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वच्छता को भी बढ़ावा मिल रहा है।
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लावारिस नवजातों को मिला मां का स्नेह
मिरेकल चैरिटेबल सोसाइटी की संचालक सिमरन लांबा ने मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है। वर्ष 2017 से अब तक उन्होंने फरीदाबाद और गुरुग्राम में लावारिस हालत में मिले सैकड़ों नवजात और बच्चों को नया जीवन दिया है। कूड़े के ढेर और सुनसान जगहों से मिले इन बच्चों का इलाज, पालन-पोषण और पुनर्वास सुनिश्चित कर सिमरन ने उन्हें सुरक्षित भविष्य दिया। अब तक वह करीब 300 बच्चों को गोद दिलवा चुकी हैं, जबकि कई बच्चे आज भी उनकी देखरेख में पल रहे हैं।
बेटी की स्मृति में हरियाली का संकल्प
पूर्णिमा रस्तोगी ने 2013 में अपनी बेटी को खोने के बाद पर्यावरण संरक्षण को अपना लक्ष्य बना लिया। सैनिक कॉलोनी में पेड़ों की कमी और बुजुर्गों को छाया न मिलने की समस्या को देखते हुए उन्होंने शुरुआत में 93 पौधे लगाए, जो आज बड़े पेड़ बन चुके हैं। इसके बाद उन्होंने नगर निगम के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाया और हजारों पौधे लगाए। उनके प्रयासों से आज कॉलोनी और आसपास के क्षेत्र में हरियाली बढ़ी है, जिससे लोगों को छाया, स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण मिल रहा है।
पीड़ित महिलाओं के आत्मसम्मान की रक्षा
सामाजिक कार्यकर्ता कविता गुप्ता ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में प्रोस्थेटिक ब्रेस्ट ब्रा डिजाइन कर जरूरतमंद महिलाओं को निशुल्क उपलब्ध कराना शुरू किया। उनका उद्देश्य केवल एक उत्पाद देना नहीं, बल्कि महिलाओं का आत्मविश्वास और सम्मान बनाए रखना है। कविता गुप्ता अब तक कई महिलाओं को मानसिक और सामाजिक रूप से सशक्त बना चुकी हैं।