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Faridabad News: वादी ने बिजली निगम के खिलाफ दायर सिविल सूट वापस लिया
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अदालत में बिजली निगम के खिलाफ दायर एक सिविल सूट को वादी द्वारा वापस लेने पर अदालत ने खारिज कर दिया। यह मामला दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के खिलाफ दायर किया गया था, जिसमें वादी अशोक कुमार ने बिजली अधिनियम 2003 की धारा 135 के तहत घोषणा और अनिवार्य निषेधाज्ञा की मांग की थी।
मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत में चल रही थी और यह केस मेंटेनबिलिटी पर बहस के लिए निर्धारित था। सुनवाई के दौरान वादी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में स्पष्ट रूप से कहा कि वे अब इस याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने यह फैसला महेश कुमार बनाम एसडीओ और अन्य में दिए गए निर्णय को ध्यान में रखते हुए लिया। अधिवक्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि याचिका को वापस लेने की अनुमति दी जाए और भविष्य में कानून के अनुसार उचित आवेदन दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान की जाए। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार किया और सिविल सूट को वापस लिया गया। अपने आदेश में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वादी को भविष्य में उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत दोबारा याचिका दायर करने की छूट रहेगी। साथ ही, मामले की फाइल को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिकॉर्ड रूम में भेजने के निर्देश दिए गए।
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फरीदाबाद। अदालत में बिजली निगम के खिलाफ दायर एक सिविल सूट को वादी द्वारा वापस लेने पर अदालत ने खारिज कर दिया। यह मामला दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के खिलाफ दायर किया गया था, जिसमें वादी अशोक कुमार ने बिजली अधिनियम 2003 की धारा 135 के तहत घोषणा और अनिवार्य निषेधाज्ञा की मांग की थी।
मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत में चल रही थी और यह केस मेंटेनबिलिटी पर बहस के लिए निर्धारित था। सुनवाई के दौरान वादी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में स्पष्ट रूप से कहा कि वे अब इस याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने यह फैसला महेश कुमार बनाम एसडीओ और अन्य में दिए गए निर्णय को ध्यान में रखते हुए लिया। अधिवक्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि याचिका को वापस लेने की अनुमति दी जाए और भविष्य में कानून के अनुसार उचित आवेदन दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान की जाए। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार किया और सिविल सूट को वापस लिया गया। अपने आदेश में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वादी को भविष्य में उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत दोबारा याचिका दायर करने की छूट रहेगी। साथ ही, मामले की फाइल को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिकॉर्ड रूम में भेजने के निर्देश दिए गए।
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