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Faridabad News: फरीदाबाद में 6 लाख संपत्तियों पर बढ़ेगा टैक्स का बोझ
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ए वन ग्रेड के हिसाब से देना होगा प्रॉपर्टी टैक्स, 1 सितंबर से लागू होगी नई व्यवस्था
13 साल बाद बदला संपत्ति कर ढांचा, कलेक्टर रेट के अनुसार तय होगा टैक्स
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। 13 साल से चली आ रही संपत्ति कर की पुरानी व्यवस्था खत्म होने के साथ फरीदाबाद के करीब छह लाख संपत्ति मालिकों पर अब हर साल बढ़ते कर का दबाव पड़ने की आशंका है। 1 सितंबर से लागू होने वाली नई व्यवस्था में मकान, दुकान, शोरूम और औद्योगिक इकाइयों का संपत्ति कर पुराने फ्लैट रेट के बजाय संपत्ति के पूंजीगत मूल्य और कलेक्टर रेट से जोड़ा गया है। इसका सबसे बड़ा असर उन इलाकों में पड़ सकता है जहां जमीन के कलेक्टर रेट अधिक हैं। नई गणना में संपत्ति का क्षेत्रफल, कलेक्टर रेट, मंजिलों की संख्या और उसका इस्तेमाल शामिल होने से समान आकार की संपत्तियों का कर भी अलग-अलग हो सकता है। फरीदाबाद को प्रॉपर्टी टैक्स के मामलों में ए वन श्रेणी में रखा गया है। नई व्यवस्था में पुराने कर की तुलना में हर साल तय सीमा तक बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो गया है।
वर्ष 2013 में लागू की गई संपत्ति कर व्यवस्था के तहत लंबे समय से संपत्तियों पर फ्लैट दरों से कर वसूला जा रहा था। अब इसे बदलकर पूंजीगत मूल्य आधारित व्यवस्था लागू की है। फरीदाबाद को ए वन श्रेणी में रखा गया है। ए वन शहरों में आवासीय संपत्तियों के लिए पूंजीगत मूल्य का 0.030 प्रतिशत और गैर-आवासीय संपत्तियों के लिए 0.10 प्रतिशत की फ्लोर दर तय की गई है। इसके साथ संपत्ति के उपयोग के आधार पर अलग-अलग गुणक लागू होंगे।
जमीन महंगी तो टैक्स भी बढ़ेगा
नई व्यवस्था में स्वतंत्र मकान या प्लॉट का पूंजीगत मूल्य निकालने के लिए क्षेत्रफल और कलेक्टर रेट को आधार बनाया जाएगा। इसमें फ्लोर फैक्टर भी जुड़ेगा। केवल भूतल के लिए फैक्टर 1 रहेगा जबकि बेसमेंट समेत हर अतिरिक्त मंजिल पर 0.25 अतिरिक्त जोड़ा जाएगा। फ्लैट और अपार्टमेंट में कारपेट एरिया और कलेक्टर रेट के आधार पर मूल्य निकाला जाएगा। ऐसे में एक ही आकार के मकान का कर इलाके के कलेक्टर रेट और मंजिलों की संख्या के कारण दूसरे मकान से काफी अलग हो सकता है।
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फरीदाबाद के बाजारों और उद्योगों पर भी असर
नई व्यवस्था का असर सिर्फ मकानों तक सीमित नहीं है। 30 वर्गमीटर तक की दुकानों के लिए 0.25, 30 से 50 वर्गमीटर तक 0.50 और 50 वर्गमीटर से बड़ी दुकानों के लिए एक का गुणक रखा गया है। शॉपिंग मॉल की दुकानों के लिए 1.25 गुणक है। औद्योगिक इकाइयों में 500 वर्गमीटर तक 0.25, 500 से 2,000 वर्गमीटर तक 0.50, 2,000 से 5,000 वर्गमीटर तक 0.75 और इससे बड़ी इकाइयों के लिए एक का गुणक लागू होगा। फरीदाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में इसका सीधा असर उद्योगों की कर देनदारी पर पड़ सकता है।
किराये की संपत्ति पर भी 25 फीसदी अतिरिक्त टैक्स
नई नीति में किराए पर दी गई संपत्ति या उसके किसी हिस्से पर सामान्य कर के अलावा 0.25 गुना अतिरिक्त कर लगाया जाएगा। यानी किराए की संपत्ति पर स्व-उपयोग वाली समान संपत्ति की तुलना में कर भार अधिक होगा। मिश्रित उपयोग वाली संपत्ति में आवासीय और व्यावसायिक हिस्से की अलग-अलग गणना होगी।
हर साल टैक्स बढ़ना तय
अचानक बहुत बड़ी बढ़ोतरी से बचाने के लिए कैपिंग का प्रावधान किया गया है। इसका मतलब कर वृद्धि पर रोक नहीं बल्कि एक साल में कितनी अधिकतम बढ़ोतरी की जा सकती है, इसकी सीमा तय की गई है। 250 वर्गमीटर तक के मकान और 100 वर्गमीटर तक के फ्लैट का कर एक साल में अधिकतम 1.25 गुना यानी 25 फीसदी तक बढ़ सकता है। 250 से 350 वर्गमीटर तक के मकानों में यह सीमा 1.5 गुना है। अन्य आवासीय संपत्तियों में दो गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है। औद्योगिक संपत्तियों में 500 वर्गमीटर तक 1.5 गुना, 500 से 2,000 वर्गमीटर तक दो गुना, 2,000 से 5,000 वर्गमीटर तक 2.5 गुना और 5,000 वर्गमीटर से अधिक की संपत्तियों में तीन गुना तक की सालाना बढ़ोतरी की सीमा है। अन्य श्रेणी की संपत्तियों के लिए भी तीन गुना तक की सीमा रखी गई है। यानी कैपिंग को राहत के तौर पर देखने के बजाय इसका दूसरा पहलू भी है। जिस संपत्ति का नया कर पुराने कर से अधिक बनेगा वहां निगम उस बढ़े हुए कर को अगले वर्षों में क्रमश: लागू करने का रास्ता खोल दिया है।
फरीदाबाद में पहले ही बढ़ी थी संपत्ति कर वसूली
नगर निगम ने पिछले वित्त वर्ष में संपत्ति कर वसूली बढ़ाने के लिए सख्ती की थी। 2025-26 में 2500 से अधिक बकायेदार संपत्तियों को सील किया गया और करीब 10 हजार नोटिस जारी किए गए। इसके बाद संपत्ति कर वसूली करीब 97.58 करोड़ रुपये तक पहुंची जबकि 2024-25 में यह करीब 55 करोड़ रुपये थी। अब नई कलेक्टर रेट आधारित व्यवस्था से निगम की सालाना संपत्ति कर आय 150 से 200 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। निगम की आय बढ़ने का मतलब संपत्ति मालिकों के लिए कर भुगतान की देनदारी का बढ़ना भी है। इसलिए नई नीति का सीधा आर्थिक असर शहर के मकान मालिकों, दुकानदारों और उद्योगों पर पड़ेगा।
31 अगस्त तक पुराने बकाये पर ब्याज छूट, लेकिन बकाया खत्म करना जरूरी
पुराने बकायेदारों के लिए 31 अगस्त तक 75 फीसदी ब्याज छूट का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2010-11 से 2024-25 तक के लंबित संपत्ति कर पर लगे ब्याज में यह छूट दी गई है। इसका लाभ लेने के लिए निर्धारित अवधि में बकाया कर जमा करना होगा। इसके बाद पुरानी देनदारी पर राहत का यह मौका खत्म हो जाएगा।
गलत जानकारी पर दोहरा जुर्माना
नई व्यवस्था में संपत्ति का गलत विवरण देना भी महंगा पड़ेगा। गलत घोषणा के कारण बचाई गई कर राशि की दोगुनी राशि के बराबर जुर्माना और 1.5 फीसदी प्रतिमाह साधारण ब्याज लगाया जाएगा। अवैध या अनधिकृत निर्माण अथवा नियमों के विपरीत उपयोग पर देय कर के अतिरिक्त दोगुनी राशि का जुर्माना लगाया जा सकता है।
लाल डोरा और कुछ वर्गों को राहत
लाल डोरा क्षेत्र की मौजूदा आवासीय संपत्तियों को 75 फीसदी रियायत का प्रावधान है। महिलाओं के नाम आवासीय संपत्ति पर 25 फीसदी और 40 फीसदी या अधिक दिव्यांगता वाले मालिकों को 10 फीसदी रियायत मिलेगी। समय पर भुगतान करने वालों के लिए भी छूट है। धार्मिक स्थल, सरकारी अस्पताल, सरकारी शिक्षण संस्थान, कृषि भूमि समेत कई श्रेणियों को पूर्ण या निर्धारित शर्तों के तहत छूट दी गई है।
बढ़ेगी विकास की रफ्तार
नगर निगम इस साल में 100 करोड़ के करीब प्रॉपर्टी टैक्स मिला है। लेकिन जब यह टैक्स दो गुना तक बढ़ जाएगा तो इसका सीधा असर जमीनी स्तर पर चल रही परियजनाओं पर भी देखना को मिलेगा। फंड की कमी के कारण रुके हुए विकास कार्यों को गति मिलेगी और लोगों को उनका लाभ मिलना शुरू होगा। वहीं निगम कार्यालया, नाहर सिंह स्टेडियम जैसे बड़े विकास कार्यों में भी तेजी आने की उम्मीद है।
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1 सितंबर से नई व्यवस्था लागू की जाएगी। सरकार के निर्देश पर नए प्रावधान लागू होंगे। - विकास कन्हैया, क्षेत्रीय कर अधिकारी मुख्यालय ,नगर निगम
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13 साल बाद बदला संपत्ति कर ढांचा, कलेक्टर रेट के अनुसार तय होगा टैक्स
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। 13 साल से चली आ रही संपत्ति कर की पुरानी व्यवस्था खत्म होने के साथ फरीदाबाद के करीब छह लाख संपत्ति मालिकों पर अब हर साल बढ़ते कर का दबाव पड़ने की आशंका है। 1 सितंबर से लागू होने वाली नई व्यवस्था में मकान, दुकान, शोरूम और औद्योगिक इकाइयों का संपत्ति कर पुराने फ्लैट रेट के बजाय संपत्ति के पूंजीगत मूल्य और कलेक्टर रेट से जोड़ा गया है। इसका सबसे बड़ा असर उन इलाकों में पड़ सकता है जहां जमीन के कलेक्टर रेट अधिक हैं। नई गणना में संपत्ति का क्षेत्रफल, कलेक्टर रेट, मंजिलों की संख्या और उसका इस्तेमाल शामिल होने से समान आकार की संपत्तियों का कर भी अलग-अलग हो सकता है। फरीदाबाद को प्रॉपर्टी टैक्स के मामलों में ए वन श्रेणी में रखा गया है। नई व्यवस्था में पुराने कर की तुलना में हर साल तय सीमा तक बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो गया है।
वर्ष 2013 में लागू की गई संपत्ति कर व्यवस्था के तहत लंबे समय से संपत्तियों पर फ्लैट दरों से कर वसूला जा रहा था। अब इसे बदलकर पूंजीगत मूल्य आधारित व्यवस्था लागू की है। फरीदाबाद को ए वन श्रेणी में रखा गया है। ए वन शहरों में आवासीय संपत्तियों के लिए पूंजीगत मूल्य का 0.030 प्रतिशत और गैर-आवासीय संपत्तियों के लिए 0.10 प्रतिशत की फ्लोर दर तय की गई है। इसके साथ संपत्ति के उपयोग के आधार पर अलग-अलग गुणक लागू होंगे।
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जमीन महंगी तो टैक्स भी बढ़ेगा
नई व्यवस्था में स्वतंत्र मकान या प्लॉट का पूंजीगत मूल्य निकालने के लिए क्षेत्रफल और कलेक्टर रेट को आधार बनाया जाएगा। इसमें फ्लोर फैक्टर भी जुड़ेगा। केवल भूतल के लिए फैक्टर 1 रहेगा जबकि बेसमेंट समेत हर अतिरिक्त मंजिल पर 0.25 अतिरिक्त जोड़ा जाएगा। फ्लैट और अपार्टमेंट में कारपेट एरिया और कलेक्टर रेट के आधार पर मूल्य निकाला जाएगा। ऐसे में एक ही आकार के मकान का कर इलाके के कलेक्टर रेट और मंजिलों की संख्या के कारण दूसरे मकान से काफी अलग हो सकता है।
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फरीदाबाद के बाजारों और उद्योगों पर भी असर
नई व्यवस्था का असर सिर्फ मकानों तक सीमित नहीं है। 30 वर्गमीटर तक की दुकानों के लिए 0.25, 30 से 50 वर्गमीटर तक 0.50 और 50 वर्गमीटर से बड़ी दुकानों के लिए एक का गुणक रखा गया है। शॉपिंग मॉल की दुकानों के लिए 1.25 गुणक है। औद्योगिक इकाइयों में 500 वर्गमीटर तक 0.25, 500 से 2,000 वर्गमीटर तक 0.50, 2,000 से 5,000 वर्गमीटर तक 0.75 और इससे बड़ी इकाइयों के लिए एक का गुणक लागू होगा। फरीदाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में इसका सीधा असर उद्योगों की कर देनदारी पर पड़ सकता है।
किराये की संपत्ति पर भी 25 फीसदी अतिरिक्त टैक्स
नई नीति में किराए पर दी गई संपत्ति या उसके किसी हिस्से पर सामान्य कर के अलावा 0.25 गुना अतिरिक्त कर लगाया जाएगा। यानी किराए की संपत्ति पर स्व-उपयोग वाली समान संपत्ति की तुलना में कर भार अधिक होगा। मिश्रित उपयोग वाली संपत्ति में आवासीय और व्यावसायिक हिस्से की अलग-अलग गणना होगी।
हर साल टैक्स बढ़ना तय
अचानक बहुत बड़ी बढ़ोतरी से बचाने के लिए कैपिंग का प्रावधान किया गया है। इसका मतलब कर वृद्धि पर रोक नहीं बल्कि एक साल में कितनी अधिकतम बढ़ोतरी की जा सकती है, इसकी सीमा तय की गई है। 250 वर्गमीटर तक के मकान और 100 वर्गमीटर तक के फ्लैट का कर एक साल में अधिकतम 1.25 गुना यानी 25 फीसदी तक बढ़ सकता है। 250 से 350 वर्गमीटर तक के मकानों में यह सीमा 1.5 गुना है। अन्य आवासीय संपत्तियों में दो गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है। औद्योगिक संपत्तियों में 500 वर्गमीटर तक 1.5 गुना, 500 से 2,000 वर्गमीटर तक दो गुना, 2,000 से 5,000 वर्गमीटर तक 2.5 गुना और 5,000 वर्गमीटर से अधिक की संपत्तियों में तीन गुना तक की सालाना बढ़ोतरी की सीमा है। अन्य श्रेणी की संपत्तियों के लिए भी तीन गुना तक की सीमा रखी गई है। यानी कैपिंग को राहत के तौर पर देखने के बजाय इसका दूसरा पहलू भी है। जिस संपत्ति का नया कर पुराने कर से अधिक बनेगा वहां निगम उस बढ़े हुए कर को अगले वर्षों में क्रमश: लागू करने का रास्ता खोल दिया है।
फरीदाबाद में पहले ही बढ़ी थी संपत्ति कर वसूली
नगर निगम ने पिछले वित्त वर्ष में संपत्ति कर वसूली बढ़ाने के लिए सख्ती की थी। 2025-26 में 2500 से अधिक बकायेदार संपत्तियों को सील किया गया और करीब 10 हजार नोटिस जारी किए गए। इसके बाद संपत्ति कर वसूली करीब 97.58 करोड़ रुपये तक पहुंची जबकि 2024-25 में यह करीब 55 करोड़ रुपये थी। अब नई कलेक्टर रेट आधारित व्यवस्था से निगम की सालाना संपत्ति कर आय 150 से 200 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। निगम की आय बढ़ने का मतलब संपत्ति मालिकों के लिए कर भुगतान की देनदारी का बढ़ना भी है। इसलिए नई नीति का सीधा आर्थिक असर शहर के मकान मालिकों, दुकानदारों और उद्योगों पर पड़ेगा।
31 अगस्त तक पुराने बकाये पर ब्याज छूट, लेकिन बकाया खत्म करना जरूरी
पुराने बकायेदारों के लिए 31 अगस्त तक 75 फीसदी ब्याज छूट का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2010-11 से 2024-25 तक के लंबित संपत्ति कर पर लगे ब्याज में यह छूट दी गई है। इसका लाभ लेने के लिए निर्धारित अवधि में बकाया कर जमा करना होगा। इसके बाद पुरानी देनदारी पर राहत का यह मौका खत्म हो जाएगा।
गलत जानकारी पर दोहरा जुर्माना
नई व्यवस्था में संपत्ति का गलत विवरण देना भी महंगा पड़ेगा। गलत घोषणा के कारण बचाई गई कर राशि की दोगुनी राशि के बराबर जुर्माना और 1.5 फीसदी प्रतिमाह साधारण ब्याज लगाया जाएगा। अवैध या अनधिकृत निर्माण अथवा नियमों के विपरीत उपयोग पर देय कर के अतिरिक्त दोगुनी राशि का जुर्माना लगाया जा सकता है।
लाल डोरा और कुछ वर्गों को राहत
लाल डोरा क्षेत्र की मौजूदा आवासीय संपत्तियों को 75 फीसदी रियायत का प्रावधान है। महिलाओं के नाम आवासीय संपत्ति पर 25 फीसदी और 40 फीसदी या अधिक दिव्यांगता वाले मालिकों को 10 फीसदी रियायत मिलेगी। समय पर भुगतान करने वालों के लिए भी छूट है। धार्मिक स्थल, सरकारी अस्पताल, सरकारी शिक्षण संस्थान, कृषि भूमि समेत कई श्रेणियों को पूर्ण या निर्धारित शर्तों के तहत छूट दी गई है।
बढ़ेगी विकास की रफ्तार
नगर निगम इस साल में 100 करोड़ के करीब प्रॉपर्टी टैक्स मिला है। लेकिन जब यह टैक्स दो गुना तक बढ़ जाएगा तो इसका सीधा असर जमीनी स्तर पर चल रही परियजनाओं पर भी देखना को मिलेगा। फंड की कमी के कारण रुके हुए विकास कार्यों को गति मिलेगी और लोगों को उनका लाभ मिलना शुरू होगा। वहीं निगम कार्यालया, नाहर सिंह स्टेडियम जैसे बड़े विकास कार्यों में भी तेजी आने की उम्मीद है।
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1 सितंबर से नई व्यवस्था लागू की जाएगी। सरकार के निर्देश पर नए प्रावधान लागू होंगे। - विकास कन्हैया, क्षेत्रीय कर अधिकारी मुख्यालय ,नगर निगम