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Faridabad News: शहर की सूरत बदलेगी...खाली जमीन पर विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार
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मार्जिनल लैंड के उपयोग पर प्रशासन सख्त, सड़क परियोजनाओं में पारदर्शिता और गति बढ़ाने के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में वर्षों से खाली पड़ी छोटी-छोटी जमीनों को अब विकास के नए संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मार्जिनल लैंड का प्रभावी उपयोग कर न केवल शहरी व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा बल्कि इससे राजस्व बढ़ाने और आम लोगों को सुविधाएं देने का भी रास्ता खुलेगा। इसके साथ ही सड़क और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को तेज कर शहर की यातायात व्यवस्था और औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
लघु सचिवालय में आयोजित अंतर-एजेंसी समन्वय बैठक में शहरी विकास के प्रधान सलाहकार डीएस ढेसी ने जिले में चल रहीं परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों में देरी अब स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में एफएमडीए, नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने हिस्सा लेकर जमीनी चुनौतियों और उनकी प्रगति की जानकारी दी।
पार्किंग, हरित क्षेत्र, सामुदायिक सुविधाओं में काम आएगी जमीन
बैठक में सबसे ज्यादा जोर सेक्टरों और विकसित क्षेत्रों में बिखरी पड़ी छोटी-छोटी जमीनों के टुकड़ों पर रहा। इन भूखंडों को लंबे समय से अनदेखा किया जाता रहा है जिससे वे या तो खाली पड़े रहते हैं या फिर अव्यवस्थित उपयोग में आते हैं। अब इन सभी भूखंडों की दोबारा पहचान कर उनका रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और उनके उपयोग के लिए समग्र योजना बनाई जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इन जमीनों का उपयोग पार्किंग, हरित क्षेत्र, सामुदायिक सुविधाओं या छोटे व्यावसायिक उपयोग के रूप में किया जा सकता है। इससे न केवल शहर की सूरत सुधरेगी, बल्कि अवैध कब्जों और गंदगी की समस्या पर भी रोक लगेगी। आम लोगों को भी अपने आसपास बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
सड़क परियोजनाओं में पारदर्शिता से बढ़ेगा भरोसा
बैठक में यह भी सामने आया कि इस बार राज्य के बजट में सड़क विकास परियोजनाओं को अधिक स्पष्टता के साथ शामिल किया गया है। अब परियोजनाओं में सड़कों के नाम, लंबाई और लागत का उल्लेख किया जा रहा है। इससे लोगों को यह जानने में आसानी होगी कि उनके क्षेत्र में कौन-सा काम कब और कैसे होगा वहीं विभागों की जवाबदेही भी तय होगी।
तकनीकी अड़चनों को हटाने के निर्देश
सड़क निर्माण में आ रहीं समस्याओं जैसे भूमि अधिग्रहण, चौड़ाई निर्धारण, सर्विस लेन और राजस्व रिकॉर्ड की गड़बड़ियों को लेकर अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी। कई परियोजनाएं इन्हीं कारणों से प्रभावित हो रही हैं। इस पर निर्देश दिए गए कि हर समस्या की अलग से तकनीकी समीक्षा कर समाधान निकाला जाए और जरूरत पड़ने पर विशेष बैठकें आयोजित कर प्रक्रिया को तेज किया जाए। विशेष रूप से नहर पार क्षेत्रों और सेक्टरों में भूमि मापन व रिकॉर्ड से जुड़ी विसंगतियों को प्राथमिकता से ठीक करने के निर्देश दिए गए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो।
एलिवेटेड कॉरिडोर और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को मिलेगी गति
शहर में प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर, फ्लाईओवर और अन्य कनेक्टिविटी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि डीपीआर तैयार करने, अलाइनमेंट तय करने और बिजली-पानी जैसी यूटिलिटी शिफ्टिंग के काम तेजी से पूरे किए जाएं, ताकि निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सके। इन परियोजनाओं के पूरा होने से शहर में जाम की समस्या कम होगी और औद्योगिक क्षेत्रों तक आवागमन आसान होगा, जिससे व्यापार और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में वर्षों से खाली पड़ी छोटी-छोटी जमीनों को अब विकास के नए संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मार्जिनल लैंड का प्रभावी उपयोग कर न केवल शहरी व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा बल्कि इससे राजस्व बढ़ाने और आम लोगों को सुविधाएं देने का भी रास्ता खुलेगा। इसके साथ ही सड़क और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को तेज कर शहर की यातायात व्यवस्था और औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
लघु सचिवालय में आयोजित अंतर-एजेंसी समन्वय बैठक में शहरी विकास के प्रधान सलाहकार डीएस ढेसी ने जिले में चल रहीं परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों में देरी अब स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में एफएमडीए, नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने हिस्सा लेकर जमीनी चुनौतियों और उनकी प्रगति की जानकारी दी।
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पार्किंग, हरित क्षेत्र, सामुदायिक सुविधाओं में काम आएगी जमीन
बैठक में सबसे ज्यादा जोर सेक्टरों और विकसित क्षेत्रों में बिखरी पड़ी छोटी-छोटी जमीनों के टुकड़ों पर रहा। इन भूखंडों को लंबे समय से अनदेखा किया जाता रहा है जिससे वे या तो खाली पड़े रहते हैं या फिर अव्यवस्थित उपयोग में आते हैं। अब इन सभी भूखंडों की दोबारा पहचान कर उनका रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और उनके उपयोग के लिए समग्र योजना बनाई जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इन जमीनों का उपयोग पार्किंग, हरित क्षेत्र, सामुदायिक सुविधाओं या छोटे व्यावसायिक उपयोग के रूप में किया जा सकता है। इससे न केवल शहर की सूरत सुधरेगी, बल्कि अवैध कब्जों और गंदगी की समस्या पर भी रोक लगेगी। आम लोगों को भी अपने आसपास बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
सड़क परियोजनाओं में पारदर्शिता से बढ़ेगा भरोसा
बैठक में यह भी सामने आया कि इस बार राज्य के बजट में सड़क विकास परियोजनाओं को अधिक स्पष्टता के साथ शामिल किया गया है। अब परियोजनाओं में सड़कों के नाम, लंबाई और लागत का उल्लेख किया जा रहा है। इससे लोगों को यह जानने में आसानी होगी कि उनके क्षेत्र में कौन-सा काम कब और कैसे होगा वहीं विभागों की जवाबदेही भी तय होगी।
तकनीकी अड़चनों को हटाने के निर्देश
सड़क निर्माण में आ रहीं समस्याओं जैसे भूमि अधिग्रहण, चौड़ाई निर्धारण, सर्विस लेन और राजस्व रिकॉर्ड की गड़बड़ियों को लेकर अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी। कई परियोजनाएं इन्हीं कारणों से प्रभावित हो रही हैं। इस पर निर्देश दिए गए कि हर समस्या की अलग से तकनीकी समीक्षा कर समाधान निकाला जाए और जरूरत पड़ने पर विशेष बैठकें आयोजित कर प्रक्रिया को तेज किया जाए। विशेष रूप से नहर पार क्षेत्रों और सेक्टरों में भूमि मापन व रिकॉर्ड से जुड़ी विसंगतियों को प्राथमिकता से ठीक करने के निर्देश दिए गए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो।
एलिवेटेड कॉरिडोर और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को मिलेगी गति
शहर में प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर, फ्लाईओवर और अन्य कनेक्टिविटी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि डीपीआर तैयार करने, अलाइनमेंट तय करने और बिजली-पानी जैसी यूटिलिटी शिफ्टिंग के काम तेजी से पूरे किए जाएं, ताकि निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सके। इन परियोजनाओं के पूरा होने से शहर में जाम की समस्या कम होगी और औद्योगिक क्षेत्रों तक आवागमन आसान होगा, जिससे व्यापार और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
