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Faridabad News: मास्टर वाटर सप्लाई स्कीम से शहर की जलापूर्ति में होगा सुधान
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बुढे़ना स्थित इंटरमीडिएट बूस्टिंग स्टेशन का किया जाएगा कायाकल्प
नई डीआई पाइपलाइन और अलग बिजली फीडर से सुधरेगा दबाव
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। तेजी से बढ़ती आबादी और गिरते भूजल स्तर के बीच फरीदाबाद की जलापूर्ति व्यवस्था लंबे समय से दबाव में है। ऐसे में फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने मास्टर वाटर सप्लाई स्कीम के तहत बुढे़ना स्थित इंटरमीडिएट बूस्टिंग स्टेशन (आईबीएस) के व्यापक कायाकल्प का फैसला लिया है। इस परियोजना को शहर की जलापूर्ति सुधारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है जिससे खासकर एनआईटी और आसपास के घनी आबादी वाले इलाकों में लो-प्रेशर और अनियमित सप्लाई की समस्या कम होने की उम्मीद है।
जानकारी के अनुसार फरीदाबाद में प्रतिदिन पानी की मांग लगभग 320 से 350 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) आंकी जाती है जबकि उपलब्ध आपूर्ति करीब 220 से 240 एमएलडी के बीच ही सिमटी हुई है। यानी रोजाना करीब 80 से 100 एमएलडी पानी की कमी बनी रहती है। इस अंतर का असर सबसे ज्यादा अंतिम छोर पर बसे इलाकों में देखने को मिलता है जहां लोगों को या तो कम दबाव में पानी मिलता है या फिर सप्लाई के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
11 नलकूपों का होगा जीर्णोद्धार
एफएमडीए की नई योजना इसी अंतर को कम करने पर केंद्रित है। इसके तहत आगरा नहर के पास और बुढे़ना आईबीएस के आसपास स्थित 11 नलकूपों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इन नलकूपों के पुराने और कंडम हो चुके इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल उपकरणों को बदला जाएगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और पानी की सप्लाई अधिक स्थिर हो सकेगी। अभी इन नलकूपों की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है लेकिन मरम्मत के बाद इनसे प्रतिदिन अतिरिक्त 15 से 20 एमएलडी पानी सिस्टम में जोड़े जाने की संभावना जताई जा रही है।
नई पाइपलाइन से तेज होगी सप्लाई
परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू पाइपलाइन नेटवर्क का आधुनिकीकरण भी है। फिलहाल कई क्षेत्रों में 200 और 300 एमएम की पुरानी पाइपलाइनें जर्जर हो चुकी हैं जिनसे लीकेज और प्रेशर लॉस की समस्या आम है। नई योजना के तहत इनकी जगह डक्टाइल आयरन (डीआई) पाइपलाइन बिछाई जाएगी जो ज्यादा टिकाऊ होने के साथ-साथ पानी के दबाव को भी बेहतर बनाएगी। इससे पानी की बर्बादी रुकने के साथ सप्लाई की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
खुद के बिजली फीडर से होगी बिना रुकावट सप्लाई
बिजली आपूर्ति को लेकर भी इस योजना में विशेष प्रावधान किए गए हैं। अक्सर पंपिंग स्टेशनों पर बिजली कटौती के कारण जलापूर्ति बाधित होती है। इसे देखते हुए आईबीएस के लिए स्वतंत्र इलेक्ट्रिक फीडर, नए ट्रांसफार्मर और बैकअप के तौर पर डीजी सेट लगाए जाएंगे। इससे पंपिंग सिस्टम बिना रुकावट के चल सकेगा और पानी की सप्लाई नियमित बनी रहेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाया जाएगा मजबूत
परियोजना के तहत आईबीएस परिसर में सिविल वर्क भी किए जाएंगे, जिनमें संरचनाओं की मरम्मत, आंतरिक सड़कों का निर्माण और समग्र इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि यह अपग्रेडेशन आने वाले कई वर्षों तक शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को स्थिर आधार देगा।
लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना समय पर पूरी हो जाती है तो शहर के कई इलाकों में पानी के लिए रोजाना होने वाली जद्दोजहद कम हो सकती है। हालांकि बढ़ती आबादी और सीमित जल स्रोतों को देखते हुए दीर्घकालिक समाधान के लिए सतही जल स्रोतों और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर भी समानांतर काम भी किया जा रहा है।
लोगों की सुविधा के लिए प्राधिकरण तेजी से काम कर रहा है। जल्द इस परियोजना का काम भी शुरू कर दिया जाएगा। - विशाल बंसल, चीफ इंजीनियर एफएमडीए
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नई डीआई पाइपलाइन और अलग बिजली फीडर से सुधरेगा दबाव
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। तेजी से बढ़ती आबादी और गिरते भूजल स्तर के बीच फरीदाबाद की जलापूर्ति व्यवस्था लंबे समय से दबाव में है। ऐसे में फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने मास्टर वाटर सप्लाई स्कीम के तहत बुढे़ना स्थित इंटरमीडिएट बूस्टिंग स्टेशन (आईबीएस) के व्यापक कायाकल्प का फैसला लिया है। इस परियोजना को शहर की जलापूर्ति सुधारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है जिससे खासकर एनआईटी और आसपास के घनी आबादी वाले इलाकों में लो-प्रेशर और अनियमित सप्लाई की समस्या कम होने की उम्मीद है।
जानकारी के अनुसार फरीदाबाद में प्रतिदिन पानी की मांग लगभग 320 से 350 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) आंकी जाती है जबकि उपलब्ध आपूर्ति करीब 220 से 240 एमएलडी के बीच ही सिमटी हुई है। यानी रोजाना करीब 80 से 100 एमएलडी पानी की कमी बनी रहती है। इस अंतर का असर सबसे ज्यादा अंतिम छोर पर बसे इलाकों में देखने को मिलता है जहां लोगों को या तो कम दबाव में पानी मिलता है या फिर सप्लाई के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
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11 नलकूपों का होगा जीर्णोद्धार
एफएमडीए की नई योजना इसी अंतर को कम करने पर केंद्रित है। इसके तहत आगरा नहर के पास और बुढे़ना आईबीएस के आसपास स्थित 11 नलकूपों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इन नलकूपों के पुराने और कंडम हो चुके इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल उपकरणों को बदला जाएगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और पानी की सप्लाई अधिक स्थिर हो सकेगी। अभी इन नलकूपों की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है लेकिन मरम्मत के बाद इनसे प्रतिदिन अतिरिक्त 15 से 20 एमएलडी पानी सिस्टम में जोड़े जाने की संभावना जताई जा रही है।
नई पाइपलाइन से तेज होगी सप्लाई
परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू पाइपलाइन नेटवर्क का आधुनिकीकरण भी है। फिलहाल कई क्षेत्रों में 200 और 300 एमएम की पुरानी पाइपलाइनें जर्जर हो चुकी हैं जिनसे लीकेज और प्रेशर लॉस की समस्या आम है। नई योजना के तहत इनकी जगह डक्टाइल आयरन (डीआई) पाइपलाइन बिछाई जाएगी जो ज्यादा टिकाऊ होने के साथ-साथ पानी के दबाव को भी बेहतर बनाएगी। इससे पानी की बर्बादी रुकने के साथ सप्लाई की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
खुद के बिजली फीडर से होगी बिना रुकावट सप्लाई
बिजली आपूर्ति को लेकर भी इस योजना में विशेष प्रावधान किए गए हैं। अक्सर पंपिंग स्टेशनों पर बिजली कटौती के कारण जलापूर्ति बाधित होती है। इसे देखते हुए आईबीएस के लिए स्वतंत्र इलेक्ट्रिक फीडर, नए ट्रांसफार्मर और बैकअप के तौर पर डीजी सेट लगाए जाएंगे। इससे पंपिंग सिस्टम बिना रुकावट के चल सकेगा और पानी की सप्लाई नियमित बनी रहेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाया जाएगा मजबूत
परियोजना के तहत आईबीएस परिसर में सिविल वर्क भी किए जाएंगे, जिनमें संरचनाओं की मरम्मत, आंतरिक सड़कों का निर्माण और समग्र इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि यह अपग्रेडेशन आने वाले कई वर्षों तक शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को स्थिर आधार देगा।
लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना समय पर पूरी हो जाती है तो शहर के कई इलाकों में पानी के लिए रोजाना होने वाली जद्दोजहद कम हो सकती है। हालांकि बढ़ती आबादी और सीमित जल स्रोतों को देखते हुए दीर्घकालिक समाधान के लिए सतही जल स्रोतों और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर भी समानांतर काम भी किया जा रहा है।
लोगों की सुविधा के लिए प्राधिकरण तेजी से काम कर रहा है। जल्द इस परियोजना का काम भी शुरू कर दिया जाएगा। - विशाल बंसल, चीफ इंजीनियर एफएमडीए