{"_id":"6a42b7fa1c43e2744906d83b","slug":"the-nikshay-poshan-yojana-appears-to-be-faltering-in-the-district-faridabad-news-c-26-1-fbd1021-73592-2026-06-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है निक्षय पोषण योजना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है निक्षय पोषण योजना
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टीबी रोगी को हर महीने एक हजार रुपये की सहायता राशि देने का प्रावधान, बड़ी संख्या में मरीज कर रहे इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई निक्षय पोषण योजना जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है। सरकार की ओर से प्रत्येक टीबी रोगी को हर महीने एक हजार रुपये की सहायता राशि देने का प्रावधान है, लेकिन जिले में बड़ी संख्या में मरीज कई महीनों से इस राशि का इंतजार कर रहे हैं। राशि नहीं मिलने से मरीज और उनके परिजन जिला टीबी यूनिट के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जिले में वर्तमान में करीब 6500 टीबी रोगी हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की है, जिन्हें कई महीनों से निक्षय पोषण योजना का लाभ नहीं मिला है। हैरानी की बात यह है कि कई मरीजों के बैंक खाते तक नहीं खुले हैं, जबकि कुछ मरीजों और उनके परिजनों को इस योजना के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है।
टीबी जैसी गंभीर बीमारी में मरीजों को नियमित दवा के साथ पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सरकार की यह सहायता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में समय पर राशि नहीं मिलने से मरीजों के समक्ष अतिरिक्त आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है।
विज्ञापन
दो महीने से लगा रहे चक्कर
सनी ने बताया कि उनकी पत्नी काजल टीबी से पीड़ित है और पिछले दो महीने से उनका इलाज चल रहा है। उन्होंने योजना का लाभ लेने के लिए कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन अब तक खाते में कोई राशि नहीं आई। सनी का कहना है कि बीमारी के कारण पहले ही आर्थिक परेशानी है, ऐसे में सहायता राशि नहीं मिलने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
इलाज जारी, खाते में नहीं आई एक भी किश्त
विनोद कुमार ने बताया कि उनका कई महीनों से टीबी का इलाज चल रहा है। उन्होंने सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी हैं, लेकिन अब तक उनके खाते में एक बार भी निक्षय पोषण योजना की राशि नहीं आई है। उन्होंने बताया कि कई बार जिला टीबी यूनिट में संपर्क करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
जानकारी के अभाव में योजना के लाभ से वंचित
अजय कुमार ने बताया कि उनकी बेटी निधि टीबी से संक्रमित है और उसका इलाज चल रहा है। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है, ऐसे में इलाज के साथ पौष्टिक आहार का खर्च उठाना भी मुश्किल हो रहा है। अजय का कहना है कि उन्हें काफी समय तक निक्षय पोषण योजना के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। जब अन्य मरीजों से इस योजना के बारे में पता चला, तब उन्होंने लाभ लेने की प्रक्रिया शुरू की।
बहन को भी नहीं मिली राशि, अब मां भी वंचित
डॉली ने बताया कि उनकी बहन को भी टीबी थी, जिसकी पिछले वर्ष मौत हो गई। बीमारी के दौरान बहन को निक्षय पोषण योजना की राशि नहीं मिल सकी। अब उनकी मां टीबी से पीड़ित हैं और उनका इलाज चल रहा है, लेकिन उन्हें भी अब तक योजना का लाभ नहीं मिला है। डॉली का कहना है कि कई बार पूछताछ के बावजूद सहायता राशि नहीं मिल सकी है।
पहले बजट की कमी के कारण रोगियों को राशि उपलब्ध नहीं कराई जा सकी थी। अब बजट आ गया है और रोगियों को राशि दी जा रही है। जो मामले अप्रैल के बाद आए हैं, उनके बैंक खातों का ब्योरा लिया जा रहा है। ब्योरा प्राप्त होने के बाद धीरे-धीरे उनके खातों में भी राशि भेज दी जाएगी।-डॉ. हरजिंदर सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई निक्षय पोषण योजना जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है। सरकार की ओर से प्रत्येक टीबी रोगी को हर महीने एक हजार रुपये की सहायता राशि देने का प्रावधान है, लेकिन जिले में बड़ी संख्या में मरीज कई महीनों से इस राशि का इंतजार कर रहे हैं। राशि नहीं मिलने से मरीज और उनके परिजन जिला टीबी यूनिट के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जिले में वर्तमान में करीब 6500 टीबी रोगी हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की है, जिन्हें कई महीनों से निक्षय पोषण योजना का लाभ नहीं मिला है। हैरानी की बात यह है कि कई मरीजों के बैंक खाते तक नहीं खुले हैं, जबकि कुछ मरीजों और उनके परिजनों को इस योजना के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है।
विज्ञापन
टीबी जैसी गंभीर बीमारी में मरीजों को नियमित दवा के साथ पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सरकार की यह सहायता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में समय पर राशि नहीं मिलने से मरीजों के समक्ष अतिरिक्त आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है।
विज्ञापन
दो महीने से लगा रहे चक्कर
सनी ने बताया कि उनकी पत्नी काजल टीबी से पीड़ित है और पिछले दो महीने से उनका इलाज चल रहा है। उन्होंने योजना का लाभ लेने के लिए कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन अब तक खाते में कोई राशि नहीं आई। सनी का कहना है कि बीमारी के कारण पहले ही आर्थिक परेशानी है, ऐसे में सहायता राशि नहीं मिलने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
इलाज जारी, खाते में नहीं आई एक भी किश्त
विनोद कुमार ने बताया कि उनका कई महीनों से टीबी का इलाज चल रहा है। उन्होंने सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी हैं, लेकिन अब तक उनके खाते में एक बार भी निक्षय पोषण योजना की राशि नहीं आई है। उन्होंने बताया कि कई बार जिला टीबी यूनिट में संपर्क करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
जानकारी के अभाव में योजना के लाभ से वंचित
अजय कुमार ने बताया कि उनकी बेटी निधि टीबी से संक्रमित है और उसका इलाज चल रहा है। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है, ऐसे में इलाज के साथ पौष्टिक आहार का खर्च उठाना भी मुश्किल हो रहा है। अजय का कहना है कि उन्हें काफी समय तक निक्षय पोषण योजना के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। जब अन्य मरीजों से इस योजना के बारे में पता चला, तब उन्होंने लाभ लेने की प्रक्रिया शुरू की।
बहन को भी नहीं मिली राशि, अब मां भी वंचित
डॉली ने बताया कि उनकी बहन को भी टीबी थी, जिसकी पिछले वर्ष मौत हो गई। बीमारी के दौरान बहन को निक्षय पोषण योजना की राशि नहीं मिल सकी। अब उनकी मां टीबी से पीड़ित हैं और उनका इलाज चल रहा है, लेकिन उन्हें भी अब तक योजना का लाभ नहीं मिला है। डॉली का कहना है कि कई बार पूछताछ के बावजूद सहायता राशि नहीं मिल सकी है।
पहले बजट की कमी के कारण रोगियों को राशि उपलब्ध नहीं कराई जा सकी थी। अब बजट आ गया है और रोगियों को राशि दी जा रही है। जो मामले अप्रैल के बाद आए हैं, उनके बैंक खातों का ब्योरा लिया जा रहा है। ब्योरा प्राप्त होने के बाद धीरे-धीरे उनके खातों में भी राशि भेज दी जाएगी।-डॉ. हरजिंदर सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी।