{"_id":"69be9b4e08d237e2de084533","slug":"fema-expresses-concern-over-vacant-seats-in-neet-pg-delhi-ncr-news-c-340-1-del1004-128751-2026-03-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: नीट-पीजी की खाली सीटों पर फेमा ने चिंता की व्यक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: नीट-पीजी की खाली सीटों पर फेमा ने चिंता की व्यक्त
विज्ञापन
विज्ञापन
-केवल सीटों की संख्या बढ़ाने से हटाकर उनकी गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान करें केंद्रित
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) नीट-पीजी की खाली सीटों पर चिंता जताई है। फेमा के मुख्य संरक्षक डॉ. रोहन कृष्णन ने बताया कि हालिया रिपोर्ट में देशभर में हजारों नीट-पीजी सीटों के खाली रहने की बात सामने आई है जो गंभीर और तत्काल आत्ममंथन की मांग करती है। बड़ी संख्या में खाली सीटें दूरदराज और अविकसित क्षेत्रों में स्थित संस्थानों में हैं, जहां कार्य परिस्थितियां, सुरक्षा और अकादमिक विकास के अवसर सीमित होते हैं। जब तक इन क्षेत्रों में वित्तीय, अकादमिक और पेशेवर प्रोत्साहन नहीं दिए जाएंगे। तब तक इन सीटों की मांग कम ही रहेगी।
पिछले कुछ वर्षों में भारत में पीजी मेडिकल सीटों का तेजी से विस्तार हुआ है। यह कदम नीयत के स्तर पर सराहनीय है। लेकिन इसके साथ-साथ प्रशिक्षण की गुणवत्ता, आधारभूत संरचना, फैकल्टी और चिकित्सीय अनुभव में समान अनुपात में सुधार नहीं हुआ। बड़ी संख्या में नई सीटें उपलब्ध होने के बावजूद वह अभ्यर्थियों के लिए आकर्षक नहीं बन पाईं। उन्होंने कहा कि फेमा का स्पष्ट मत है कि खाली नीट-पीजी सीटों को डॉक्टरों की अधिकता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह वास्तव में चिकित्सा शिक्षा की नीतिगत और संरचनात्मक कमियों को उजागर करता है। अब समय आ गया है कि ध्यान केवल सीटों की संख्या बढ़ाने से हटाकर उनकी गुणवत्ता सुधारने पर केंद्रित किया जाए।
Trending Videos
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) नीट-पीजी की खाली सीटों पर चिंता जताई है। फेमा के मुख्य संरक्षक डॉ. रोहन कृष्णन ने बताया कि हालिया रिपोर्ट में देशभर में हजारों नीट-पीजी सीटों के खाली रहने की बात सामने आई है जो गंभीर और तत्काल आत्ममंथन की मांग करती है। बड़ी संख्या में खाली सीटें दूरदराज और अविकसित क्षेत्रों में स्थित संस्थानों में हैं, जहां कार्य परिस्थितियां, सुरक्षा और अकादमिक विकास के अवसर सीमित होते हैं। जब तक इन क्षेत्रों में वित्तीय, अकादमिक और पेशेवर प्रोत्साहन नहीं दिए जाएंगे। तब तक इन सीटों की मांग कम ही रहेगी।
पिछले कुछ वर्षों में भारत में पीजी मेडिकल सीटों का तेजी से विस्तार हुआ है। यह कदम नीयत के स्तर पर सराहनीय है। लेकिन इसके साथ-साथ प्रशिक्षण की गुणवत्ता, आधारभूत संरचना, फैकल्टी और चिकित्सीय अनुभव में समान अनुपात में सुधार नहीं हुआ। बड़ी संख्या में नई सीटें उपलब्ध होने के बावजूद वह अभ्यर्थियों के लिए आकर्षक नहीं बन पाईं। उन्होंने कहा कि फेमा का स्पष्ट मत है कि खाली नीट-पीजी सीटों को डॉक्टरों की अधिकता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह वास्तव में चिकित्सा शिक्षा की नीतिगत और संरचनात्मक कमियों को उजागर करता है। अब समय आ गया है कि ध्यान केवल सीटों की संख्या बढ़ाने से हटाकर उनकी गुणवत्ता सुधारने पर केंद्रित किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन