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Delhi: आज से जीबी पंत अस्पताल में मरीजों को मिलेगी न्यूरो इंटरवेंशन कैथ लैब सुविधा, मुख्यमंत्री करेंगी शुभारंभ

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 09 Feb 2026 01:40 AM IST
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सार

दिल्ली सरकार जीबी पंत अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार करने जा रही है। अस्पताल में न्यूरो इंटरवेंशन कैथ लैब, न्यूरो सर्जिकल आईसीयू और 256 स्लाइस सीटी स्कैन मशीन की सुविधा का सोमवार को शुभारंभ होगा। 

From today, patients will get the facility of Neuro Intervention Cath Lab in GB Pant Hospital.
demo - फोटो : AI Image
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विस्तार

न्यूरो संबंधी बीमारियों से जूझने वाले मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। दिल्ली सरकार जीबी पंत अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार करने जा रही है। इसमें मरीज की चिकित्सीय जांच से लेकर उसके उपचार में मदद मिलेगी। साथ ही हृदय संबंधी बीमारियों की जांच के लिए भी कदम उठाया है। अस्पताल में न्यूरो इंटरवेंशन कैथ लैब, न्यूरो सर्जिकल आईसीयू और 256 स्लाइस सीटी स्कैन मशीन की सुविधा का सोमवार को शुभारंभ होगा। 

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उद्घाटन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह करेंगे। अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. बीएल चौधरी और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में सचिव निखिल कुमार भी उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। जानकारी के अनुसार न्यूरो इंटरवेंशन कैथ लैब एक अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा है। 
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इसमें मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की बीमारियों के लिए न्यूनतम इनवेसिव(कम चीर-फाड़) के उपचार की सुविधा मिलती है। लैब में स्ट्रोक, एन्यूरिज्म, और ट्यूमर जैसी गंभीर स्थितियों के इलाज के लिए हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग का इस्तेमाल किया जाता है। इस लैब की मदद से न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन और रेडियोलॉजिस्ट को नसों संबंधी समस्याओं की सटीकता से बीमारी का उपचार और जांच कर सकेंगे।

एक से पांच सेकेंड में मिलेगी थ्रीडी तस्वीर
अस्पताल में 256 स्लाइस सीटी स्कैन मशीन की सुविधा भी मरीजों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। इसकी मदद से एक से पांच सेकेंड के समय में शरीर के अंग (जैसे हृदय) की थ्रीडी तस्वीर सटीकता के साथ मिलेगी। आपातकालीन स्थिति में स्ट्रोक, हृदय के मरीजों की चिकित्सीय जांच कर तुरंत उपचार शुरू किया जा सकेगा। यह तकनीक एक ही रोटेशन में 256 स्लाइस का डेटा लेती है। दिल की धड़कन की इमेज के लिए मरीजों को ज्यादा समय के लिए सांस रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसमें रेडिएशन का स्तर भी कम हो जाता है।

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