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Ghaziabad News: शिक्षा विभाग की एडवाइजरी, पुलिस ने किया चार गेम बैन करने का आग्रह
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साहिबाबाद/गाजियाबाद। भारत सिटी सोसायटी में तीन नाबालिग बहनों के नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने के मामले ने आमजन से लेकर प्रशासन तक सभी को झकझोर कर रख दिया है। जांच के दौरान सामने आए ऑनलाइन गेम और मोबाइल की लत से जुड़े संकेतों के बाद पुलिस ने शासन को एक रिपोर्ट भेजी है। इसमें चार मोबाइल गेम पर देशभर में प्रतिबंध लगाने की संस्तुति की गई है। वहीं, घटना के बाद शिक्षा विभाग भी सतर्क हो गया है। जिला स्तर पर एडवाइजरी जारी कर स्कूलों में बच्चों की मोबाइल गतिविधियों पर निगरानी और पढ़ाई के तौर-तरीकों में बदलाव की दिशा में कदम उठाने को कहा गया है।
चार गेम पर प्रतिबंध की सिफारिश, शासन को भेजी रिपोर्ट
डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटील ने बताया कि पुलिस ने मामले में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी है। रिपोर्ट में चार ऑनलाइन गेम पॉपी प्लेटाइम, द बेबी इन यलो, ईविल नन और आई-स्क्रीम के नाम दर्ज करते हुए इन पर देशभर में प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है। मंगलवार देर रात हुई इस घटना के पीछे शुरुआत से ही कोरियन कल्चर और ऑनलाइन गेम की लत की आशंका जताई जा रही है। किशोरियों ने जिस कमरे से कूदकर आत्महत्या की, वहीं से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी पसंदीदा चीजों के साथ इन चारों गेम का उल्लेख किया है। नोट में लिखा गया है कि ये उनके पसंदीदा गेम थे और वे इन्हें खेलती थीं।
जरूरत होने पर ही मोबाइल पर दिया जाए शैक्षणिक कार्य
जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि प्रदूषण या आपात परिस्थितियों में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करनी पड़ती हैं, जहां मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग जरूरी हो जाता है। हालांकि, हाल में प्रधानाचार्यों के साथ हुई बैठक में यह स्पष्ट किया गया है कि छात्रों को केवल आवश्यकता पड़ने पर ही मोबाइल आधारित कार्य दिया जाए। उन्होंने कहा कि जब छात्र नियमित रूप से स्कूल आ रहे हों, तब मोबाइल के उपयोग को न्यूनतम रखा जाए। साथ ही स्कूलों को छात्रों को मोबाइल के दुष्प्रभावों और डिजिटल संतुलन के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्कूलों की पीटीएम में अब मोबाइल उपयोग पर भी फोकस
घटना के बाद शिक्षा विभाग ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। अब स्कूलों में होने वाली पैरेंट्स-टीचर मीटिंग (पीटीएम) में बच्चों के अंकों और किताबी पढ़ाई के साथ-साथ उनके मोबाइल उपयोग और ऑनलाइन गतिविधियों पर भी चर्चा की जाएगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी यादव ने बताया कि सभी स्कूलों को सलाह दी गई है कि पीटीएम में यह आकलन किया जाए कि बच्चे कितनी देर मोबाइल चला रहे हैं। उसमें किस तरह की सामग्री देख रहे हैं। बेसिक शिक्षा से जुड़े सभी स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से इस दिशा में काम करने के निर्देश दिए गए हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी के अनुसार, इस घटना के बाद अभिभावकों की चिंता बढ़ी है। बच्चों को मोबाइल की लत से दूर करने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। पीटीएम के दौरान शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों की मोबाइल आदतों का आकलन करेंगे और इसे कम करने की रणनीति तैयार करेंगे। उन्होंने बताया कि जिस तरह अंकों के आधार पर छात्रों का ग्रेड तैयार किया जाता है, उसी तर्ज पर मोबाइल प्रयोग को लेकर भी एक रिपोर्ट कार्ड बनाया जाएगा। मोबाइल का कम उपयोग करने पर बच्चों के ग्रेड बेहतर होंगे। इससे पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी, बल्कि उद्देश्य सिर्फ मोबाइल की लत को नियंत्रित करना है।
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चार गेम पर प्रतिबंध की सिफारिश, शासन को भेजी रिपोर्ट
डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटील ने बताया कि पुलिस ने मामले में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी है। रिपोर्ट में चार ऑनलाइन गेम पॉपी प्लेटाइम, द बेबी इन यलो, ईविल नन और आई-स्क्रीम के नाम दर्ज करते हुए इन पर देशभर में प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है। मंगलवार देर रात हुई इस घटना के पीछे शुरुआत से ही कोरियन कल्चर और ऑनलाइन गेम की लत की आशंका जताई जा रही है। किशोरियों ने जिस कमरे से कूदकर आत्महत्या की, वहीं से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी पसंदीदा चीजों के साथ इन चारों गेम का उल्लेख किया है। नोट में लिखा गया है कि ये उनके पसंदीदा गेम थे और वे इन्हें खेलती थीं।
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जरूरत होने पर ही मोबाइल पर दिया जाए शैक्षणिक कार्य
जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि प्रदूषण या आपात परिस्थितियों में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करनी पड़ती हैं, जहां मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग जरूरी हो जाता है। हालांकि, हाल में प्रधानाचार्यों के साथ हुई बैठक में यह स्पष्ट किया गया है कि छात्रों को केवल आवश्यकता पड़ने पर ही मोबाइल आधारित कार्य दिया जाए। उन्होंने कहा कि जब छात्र नियमित रूप से स्कूल आ रहे हों, तब मोबाइल के उपयोग को न्यूनतम रखा जाए। साथ ही स्कूलों को छात्रों को मोबाइल के दुष्प्रभावों और डिजिटल संतुलन के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्कूलों की पीटीएम में अब मोबाइल उपयोग पर भी फोकस
घटना के बाद शिक्षा विभाग ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। अब स्कूलों में होने वाली पैरेंट्स-टीचर मीटिंग (पीटीएम) में बच्चों के अंकों और किताबी पढ़ाई के साथ-साथ उनके मोबाइल उपयोग और ऑनलाइन गतिविधियों पर भी चर्चा की जाएगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी यादव ने बताया कि सभी स्कूलों को सलाह दी गई है कि पीटीएम में यह आकलन किया जाए कि बच्चे कितनी देर मोबाइल चला रहे हैं। उसमें किस तरह की सामग्री देख रहे हैं। बेसिक शिक्षा से जुड़े सभी स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से इस दिशा में काम करने के निर्देश दिए गए हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी के अनुसार, इस घटना के बाद अभिभावकों की चिंता बढ़ी है। बच्चों को मोबाइल की लत से दूर करने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। पीटीएम के दौरान शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों की मोबाइल आदतों का आकलन करेंगे और इसे कम करने की रणनीति तैयार करेंगे। उन्होंने बताया कि जिस तरह अंकों के आधार पर छात्रों का ग्रेड तैयार किया जाता है, उसी तर्ज पर मोबाइल प्रयोग को लेकर भी एक रिपोर्ट कार्ड बनाया जाएगा। मोबाइल का कम उपयोग करने पर बच्चों के ग्रेड बेहतर होंगे। इससे पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी, बल्कि उद्देश्य सिर्फ मोबाइल की लत को नियंत्रित करना है।