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Ghaziabad News: कुम्हैड़ा में खेती के साथ हो रहा बिजली उत्पादन
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अनिल त्यागी
गाजियाबाद। मुरादनगर ब्लॉक के कुम्हैड़ा को गांव नहीं, मिनी पावर हाउस कहा जा सकता है। गांव के 200 लोग खेती के साथ-साथ 40 हजार यूनिट प्रति माह बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। वैसे इन 200 परिवारों को माह में करीब 46 हजार यूनिट की जरूरत पड़ती है। ऐसे में छह हजार यूनिट ही इन परिवारों को ऊर्जा निगम से लेनी पड़ती है। खास बात यह है कि 200 में करीब 50 परिवार ऐसे हैं, जिनके घर का बिजली खर्च प्रतिमाह 170-180 यूनिट तक ही है। इसलिए इन लोगों को निगम से उल्टा पैसा दिया जा रहा है। इन परिवारों को हो रहे फायदे को देखते हुए गांव के अन्य 340 परिवार भी अपनी घरों की छतों पर पीएम सूर्य घर योजना के तहत सौर ऊर्जा लगाने की मांग कर रहे हैं।
कुम्हैड़ा गांव में 2024 में सीएसआर फंड से 200 किसान परिवाराें की छत पर पीएम सूर्य घर योजना के तहत दो दो किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा प्लांट लगाने का काम हुआ था। शुरूआत में लोगों ने इसकी महत्ता को नहीं समझा लेकिन जब माह का बिल कम आने लगा तो लोग इसको लेकर जागरूक हुए। पहले लोग इसके रखरखाव और साफ सफाई पर भी ध्यान नहीं रखते थे। अब उन्होंने प्लांट की नियमित साफ सफाई का काम शुरू किया है। इस बारे में ग्राम प्रधान बिजेंद्र कुमार ने बताया कि गांव के 340 परिवार अभी सौर ऊर्जा प्लांट लगने से वंचित रह गए हैं, उनके यहां भी प्लांट लगाने की प्रक्रिया शुरू कराने के लिए सीडीओ को पत्र दिया गया है।-शुरूआत में खूब हुआ दुष्प्रचार, नहीं लगवाया प्लांट : ग्राम प्रधान ने बताया कि सीएसआर फंड से पूरे गांव को ही सौर ऊर्जा से लैस करने की योजना थी। 200 परिवारों ने तो कोई आपत्ति नहीं की, लेकिन कुछ लोगों ने दुष्प्रचार शुरू कर दिया कि स्मार्ट मीटर लग जाएंगे, फिर बिल ज्यादा आने लगेगा। कुछ लोगों ने कहा कि सौर ऊर्जा से ज्यादा फायदा किसी को नहीं होता। यह भी कहा गया कि यह सब बिजली चोरी रोकने को हो रहा है। इसके बाद आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया और पूरे गांव को सौर ऊर्जा से लैस कराने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन अब लोग इसकी महत्ता को समझ रहे हैं। वह खुद ही सौर ऊर्जा का प्लांट लगाने को राजी हो गए हैं।
पहले आता था 1500-1600 बिल, अब 150-200
गांव निवासी प्रवीण ने बताया कि पहले उनको प्रति माह 1500-1600 रुपये प्रति माह बिल चुकाना पड़ता था, लेकिन अब उनको केवल 150-200 रुपये चुकाने पड़ते हैं। शेष राशि सौर ऊर्जा से उत्पादित होने वाली ऊर्जा से समायोजित कर ली जाती है।
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कुम्हैड़ा जिले का पहला ऐसा गांव है, जहां 40 हजार यूनिट से अधिक ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। कई लोग ऐसे भी हैं, जो कम खर्च और अधिक उत्पादन करके ऊर्जा निगम से उल्टा पैसा ले रहे हैं। इसको बढावा देने के लिए ऊर्जा निगम लगातार प्रयास कर रहा है।
-महेश उपाध्याय, अधीक्षण अभियंता, जोन तीन।
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कुम्हैड़ा गांव में 2024 में सीएसआर फंड से 200 किसान परिवाराें की छत पर पीएम सूर्य घर योजना के तहत दो दो किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा प्लांट लगाने का काम हुआ था। शुरूआत में लोगों ने इसकी महत्ता को नहीं समझा लेकिन जब माह का बिल कम आने लगा तो लोग इसको लेकर जागरूक हुए। पहले लोग इसके रखरखाव और साफ सफाई पर भी ध्यान नहीं रखते थे। अब उन्होंने प्लांट की नियमित साफ सफाई का काम शुरू किया है। इस बारे में ग्राम प्रधान बिजेंद्र कुमार ने बताया कि गांव के 340 परिवार अभी सौर ऊर्जा प्लांट लगने से वंचित रह गए हैं, उनके यहां भी प्लांट लगाने की प्रक्रिया शुरू कराने के लिए सीडीओ को पत्र दिया गया है।-शुरूआत में खूब हुआ दुष्प्रचार, नहीं लगवाया प्लांट : ग्राम प्रधान ने बताया कि सीएसआर फंड से पूरे गांव को ही सौर ऊर्जा से लैस करने की योजना थी। 200 परिवारों ने तो कोई आपत्ति नहीं की, लेकिन कुछ लोगों ने दुष्प्रचार शुरू कर दिया कि स्मार्ट मीटर लग जाएंगे, फिर बिल ज्यादा आने लगेगा। कुछ लोगों ने कहा कि सौर ऊर्जा से ज्यादा फायदा किसी को नहीं होता। यह भी कहा गया कि यह सब बिजली चोरी रोकने को हो रहा है। इसके बाद आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया और पूरे गांव को सौर ऊर्जा से लैस कराने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन अब लोग इसकी महत्ता को समझ रहे हैं। वह खुद ही सौर ऊर्जा का प्लांट लगाने को राजी हो गए हैं।
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पहले आता था 1500-1600 बिल, अब 150-200
गांव निवासी प्रवीण ने बताया कि पहले उनको प्रति माह 1500-1600 रुपये प्रति माह बिल चुकाना पड़ता था, लेकिन अब उनको केवल 150-200 रुपये चुकाने पड़ते हैं। शेष राशि सौर ऊर्जा से उत्पादित होने वाली ऊर्जा से समायोजित कर ली जाती है।
कुम्हैड़ा जिले का पहला ऐसा गांव है, जहां 40 हजार यूनिट से अधिक ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। कई लोग ऐसे भी हैं, जो कम खर्च और अधिक उत्पादन करके ऊर्जा निगम से उल्टा पैसा ले रहे हैं। इसको बढावा देने के लिए ऊर्जा निगम लगातार प्रयास कर रहा है।
-महेश उपाध्याय, अधीक्षण अभियंता, जोन तीन।