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Ghaziabad News: अवैध फैक्टरियों में वैध मिलते हैं विद्युत कनेक्शन
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निशा ठाकुर
साहिबाबाद। औद्योगिक इकाइयों के संचालन को लेकर ऊर्जा निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अकेले लोनी की करीब 300 से अधिक अवैध फैक्टरियों को बिना संबंधित विभागों की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और आवश्यक जांच-पड़ताल के ही विद्युत कनेक्शन जारी कर दिए गए। आरोप यह भी है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिन फैक्टरियों का विद्युत कनेक्शन पूर्व में कटवा दिया, ऊर्जा निगम की ओर से दूसरी तो क्या तीसरी बार भी वहां नया कनेक्शन दे दिया गया।
ऐसे कई मामले लोनी के आर्य नगर और लक्ष्मी गार्डन कालोनी में सामने आए हैं। यहां कार्बन फैक्टरी में और ढलाई का अवैध काम किया जा रहा था। पीसीबी अधिकारियों का कहना है कि यहां आवासीय इमारत में संचालित हो रही फैक्टरियों को बिना किसी पड़ताल के व्यावसायिक विद्युत कनेक्शन दे दिया गया। हैरत की बात यह है कि ऊर्जा निगम ने यह कनेक्शन बिना किसी अन्य विभाग के एनओसी के दे दिए थे जो बाद में कटवाए गए।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की टीम ने विभिन्न स्थानों पर छापा मारकर इन अवैध इकाइयों का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान कई फैक्टरियों के बिजली कनेक्शन भी कटवाए गए, लेकिन आरोप है कि बाद में ऊर्जा निगम ने उन्हीं इकाइयों को दोबारा नए विद्युत कनेक्शन जारी कर दिए। यह प्रक्रिया कई बार दोहराई गई, जिससे विभागीय जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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इनसेट
केस-1
आर्य नगर स्थित कार्बन फैक्टरी का विद्युत कनेक्शन दिसंबर के अंत में काट दिया गया लेकिन जून में जब दोबारा निरीक्षण हुआ तो यहां दोबारा से बिजली आपूर्ति होती हुई पाई गई, बाद में 4 जून को इसका कनेक्शन दोबारा काटा गया।
केस-2
लोनी के लक्ष्मी गार्डन गली नंबर तीन में हामिद के नाम से कनेक्शन दिया गया था, यहां भी जनवरी के पहले सप्ताह में कनेक्शन काटा गया लेकिन जून में दोबारा यहां बिजली जुड़ी हुई पाई गई। ऐसे एक, दो नहीं बल्कि लोनी के लक्ष्मीगार्डन, बेहटा हाजीपुर और आर्यनगर में कई मामले सामने आए। इसके बाद ही ऊर्जा निगम को स्पष्ट किया गया कि वह किसी भी औद्योगिक इकाई को कनेक्शन देने से पहले पीसीबी की एनओसी अवश्य मांगेंगे।
इनसेट
लोनी में आवासीय इलाकों में संचालित की जा रही थीं फैक्टरियां
सहायक पर्यावरण अभियंता एसपी सिंह ने बताया कि बीते चार माह में लोनी में 300 से अधिक अवैध फैक्टरियों को सील किया जा चुका है। सभी अवैध तौर पर आवासीय इलाकों में संचालित की जा रही थीं और हवा से लेकर पानी तक दूषित कर रही थीं। सभी फैक्टरियों में विद्युत कनेक्शन पाए गए। हैरानी की बात यह है कि आवासीय इमारत में चल रही दो कमरों के मकान में व्यावसायिक विद्युत कनेक्शन दिए गए थे जो बाद में ऊर्जा निगम की टीम के सहयोग से ही कटवाए गए।
इनसेट
यमुना एक्शन प्लान के तहत हो रही सख्ती
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यमुना को मैली न होने देने की कवायद शुरू की गई है। इसी के तहत यमुना जिस जनपदों के आस-पास से गुजर रही है, वहां यमुना एक्शन प्लान बनाया गया है। इसके तहत यमुना में दूषित करने वाली फैक्टरियों पर डंडा चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में भी करीब 1500 ऐसी फैक्टरियां चिह्नित की गई जो हवा और पानी को दूषित कर रहे हैं। इनमें से करीब 500 फैक्टरी ऐसी हैं, जिसका दूषित पानी यमुना में जा रहा है। ऐसे में इन सभी फैक्टरियों को सील किया जा रहा है।
क्या बोले अधिकारी
जो भी कनेक्शन हैं वह पूर्व के दिए हुए हैं जो वर्तमान में कटवा दिए गए हैं। अब किसी भी औद्योगिक इकाई में कनेक्शन देने से पहले उनसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा जाता है। कनेक्शन काटने के बाद दोबारा कनेक्शन देने के मामले भी पूर्व के होंगे। अब कोई भी नया कनेक्शन देने से पहले विभिन्न विभागों के अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगे जाते हैं। नरेश भारती, मुख्य अभियंता, ऊर्जा निगम जोन दो
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साहिबाबाद। औद्योगिक इकाइयों के संचालन को लेकर ऊर्जा निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अकेले लोनी की करीब 300 से अधिक अवैध फैक्टरियों को बिना संबंधित विभागों की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और आवश्यक जांच-पड़ताल के ही विद्युत कनेक्शन जारी कर दिए गए। आरोप यह भी है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिन फैक्टरियों का विद्युत कनेक्शन पूर्व में कटवा दिया, ऊर्जा निगम की ओर से दूसरी तो क्या तीसरी बार भी वहां नया कनेक्शन दे दिया गया।
ऐसे कई मामले लोनी के आर्य नगर और लक्ष्मी गार्डन कालोनी में सामने आए हैं। यहां कार्बन फैक्टरी में और ढलाई का अवैध काम किया जा रहा था। पीसीबी अधिकारियों का कहना है कि यहां आवासीय इमारत में संचालित हो रही फैक्टरियों को बिना किसी पड़ताल के व्यावसायिक विद्युत कनेक्शन दे दिया गया। हैरत की बात यह है कि ऊर्जा निगम ने यह कनेक्शन बिना किसी अन्य विभाग के एनओसी के दे दिए थे जो बाद में कटवाए गए।
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उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की टीम ने विभिन्न स्थानों पर छापा मारकर इन अवैध इकाइयों का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान कई फैक्टरियों के बिजली कनेक्शन भी कटवाए गए, लेकिन आरोप है कि बाद में ऊर्जा निगम ने उन्हीं इकाइयों को दोबारा नए विद्युत कनेक्शन जारी कर दिए। यह प्रक्रिया कई बार दोहराई गई, जिससे विभागीय जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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केस-1
आर्य नगर स्थित कार्बन फैक्टरी का विद्युत कनेक्शन दिसंबर के अंत में काट दिया गया लेकिन जून में जब दोबारा निरीक्षण हुआ तो यहां दोबारा से बिजली आपूर्ति होती हुई पाई गई, बाद में 4 जून को इसका कनेक्शन दोबारा काटा गया।
केस-2
लोनी के लक्ष्मी गार्डन गली नंबर तीन में हामिद के नाम से कनेक्शन दिया गया था, यहां भी जनवरी के पहले सप्ताह में कनेक्शन काटा गया लेकिन जून में दोबारा यहां बिजली जुड़ी हुई पाई गई। ऐसे एक, दो नहीं बल्कि लोनी के लक्ष्मीगार्डन, बेहटा हाजीपुर और आर्यनगर में कई मामले सामने आए। इसके बाद ही ऊर्जा निगम को स्पष्ट किया गया कि वह किसी भी औद्योगिक इकाई को कनेक्शन देने से पहले पीसीबी की एनओसी अवश्य मांगेंगे।
इनसेट
लोनी में आवासीय इलाकों में संचालित की जा रही थीं फैक्टरियां
सहायक पर्यावरण अभियंता एसपी सिंह ने बताया कि बीते चार माह में लोनी में 300 से अधिक अवैध फैक्टरियों को सील किया जा चुका है। सभी अवैध तौर पर आवासीय इलाकों में संचालित की जा रही थीं और हवा से लेकर पानी तक दूषित कर रही थीं। सभी फैक्टरियों में विद्युत कनेक्शन पाए गए। हैरानी की बात यह है कि आवासीय इमारत में चल रही दो कमरों के मकान में व्यावसायिक विद्युत कनेक्शन दिए गए थे जो बाद में ऊर्जा निगम की टीम के सहयोग से ही कटवाए गए।
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यमुना एक्शन प्लान के तहत हो रही सख्ती
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यमुना को मैली न होने देने की कवायद शुरू की गई है। इसी के तहत यमुना जिस जनपदों के आस-पास से गुजर रही है, वहां यमुना एक्शन प्लान बनाया गया है। इसके तहत यमुना में दूषित करने वाली फैक्टरियों पर डंडा चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में भी करीब 1500 ऐसी फैक्टरियां चिह्नित की गई जो हवा और पानी को दूषित कर रहे हैं। इनमें से करीब 500 फैक्टरी ऐसी हैं, जिसका दूषित पानी यमुना में जा रहा है। ऐसे में इन सभी फैक्टरियों को सील किया जा रहा है।
क्या बोले अधिकारी
जो भी कनेक्शन हैं वह पूर्व के दिए हुए हैं जो वर्तमान में कटवा दिए गए हैं। अब किसी भी औद्योगिक इकाई में कनेक्शन देने से पहले उनसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा जाता है। कनेक्शन काटने के बाद दोबारा कनेक्शन देने के मामले भी पूर्व के होंगे। अब कोई भी नया कनेक्शन देने से पहले विभिन्न विभागों के अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगे जाते हैं। नरेश भारती, मुख्य अभियंता, ऊर्जा निगम जोन दो
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