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जवाहर बाग कांड: गवाह के न आने से फिर टली सुनवाई
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विशेष सीबीआई अदालत में चल रहा है मुकदमा
90 आरोपियों के खिलाफ दाखिल है आरोपपत्र
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। मथुरा के बहुचर्चित जवाहर बाग कांड से जुड़े मामले में बृहस्पतिवार को गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई नहीं हो सकी। गवाह के अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण सुनवाई टल गई। अदालत ने अब मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख 24 अगस्त निर्धारित की है।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार, मामला दो जून 2016 को मथुरा के जवाहर बाग में हुई हिंसा से जुड़ा है। अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस और जवाहर बाग में कब्जा जमाए लोगों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। इस दौरान तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष यादव समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। घटना में गोलीबारी, आगजनी और देसी बमों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई थी।
जांच में सामने आया था कि खुद को स्वाधीन भारत सुभाष सेना बताने वाले लोगों के समूह ने लंबे समय से जवाहर बाग में कब्जा कर रखा था। प्रशासन की ओर से कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू होने के बाद हालात बेकाबू हो गए और हिंसा भड़क गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मार्च 2017 में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।
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सीबीआई ने जांच पूरी करने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। इसमें रामवृक्ष यादव और चंदन बोस समेत 90 लोगों को आरोपी बनाया गया है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कई आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि पांच आरोपी अभी जेल में बंद बताए जा रहे हैं।
मामले में वर्तमान में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। गवाह के नहीं आने से एक बार फिर सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
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90 आरोपियों के खिलाफ दाखिल है आरोपपत्र
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। मथुरा के बहुचर्चित जवाहर बाग कांड से जुड़े मामले में बृहस्पतिवार को गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई नहीं हो सकी। गवाह के अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण सुनवाई टल गई। अदालत ने अब मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख 24 अगस्त निर्धारित की है।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार, मामला दो जून 2016 को मथुरा के जवाहर बाग में हुई हिंसा से जुड़ा है। अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस और जवाहर बाग में कब्जा जमाए लोगों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। इस दौरान तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष यादव समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। घटना में गोलीबारी, आगजनी और देसी बमों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई थी।
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जांच में सामने आया था कि खुद को स्वाधीन भारत सुभाष सेना बताने वाले लोगों के समूह ने लंबे समय से जवाहर बाग में कब्जा कर रखा था। प्रशासन की ओर से कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू होने के बाद हालात बेकाबू हो गए और हिंसा भड़क गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मार्च 2017 में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।
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सीबीआई ने जांच पूरी करने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। इसमें रामवृक्ष यादव और चंदन बोस समेत 90 लोगों को आरोपी बनाया गया है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कई आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि पांच आरोपी अभी जेल में बंद बताए जा रहे हैं।
मामले में वर्तमान में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। गवाह के नहीं आने से एक बार फिर सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी।