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Ghaziabad News: 50 से ज्यादा फैक्टरियों में नहीं लगे ओसीईएम...प्रदूषण कैसे हो कम
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निशा ठाकुर
साहिबाबाद। गाजियाबाद देश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर घोषित किया गया है। जबकि कुछ दिन पहले ही लोनी विश्व का सर्वाधिक प्रदूषित चुना गया था। यह हम नहीं बल्कि सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की प्रदूषण रिपोर्ट में सामने आया है। इसके बावजूद शहर में जिम्मेदार जाग नहीं रहे हैं। कई बार नोटिस के बावजूद जिले की 50 से अधिक फैक्टरियों में ऑनलाइन कंटिन्यूएस एमिएशन मॉनिटरिंग सिस्टम (ओसीईएम) नहीं लगाए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब इन्हें सील करने की तैयारी में जुट गया है।
दरअसल, जिले की पांच हजार से अधिक फैक्टरी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकृत हैं। इनको रेड, ऑरेंज, ग्रीन और ब्ल्यू चार वर्ग में बाटा गया है। अधिकारियों का कहना है कि आम तौर पर फूड प्रोसेसिंग यूनिट, टेक्सटाइल, स्टील-आयरन, केमिकल और फार्मा इंडस्ट्री में प्रदूषण निगरानी के लिए ओसीईएम लगाया जाना अनिवार्य होता है। इस मशीन को नहीं लगाने पर 55 फैक्टरियों के विद्युत कनेक्शन कटवाए थे। कार्रवाई के बाद कुछ उद्यमियों ने मशीनें लगवाई तो कुछ ने अपना उद्योग ही बदल दिया। बदले गए उद्योग के कागजात कार्यालय में जमा कराने के बाद ही इनके कनेक्शन जोड़े गए। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह का कहना है कि कुछ फैक्टरियां रह गई हैं और उनकी रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। मशीन न लगाने वाली फैक्टरियों को नोटिस देकर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
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गाजियाबाद में फैक्टरियों की यह है श्रेणी
कुल फैक्टरी- 5,690
-रेड कैटेगरी में फैक्टरियों की संख्या- 457
-ऑरेंज कैटेगरी में फैक्टरियों की संख्या- 1023
-ग्रीन कैटेगरी में फैक्टरियों की संख्या- 4183
-ब्ल्यू कैटेगरी में फैक्टरियों की संख्या- 21
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लोनी में अब तक 110 फैक्टरी कराई बंद
कुछ दिन पहले विश्व में लोनी को सर्वाधिक प्रदूषित बताया गया था। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लोनी के आवासी क्षेत्रों में चल रही अवैध फैक्टरियों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन के नेतृत्व में चल रहे अभियान में 15 दिन में अब तक 110 फैक्टरियों को न सिर्फ सील किया गया। बल्कि उनके विद्युत कनेक्शन भी कटवाए गए हैं और यह कार्रवाई अभी भी जारी है।
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उद्योग बदला तो भी देनी होगी रिपोर्ट
जिले की 55 फैक्टरियों क खिलाफ जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई की थी तो सामने आया कि काफी फैक्टरियों में उद्यमियों ने अपना काम बदल दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जिन फैक्टरियों में ओसीईएम नहीं लगाया गया है उनका सर्वे रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उनमें देखा जा रहा है कि काम बदला गया है या नहीं। यदि उद्यम बदला भी है तो उसकी रिपोर्ट देकर उद्यमी ने श्रेणी क्यों नहीं बदलवाई।
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साहिबाबाद। गाजियाबाद देश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर घोषित किया गया है। जबकि कुछ दिन पहले ही लोनी विश्व का सर्वाधिक प्रदूषित चुना गया था। यह हम नहीं बल्कि सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की प्रदूषण रिपोर्ट में सामने आया है। इसके बावजूद शहर में जिम्मेदार जाग नहीं रहे हैं। कई बार नोटिस के बावजूद जिले की 50 से अधिक फैक्टरियों में ऑनलाइन कंटिन्यूएस एमिएशन मॉनिटरिंग सिस्टम (ओसीईएम) नहीं लगाए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब इन्हें सील करने की तैयारी में जुट गया है।
दरअसल, जिले की पांच हजार से अधिक फैक्टरी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकृत हैं। इनको रेड, ऑरेंज, ग्रीन और ब्ल्यू चार वर्ग में बाटा गया है। अधिकारियों का कहना है कि आम तौर पर फूड प्रोसेसिंग यूनिट, टेक्सटाइल, स्टील-आयरन, केमिकल और फार्मा इंडस्ट्री में प्रदूषण निगरानी के लिए ओसीईएम लगाया जाना अनिवार्य होता है। इस मशीन को नहीं लगाने पर 55 फैक्टरियों के विद्युत कनेक्शन कटवाए थे। कार्रवाई के बाद कुछ उद्यमियों ने मशीनें लगवाई तो कुछ ने अपना उद्योग ही बदल दिया। बदले गए उद्योग के कागजात कार्यालय में जमा कराने के बाद ही इनके कनेक्शन जोड़े गए। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह का कहना है कि कुछ फैक्टरियां रह गई हैं और उनकी रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। मशीन न लगाने वाली फैक्टरियों को नोटिस देकर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
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गाजियाबाद में फैक्टरियों की यह है श्रेणी
कुल फैक्टरी- 5,690
-रेड कैटेगरी में फैक्टरियों की संख्या- 457
-ऑरेंज कैटेगरी में फैक्टरियों की संख्या- 1023
-ग्रीन कैटेगरी में फैक्टरियों की संख्या- 4183
-ब्ल्यू कैटेगरी में फैक्टरियों की संख्या- 21
लोनी में अब तक 110 फैक्टरी कराई बंद
कुछ दिन पहले विश्व में लोनी को सर्वाधिक प्रदूषित बताया गया था। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लोनी के आवासी क्षेत्रों में चल रही अवैध फैक्टरियों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन के नेतृत्व में चल रहे अभियान में 15 दिन में अब तक 110 फैक्टरियों को न सिर्फ सील किया गया। बल्कि उनके विद्युत कनेक्शन भी कटवाए गए हैं और यह कार्रवाई अभी भी जारी है।
उद्योग बदला तो भी देनी होगी रिपोर्ट
जिले की 55 फैक्टरियों क खिलाफ जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई की थी तो सामने आया कि काफी फैक्टरियों में उद्यमियों ने अपना काम बदल दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जिन फैक्टरियों में ओसीईएम नहीं लगाया गया है उनका सर्वे रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उनमें देखा जा रहा है कि काम बदला गया है या नहीं। यदि उद्यम बदला भी है तो उसकी रिपोर्ट देकर उद्यमी ने श्रेणी क्यों नहीं बदलवाई।