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Ghaziabad News: सेवा और न्याय के क्षेत्र में सिमरन बन रहीं गरीबों का सहारा
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गाजियाबाद। समाज सेवा और न्याय को साथ लेकर चल रही हाईकोर्ट की अधिवक्ता सिमरन रंधावा जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी हैं। उनकी पहल से सैकड़ों लोगों को न केवल सहारा मिला, बल्कि उन्हें शिक्षा और न्याय भी मिल रहा है। सिमरन रंधावा पिछले सात वर्षों से समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर एक ऐसा अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक मदद और न्याय पहुंचाना है। सिमरन रंधावा ने अब तक 200 से अधिक बेसहारा लोगों को रेस्क्यू कर प्रशासन की मदद से आश्रमों में भिजवाया है। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी टीम ने 100 से अधिक बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया है और उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च भी वहन कर रही हैं। उनकी टीम में महक मारवा, आरती गौर, राजकुमारी सहित कई महिला अधिवक्ता और अन्य महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हैं, जो मिलकर गरीबों की हर संभव मदद कर रही हैं।
जरूरत पड़ने पर यह टीम तत्काल राहत पहुंचाने के लिए तैयार रहती है। उनकी टीम जरूरतमंदों के लिए निशुल्क कानूनी सलाह देती है और अदालतों में उनकी पैरवी भी करती है। खासतौर पर उन मामलों में जहां महिलाओं और बेटियों का शोषण होता है या उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जाता है, वहां टीम मजबूती से उनके साथ खड़ी होती है। स्वास्थ्य सेवाओं में भी अब तक 240 से अधिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर गरीबों को मुफ्त दवाएं वितरित की गई हैं।
इसके अलावा, महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। सिमरन रंधावा का कहना है कि उन्होंने कानून की पढ़ाई इसलिए की ताकि गरीबों को न्याय दिलाने में मदद कर सकें। उनका उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति गरीबी, भूख या इलाज के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित न रहे।
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उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर एक ऐसा अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक मदद और न्याय पहुंचाना है। सिमरन रंधावा ने अब तक 200 से अधिक बेसहारा लोगों को रेस्क्यू कर प्रशासन की मदद से आश्रमों में भिजवाया है। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी टीम ने 100 से अधिक बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया है और उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च भी वहन कर रही हैं। उनकी टीम में महक मारवा, आरती गौर, राजकुमारी सहित कई महिला अधिवक्ता और अन्य महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हैं, जो मिलकर गरीबों की हर संभव मदद कर रही हैं।
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जरूरत पड़ने पर यह टीम तत्काल राहत पहुंचाने के लिए तैयार रहती है। उनकी टीम जरूरतमंदों के लिए निशुल्क कानूनी सलाह देती है और अदालतों में उनकी पैरवी भी करती है। खासतौर पर उन मामलों में जहां महिलाओं और बेटियों का शोषण होता है या उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जाता है, वहां टीम मजबूती से उनके साथ खड़ी होती है। स्वास्थ्य सेवाओं में भी अब तक 240 से अधिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर गरीबों को मुफ्त दवाएं वितरित की गई हैं।
इसके अलावा, महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। सिमरन रंधावा का कहना है कि उन्होंने कानून की पढ़ाई इसलिए की ताकि गरीबों को न्याय दिलाने में मदद कर सकें। उनका उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति गरीबी, भूख या इलाज के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित न रहे।