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Ghaziabad News: स्वर्ण गंगा अपार्टमेंट की मैनेजमेंट समिति ने शुरू किया स्ट्रक्चर ऑडिट
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17. वसुंधरा सेक्टर छह स्थित स्वर्ण गंगा सोसायटी। संवाद
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वसुंधरा। सेक्टर-6 स्थित स्वर्ण गंगा अपार्टमेंट में बालकनी का छज्जा गिरने के बाद अब यहां की सुरक्षा को लेकर मैनेजमेंट समिति ने सुरक्षा के मद्देनजर इमारत का स्ट्रक्चर ऑडिट शुरू कर दिया है। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर इमारत की मेंटेनेंस का कार्य किया जाएगा।
दस दिन पूर्व अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल का छज्जा भरभराकर छठी मंजिल पर गिर गया था। छठी मंजिल पर छज्जा गिरते ही यह नीचे जमीन पर जा गिरा और गनीमत रही कि कोई नहीं था, ऐसे में बड़ा हादसा टल गया। छज्जा गिरने के बाद अब समिति की ओर से की जा रही ऑडिट में इमारत के अलग-अलग हिस्सों, विशेष रूप से बालकनी, छज्जों और बाहरी संरचना की स्थिति की जांच की जा रही है। किस फ्लैट में सीपेज अधिक है या वहां पर सबसे अधिक मेंटेनेंस की जरूरत है इसकी पूरी रिपोर्ट सर्वे के बाद बनाई जाएगी। अंदरूनी क्षति फ्लैट मालिक को अपने स्तर से मरम्मत करानी होगी। कॉमन एरिया के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी मैनेजमेंट की होगी। मरम्मत और रख-रखाव काे लेकर कमेटी की तरफ से गाइडलाइंस भी जारी की गई है। मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष विपुल अग्रवाल ने बताया कि सोसायटी 20 साल पुरानी है। ऐसे में ऑडिट के बाद बाहरी किसी भी तरह की समस्या होने पर हम उसकी जिम्मेदारी लेंगे, लेकिन फ्लैट के अंदर की जिम्मेदारी मालिक की होगी। सभी फ्लैट मालिकों के लिए जरूरी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि वह भी अपनी जिम्मेदारी समझें।
वर्ष 2006 में मिला था पजेशन
सहकारी समिति ने आवास विकास की जमीन पर बने स्वर्ण गंगा अपार्टमेंट में कुल 119 फ्लैट हैं और साल 2006 में कब्जा दिया गया था। इनमें टू बीएचके के 70 और थ्री बीएचके के 49 फ्लैट हैं। अपार्टमेंट निवासी देव सैंगर का कहना है कि इमारत मजबूत है और कहीं कोई दिक्कत नहीं, लेकिन कुछ लोगों की लापरवाही से परेशानी हो रही है। फ्लैट मालिकों से कहा गया है कि किचन, बाथरूम और बालकनी सहित जो भी सीपेज है उसे बंद करवाएं। जो ऐसा नहीं करेंगे उनको नोटिस जारी किया जाएगा।
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दस दिन पूर्व अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल का छज्जा भरभराकर छठी मंजिल पर गिर गया था। छठी मंजिल पर छज्जा गिरते ही यह नीचे जमीन पर जा गिरा और गनीमत रही कि कोई नहीं था, ऐसे में बड़ा हादसा टल गया। छज्जा गिरने के बाद अब समिति की ओर से की जा रही ऑडिट में इमारत के अलग-अलग हिस्सों, विशेष रूप से बालकनी, छज्जों और बाहरी संरचना की स्थिति की जांच की जा रही है। किस फ्लैट में सीपेज अधिक है या वहां पर सबसे अधिक मेंटेनेंस की जरूरत है इसकी पूरी रिपोर्ट सर्वे के बाद बनाई जाएगी। अंदरूनी क्षति फ्लैट मालिक को अपने स्तर से मरम्मत करानी होगी। कॉमन एरिया के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी मैनेजमेंट की होगी। मरम्मत और रख-रखाव काे लेकर कमेटी की तरफ से गाइडलाइंस भी जारी की गई है। मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष विपुल अग्रवाल ने बताया कि सोसायटी 20 साल पुरानी है। ऐसे में ऑडिट के बाद बाहरी किसी भी तरह की समस्या होने पर हम उसकी जिम्मेदारी लेंगे, लेकिन फ्लैट के अंदर की जिम्मेदारी मालिक की होगी। सभी फ्लैट मालिकों के लिए जरूरी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि वह भी अपनी जिम्मेदारी समझें।
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वर्ष 2006 में मिला था पजेशन
सहकारी समिति ने आवास विकास की जमीन पर बने स्वर्ण गंगा अपार्टमेंट में कुल 119 फ्लैट हैं और साल 2006 में कब्जा दिया गया था। इनमें टू बीएचके के 70 और थ्री बीएचके के 49 फ्लैट हैं। अपार्टमेंट निवासी देव सैंगर का कहना है कि इमारत मजबूत है और कहीं कोई दिक्कत नहीं, लेकिन कुछ लोगों की लापरवाही से परेशानी हो रही है। फ्लैट मालिकों से कहा गया है कि किचन, बाथरूम और बालकनी सहित जो भी सीपेज है उसे बंद करवाएं। जो ऐसा नहीं करेंगे उनको नोटिस जारी किया जाएगा।
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