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Ghaziabad News: पालीवाल परिवार बोला साजिशन लगाई गई आग, हो निष्पक्ष जांच
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निशा ठाकुर
इंदिरापुरम। गौर ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में 29 अप्रैल को नौंवी मंजिल के जिस फ्लैट से आग शुरू हुई, वह मितेश पालीवाल का है। सोसायटी के लोग आग लगने का जिम्मेदार मितेश के फ्लैट में हो रहे लकड़ी के काम को बता रहे थे। अब मितेश ने इस आग को साजिश बताया है। उनका आरोप है कि आग उनके फ्लैट में लगी, इसकी जानकारी होते हुए भी आरडब्ल्यूए ने उन्हें कोई सूचना नहीं दी। समय से अगर सूचना दी गई होती तो उनका घर तो जलता, लेकिन दूसरों का बच सकता था।
सोसायटी में शनिवार को अधिकारियों के साथ बैठक के बीच भी बहुत से लोगों ने आग लगने का जिम्मेदार पालीवाल परिवार को बताया। वहीं मितेश पालीवाल का कहना है कि पिछले एक माह से उनके फ्लैट में कोई काम नहीं चल रहा था। घटना के दौरान अंदर कोई मजदूर नहीं था और सारे स्विच बंद थे। ऐसे में आग कैसे लगी इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मितेश ने बताया कि वह सोसायटी के ही बी टावर में किराये पर रहते हैं। उनके पास जैसे-जैसे पैसा आया, वह फ्लैट में काम कराते गए। करीब पांच वर्ष से काम चल रहा था जो अब पूरा हो चुका है। काम पूरा होने के बाद अब वह लोग सही मुहूर्त पर फ्लैट में शिफ्ट होने ही वाले थे कि आग ने सब बर्बाद कर दिया।
मितेश का कहना है कि अगर आग लगते ही उन्हें सूचना मिल जाती तो वहां पहुंचकर दरवाजा खोल देते और शायद आग को बुझा पाना आसान हो जाता। मितेश व उनके पिता ने इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है और आग लगने के जो जिम्मेदार हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पालीवाल परिवार ने आग बुझाने के दौरान आड़े आ रही पार्क की दीवार को नहीं तोड़े जाने पर भी आपत्ति जताई।
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आरडब्ल्यूए और बिल्डर के खिलाफ कोर्ट जाएंगे आर्किटेक्ट रजनीश राघव
- फ्लैट में 80 वर्षीय वृद्ध मां फंसी थी करीब आधे घंटे
माई सिटी रिपोर्टर
इंदिरापुरम। हादसे में अपने सपनों का घर खो जाने और आरडब्ल्यूए की लापरवाही से आहत आर्किटेक्ट रजनीश राघव ने मामले में आरडब्ल्यूए और बिल्डर के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि एक मोटी रकम रखरखाव के नाम पर प्रत्येक फ्लैट से दी जाती है, लेकिन व्यवस्था के नाम पर सब कुछ शून्य है।
आर्किटेक्ट रजनीश राघव ने बताया कि हादसे वाले दिन वह लखनऊ थे। घर पर उनकी 80 वर्षीय मां जो व्हील चेयर पर हैं, बच्चे व पत्नी थीं। पत्नी बच्चों को स्कूल छोड़कर सोसायटी में वापस लौटीं, तब उन्हें मालूम हुआ कि फ्लैट में आग लग गई है। अपनी जान पर खेल कर उन्होंने मां को बचाया।
रजनीश का आरोप है कि जब आग लगी तो आरडब्ल्यूए की ओर से उन्हें तत्काल कोई सूचना नहीं दी गई। बुजुर्ग मां घर में अकेली थीं, कुछ भी हो सकता था। उन्होंने बताया कि जब आरडब्ल्यूए से पार्क और स्विमिंग पूल एरिया के बारे में पूछा तो उनका जवाब है कि बिल्डर ने अभी इसका पजेशन उन्हें नहीं दिया है। आर्किटेक्ट का कहना है कि अवैध निर्माण जिसने भी कराया है या जो कोई भी इसका जिम्मेदार है, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
रजनीश ने कहा कि इस मामले में कोई और पीड़ित परिवार उनके साथ हो न हो, वह चुप बैठने वाले नहीं हैं। देश के सर्वोच्च न्यायालय तक यह बात पहुंचा कर रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनका परिवार सड़क पर आ गया है। आरडब्ल्यूए की लापरवाही से पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहा है। इन सबसे उबरने के बाद वह इस मामले को कोर्ट तक पहुंचाएंगे। हालांकि, उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा दी है।
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सोसायटी में शनिवार को अधिकारियों के साथ बैठक के बीच भी बहुत से लोगों ने आग लगने का जिम्मेदार पालीवाल परिवार को बताया। वहीं मितेश पालीवाल का कहना है कि पिछले एक माह से उनके फ्लैट में कोई काम नहीं चल रहा था। घटना के दौरान अंदर कोई मजदूर नहीं था और सारे स्विच बंद थे। ऐसे में आग कैसे लगी इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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मितेश ने बताया कि वह सोसायटी के ही बी टावर में किराये पर रहते हैं। उनके पास जैसे-जैसे पैसा आया, वह फ्लैट में काम कराते गए। करीब पांच वर्ष से काम चल रहा था जो अब पूरा हो चुका है। काम पूरा होने के बाद अब वह लोग सही मुहूर्त पर फ्लैट में शिफ्ट होने ही वाले थे कि आग ने सब बर्बाद कर दिया।
मितेश का कहना है कि अगर आग लगते ही उन्हें सूचना मिल जाती तो वहां पहुंचकर दरवाजा खोल देते और शायद आग को बुझा पाना आसान हो जाता। मितेश व उनके पिता ने इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है और आग लगने के जो जिम्मेदार हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पालीवाल परिवार ने आग बुझाने के दौरान आड़े आ रही पार्क की दीवार को नहीं तोड़े जाने पर भी आपत्ति जताई।
आरडब्ल्यूए और बिल्डर के खिलाफ कोर्ट जाएंगे आर्किटेक्ट रजनीश राघव
- फ्लैट में 80 वर्षीय वृद्ध मां फंसी थी करीब आधे घंटे
माई सिटी रिपोर्टर
इंदिरापुरम। हादसे में अपने सपनों का घर खो जाने और आरडब्ल्यूए की लापरवाही से आहत आर्किटेक्ट रजनीश राघव ने मामले में आरडब्ल्यूए और बिल्डर के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि एक मोटी रकम रखरखाव के नाम पर प्रत्येक फ्लैट से दी जाती है, लेकिन व्यवस्था के नाम पर सब कुछ शून्य है।
आर्किटेक्ट रजनीश राघव ने बताया कि हादसे वाले दिन वह लखनऊ थे। घर पर उनकी 80 वर्षीय मां जो व्हील चेयर पर हैं, बच्चे व पत्नी थीं। पत्नी बच्चों को स्कूल छोड़कर सोसायटी में वापस लौटीं, तब उन्हें मालूम हुआ कि फ्लैट में आग लग गई है। अपनी जान पर खेल कर उन्होंने मां को बचाया।
रजनीश का आरोप है कि जब आग लगी तो आरडब्ल्यूए की ओर से उन्हें तत्काल कोई सूचना नहीं दी गई। बुजुर्ग मां घर में अकेली थीं, कुछ भी हो सकता था। उन्होंने बताया कि जब आरडब्ल्यूए से पार्क और स्विमिंग पूल एरिया के बारे में पूछा तो उनका जवाब है कि बिल्डर ने अभी इसका पजेशन उन्हें नहीं दिया है। आर्किटेक्ट का कहना है कि अवैध निर्माण जिसने भी कराया है या जो कोई भी इसका जिम्मेदार है, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
रजनीश ने कहा कि इस मामले में कोई और पीड़ित परिवार उनके साथ हो न हो, वह चुप बैठने वाले नहीं हैं। देश के सर्वोच्च न्यायालय तक यह बात पहुंचा कर रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनका परिवार सड़क पर आ गया है। आरडब्ल्यूए की लापरवाही से पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहा है। इन सबसे उबरने के बाद वह इस मामले को कोर्ट तक पहुंचाएंगे। हालांकि, उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा दी है।