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Ghaziabad News: बच्ची के चीखने पर विनय ने किया था लोहे के पाइप से वार, बेहोश होने पर लिफ्ट शाफ्ट में फेंका
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गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित निर्माणाधीन मॉल में सात वर्षीय बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या करने के आरोपियों ने उस रात बेरहमी की हदें पार कर दीं। पुलिस जांच में सामने आया है कि बच्ची के चीखने पर गेट पर खड़े विनय ने पास में रखा लोहे का पाइप उठाकर उसके सिर पर जोरदार वार कर दिया।
सिर फटते ही उसने दूसरे आरोपी शहाबुद्दीन के साथ मिलकर अचेत बच्ची को लिफ्ट के खाली शाफ्ट (लिफ्ट लगाने के लिए छोड़ा गया स्थान) से बेसमेंट में फेंक दिया, ताकि किसी को लंबे समय तक घटना की भनक न लगे। डीसीपी के अनुसार आरोपियों को मालूम था कि शाफ्ट के नीचे बेसमेंट के तीसरे तल पर पानी भरा है। उन्हें उम्मीद थी कि शव पानी में डूब जाएगा और घटना का पता देर से चलेगा।
डीसीपी धवल जायसवाल ने बताया कि वारदात के बाद विनय अपनी झुग्गी में पहुंचा और भागने की नीयत से आधार कार्ड व कुछ रुपये जेब में रख लिए। इसी दौरान बच्ची के परिजनों ने उसे पकड़ लिया।
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पुलिस के सामने उसने अपना आधार कार्ड सौंपा, जिसमें जन्म का वर्ष 2008 दर्ज था। इसी आधार पर पुलिस ने उसे नाबालिग मानते हुए मेडिकल परीक्षण कराया, लेकिन जांच में वह बालिग निकला। पुलिस के अनुसार, विनय सातवीं फेल है। मेडिकल रिपोर्ट में आरोपियों के नशे में होने की पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस ने बच्ची और दोनों आरोपियों के खून से सने कपड़े, घटनास्थल से बरामद लोहे का पाइप, बच्ची की चप्पल, टूटे बाल समेत अन्य साक्ष्य फॉरेंसिक लैब भेज दिए हैं। दोनों आरोपियों का डीएनए सैंपल भी जांच के लिए लिया गया है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाएगी अपील
डीसीपी ने बताया कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने के लिए अपील की जाएगी। पुलिस ने घटना से जुड़े लगभग सभी अहम साक्ष्य जुटा लिए हैं। इनमें सीसीटीवी फुटेज, दुकानदारों व स्थानीय लोगों के बयान, खून से सने कपड़े, लोहे का पाइप, बच्ची की चप्पल और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्य शामिल हैं। पुलिस एक सप्ताह के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है।
सुरक्षाकर्मी ने बनाया वीडियो, सोशल मीडिया पर वायरल
वारदात के बाद दोनों आरोपी अपनी-अपनी झुग्गियों में लौट गए, लेकिन बच्ची की तलाश कर रहे परिजनों और स्थानीय लोगों ने उन्हें पकड़ लिया। दोनों को इलाके के लोग पहले से पहचानते थे और कई लोगों ने उन्हें बच्ची को पहले चिप्स व कोल्ड ड्रिंक दिलाकर अपने साथ ले जाते भी देखा था। हंगामे की सूचना पर पहुंचे एक सुरक्षाकर्मी ने मौके का वीडियो बना लिया, जिसमें दोनों आरोपी लोगों से घिरे दिखाई दे रहे हैं। बाद में उसने यह वीडियो अपनी कंपनी के ग्रुप और परिचितों के बीच साझा कर दिया, जिसके बाद वीडियो तेजी से वायरल हो गया।
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सिर फटते ही उसने दूसरे आरोपी शहाबुद्दीन के साथ मिलकर अचेत बच्ची को लिफ्ट के खाली शाफ्ट (लिफ्ट लगाने के लिए छोड़ा गया स्थान) से बेसमेंट में फेंक दिया, ताकि किसी को लंबे समय तक घटना की भनक न लगे। डीसीपी के अनुसार आरोपियों को मालूम था कि शाफ्ट के नीचे बेसमेंट के तीसरे तल पर पानी भरा है। उन्हें उम्मीद थी कि शव पानी में डूब जाएगा और घटना का पता देर से चलेगा।
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डीसीपी धवल जायसवाल ने बताया कि वारदात के बाद विनय अपनी झुग्गी में पहुंचा और भागने की नीयत से आधार कार्ड व कुछ रुपये जेब में रख लिए। इसी दौरान बच्ची के परिजनों ने उसे पकड़ लिया।
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पुलिस के सामने उसने अपना आधार कार्ड सौंपा, जिसमें जन्म का वर्ष 2008 दर्ज था। इसी आधार पर पुलिस ने उसे नाबालिग मानते हुए मेडिकल परीक्षण कराया, लेकिन जांच में वह बालिग निकला। पुलिस के अनुसार, विनय सातवीं फेल है। मेडिकल रिपोर्ट में आरोपियों के नशे में होने की पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस ने बच्ची और दोनों आरोपियों के खून से सने कपड़े, घटनास्थल से बरामद लोहे का पाइप, बच्ची की चप्पल, टूटे बाल समेत अन्य साक्ष्य फॉरेंसिक लैब भेज दिए हैं। दोनों आरोपियों का डीएनए सैंपल भी जांच के लिए लिया गया है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाएगी अपील
डीसीपी ने बताया कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने के लिए अपील की जाएगी। पुलिस ने घटना से जुड़े लगभग सभी अहम साक्ष्य जुटा लिए हैं। इनमें सीसीटीवी फुटेज, दुकानदारों व स्थानीय लोगों के बयान, खून से सने कपड़े, लोहे का पाइप, बच्ची की चप्पल और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्य शामिल हैं। पुलिस एक सप्ताह के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है।
सुरक्षाकर्मी ने बनाया वीडियो, सोशल मीडिया पर वायरल
वारदात के बाद दोनों आरोपी अपनी-अपनी झुग्गियों में लौट गए, लेकिन बच्ची की तलाश कर रहे परिजनों और स्थानीय लोगों ने उन्हें पकड़ लिया। दोनों को इलाके के लोग पहले से पहचानते थे और कई लोगों ने उन्हें बच्ची को पहले चिप्स व कोल्ड ड्रिंक दिलाकर अपने साथ ले जाते भी देखा था। हंगामे की सूचना पर पहुंचे एक सुरक्षाकर्मी ने मौके का वीडियो बना लिया, जिसमें दोनों आरोपी लोगों से घिरे दिखाई दे रहे हैं। बाद में उसने यह वीडियो अपनी कंपनी के ग्रुप और परिचितों के बीच साझा कर दिया, जिसके बाद वीडियो तेजी से वायरल हो गया।