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Gurugram News: किसान-मजदूर कैंटीन बंद, किसानों की थाली हुई महंगी
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सोहना अनाज मंडी में मार्केट कमेटी विभाग ने बनवाई थी, अब नहीं मिल रहा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
सोहना। अनाज मंडी में किसानों और मजदूरों को सस्ते दर पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई अटल किसान-मजदूर कैंटीन पिछले करीब एक महीने से बंद पड़ी है। मार्केट कमेटी विभाग द्वारा निर्मित इस कैंटीन के बंद होने से मंडी में आने वाले किसानों और मजदूरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्तमान फसली सीजन के दौरान मंडी में किसानों की आवक बढ़ गई है। अपनी फसल बेचने के लिए किसान रात-रात भर मंडी में रुकते हैं। कैंटीन बंद होने के कारण उन्हें भोजन के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। मजदूरों का कहना है कि उनकी दिहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अब केवल भोजन पर ही खर्च हो रहा है।
मात्र 10 रुपये में मिलता था भरपेट भोजन
करीब तीन महीने पहले लाखों रुपये की लागत से इस कैंटीन का निर्माण किया गया था। कैंटीन में मात्र 10 रुपये में चार रोटी, सब्जी, दाल और चावल की थाली दी जाती थी। इसके संचालन की जिम्मेदारी एक स्वयं सहायता समूह को सौंपी गई थी। सस्ता भोजन मिलने से गरीब मजदूरों और दूर-दराज से आने वाले किसानों को बड़ी राहत थी, लेकिन अब उन्हें मजबूरन होटलों और ढाबों पर महंगे दामों पर खाना पड़ रहा है।
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खाने वालों की संख्या कम होने के कारण इसे करीब 15-20 दिन पहले बंद किया गया था। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही फसली सीजन पूरी तरह गति पकड़ेगा, कैंटीन को दोबारा सुचारू रूप से खोल दिया जाएगा ताकि किसी को असुविधा न हो। -प्रदीप शर्मा, अकाउंटेंट, मार्केट कमेटी
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोहना। अनाज मंडी में किसानों और मजदूरों को सस्ते दर पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई अटल किसान-मजदूर कैंटीन पिछले करीब एक महीने से बंद पड़ी है। मार्केट कमेटी विभाग द्वारा निर्मित इस कैंटीन के बंद होने से मंडी में आने वाले किसानों और मजदूरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्तमान फसली सीजन के दौरान मंडी में किसानों की आवक बढ़ गई है। अपनी फसल बेचने के लिए किसान रात-रात भर मंडी में रुकते हैं। कैंटीन बंद होने के कारण उन्हें भोजन के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। मजदूरों का कहना है कि उनकी दिहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अब केवल भोजन पर ही खर्च हो रहा है।
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मात्र 10 रुपये में मिलता था भरपेट भोजन
करीब तीन महीने पहले लाखों रुपये की लागत से इस कैंटीन का निर्माण किया गया था। कैंटीन में मात्र 10 रुपये में चार रोटी, सब्जी, दाल और चावल की थाली दी जाती थी। इसके संचालन की जिम्मेदारी एक स्वयं सहायता समूह को सौंपी गई थी। सस्ता भोजन मिलने से गरीब मजदूरों और दूर-दराज से आने वाले किसानों को बड़ी राहत थी, लेकिन अब उन्हें मजबूरन होटलों और ढाबों पर महंगे दामों पर खाना पड़ रहा है।
खाने वालों की संख्या कम होने के कारण इसे करीब 15-20 दिन पहले बंद किया गया था। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही फसली सीजन पूरी तरह गति पकड़ेगा, कैंटीन को दोबारा सुचारू रूप से खोल दिया जाएगा ताकि किसी को असुविधा न हो। -प्रदीप शर्मा, अकाउंटेंट, मार्केट कमेटी