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Gurugram News: मध्यस्थता पूर्व राशि जमा करने की शर्त को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
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- ताऊ देवीलाल स्टेडियम निर्माण विवाद में वाणिज्यिक अदालत का फैसला
अदालत से
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। विशेष वाणिज्यिक अदालत ने मध्यस्थता से पहले 7.5 प्रतिशत राशि जमा करने की शर्त को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता की कार्यवाही जारी रखने के लिए अनुबंध में तय शर्तों का पालन करना आवश्यक है। यह आदेश विशेष वाणिज्यिक न्यायालय के सहायक न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष सुनील चौहान ने दिया।
मामला गुरुनानक इंजीनियरिंग सर्विसेज और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के बीच ताऊ देवीलाल स्टेडियम के निर्माण कार्य से जुड़ा है। निर्माण कार्य में देरी के कारण कंपनी का करीब 14 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित रहा। विवाद मध्यस्थता में पहुंचने पर कंपनी को दावे की 7.5 प्रतिशत राशि, लगभग 74 लाख रुपये, एक माह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया गया। कंपनी ने इस शर्त को अदालत में चुनौती दी।
एचएसवीपी ने दलील दी कि अनुबंध के अनुसार यदि ठेकेदार विवाद को मध्यस्थता में ले जाता है तो उसे पहले 7.5 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी। प्राधिकरण ने अपने पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के एस.के. जैन बनाम हरियाणा राज्य मामले का भी हवाला दिया।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि मध्यस्थ ने कार्यवाही समाप्त नहीं की थी, बल्कि राशि जमा करने के लिए एक माह का समय दिया था। यदि तय अवधि में राशि जमा नहीं होती तो कार्यवाही स्वतः समाप्त हो जाती। अदालत ने इसे मध्यस्थता जारी रखने की वैध अनुबंधीय शर्त मानते हुए याचिका खारिज कर दी।
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अदालत से
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। विशेष वाणिज्यिक अदालत ने मध्यस्थता से पहले 7.5 प्रतिशत राशि जमा करने की शर्त को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता की कार्यवाही जारी रखने के लिए अनुबंध में तय शर्तों का पालन करना आवश्यक है। यह आदेश विशेष वाणिज्यिक न्यायालय के सहायक न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष सुनील चौहान ने दिया।
मामला गुरुनानक इंजीनियरिंग सर्विसेज और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के बीच ताऊ देवीलाल स्टेडियम के निर्माण कार्य से जुड़ा है। निर्माण कार्य में देरी के कारण कंपनी का करीब 14 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित रहा। विवाद मध्यस्थता में पहुंचने पर कंपनी को दावे की 7.5 प्रतिशत राशि, लगभग 74 लाख रुपये, एक माह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया गया। कंपनी ने इस शर्त को अदालत में चुनौती दी।
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एचएसवीपी ने दलील दी कि अनुबंध के अनुसार यदि ठेकेदार विवाद को मध्यस्थता में ले जाता है तो उसे पहले 7.5 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी। प्राधिकरण ने अपने पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के एस.के. जैन बनाम हरियाणा राज्य मामले का भी हवाला दिया।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि मध्यस्थ ने कार्यवाही समाप्त नहीं की थी, बल्कि राशि जमा करने के लिए एक माह का समय दिया था। यदि तय अवधि में राशि जमा नहीं होती तो कार्यवाही स्वतः समाप्त हो जाती। अदालत ने इसे मध्यस्थता जारी रखने की वैध अनुबंधीय शर्त मानते हुए याचिका खारिज कर दी।