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खाने से गायब हुआ स्वाद: मसालों के दाम छू रहे आसमान, लाल मिर्च ₹300 तो धनिया 200 KG; पाव भर से काम चला रहे लोग

Sat, 11 Jul 2026 06:15 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम Published by: विकास कुमार Updated Sat, 11 Jul 2026 06:15 PM IST
सार

बाजार के जानकारों और व्यापारियों की मानें तो इस महंगाई के पीछे का सबसे बड़ा कारण मंडियों से माल की कम आवक (सप्लाई) होना है। पीछे से स्टॉक कम आने की वजह से थोक बाजारों में कीमतें बढ़ीं, जिसका सीधा असर अब आम उपभोक्ताओं की थाली पर पड़ रहा है। 

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rise in edible oil and spices prices disrupting kitchen budgets of families
मसाले हुए महंगे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

किचन से आने वाली मसालों की वह भीनी-भीनी खुशबू अब आम आदमी की जेब को महका नहीं, बल्कि झुलसा रही है। मसालों और खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों की रसोई का पूरा गणित बिगाड़ कर रख दिया है। आलम यह है कि जो गृहणियां पहले महीने की शुरुआत में ही डिब्बे भर-भर कर राशन और मसाले ले आती थीं, वे अब सिर्फ 'ज़रूरत भर' का सामान खरीदकर काम चलाने को मजबूर हैं। थोक और रिटेल मंडियों में आई इस मंदी और महंगाई का असर अब छोटी किराना दुकानों से लेकर बड़े बाजारों की रौनक पर साफ देखा जा सकता है।

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क्यों लगी है कीमतों में आग?
बाजार के जानकारों और व्यापारियों की मानें तो इस महंगाई के पीछे का सबसे बड़ा कारण मंडियों से माल की कम आवक (सप्लाई) होना है। पीछे से स्टॉक कम आने की वजह से थोक बाजारों में कीमतें बढ़ीं, जिसका सीधा असर अब आम उपभोक्ताओं की थाली पर पड़ रहा है। आपूर्ति में आई इस कमी ने सरसों के तेल से लेकर रोजमर्रा के पिसे मसालों तक की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है।

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दामों का गणित: पहले और अब की स्थिति
अगर बाजार के मौजूदा रेट कार्ड पर नजर डालें, तो कीमतों में भारी उछाल देखने को मिलता है। नीचे दी गई तालिका से समझिए कि आपकी रसोई पर कितना बोझ बढ़ा है।
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सामग्री पहले का भाव (रुपये/किलो) अब का भाव (रुपये/किलो) सीधा अंतर (रुपये)
सरसों तेल ₹170 ₹190 + ₹20
पाउडर मिर्ची ₹240 ₹280 + ₹40
धनिया पिसी ₹160 ₹200 + ₹40
साबूत लाल मिर्ची ₹280 ₹320 + ₹40

 

एक किलो की जगह 'आधा पाव' पर आए लोग
महंगाई की इस मार ने ग्राहकों के व्यवहार को पूरी तरह बदल दिया है। व्यापारियों का कहना है कि जो ग्राहक पहले बेफिक्र होकर एक किलो या उससे अधिक मसाले एक बार में तौलवाते थे, वे अब आधा किलो, पाव या सिर्फ हफ्ते भर की जरूरत के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं। राशन की लिस्ट अब छोटी हो गई है और बजट को लेकर हर घर में माथापच्ची चल रही है।

क्या कहते हैं बाजार के दुकानदार?
मंडियों से माल बेहद कम मात्रा में आ रहा है, जिसके कारण कई मुख्य मसालों के दाम अचानक बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ा है। अब लोग पहले की तुलना में बहुत ही नाप-तोल कर और कम मात्रा में मसाले खरीद रहे हैं, जिससे हमारा टर्नओवर भी प्रभावित हुआ है। -शिवम कुमार, दुकानदार (सदर बाजार)

मसालों और सरसों तेल का रेट बढ़ने से ग्राहकों की खरीदारी का तरीका पूरी तरह बदल गया है। खासकर छोटे और मध्यमवर्गीय परिवार अब फालतू खर्च से बच रहे हैं और सिर्फ उतना ही सामान ले रहे हैं, जिसके बिना काम रुक जाए। बाजार में पहले जैसी रौनक गायब है। -कालू, दुकानदार (सदर बाजार)

कुल मिलाकर, रसोई का स्वाद बरकरार रखने के लिए अब लोगों को अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है। जब तक मंडियों से आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक आम आदमी को इस तीखी महंगाई के तड़के को झेलना ही पड़ेगा।

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