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Gurugram News: पंजाब सीएम के कथित वीडियो मामले में तीसरे आरोपी को मिली जमानत
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इससे पहले अंकित और अर्जुन उर्फ अरुण को भी मिल चुकी है जमानत
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। पंजाब सीएम के कथित वीडियो मामले में गुरुग्राम पुलिस की ओर से गिरफ्तार किए गए तीसरे आरोपी पंकज यादव को भी जमानत मिल गई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुदीप गोयल की अदालत ने पंकज यादव की जमानत याचिका मंजूर कर दी। पंकज यादव पर संगठित अपराध और फर्जी रिपोर्ट तैयार करने के आरोप पुलिस ने लगाए हैं। अदालत ने पंकज को एक लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दी है। उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करने और जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया है।
गुरुग्राम पुलिस की एसआईटी ने केस में संगठित अपराध की धारा बीएनएस 111 जोड़ी थी। मामले में आरोपी पंकज की जमानत याचिका के दौरान आरोपी के अधिवक्ता की ओर से इस पर आपत्ति जताते हुए दलील दी गई। सभी पक्षों को सुनकर अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी ने जांच के दौरान इकट्ठा किए गए कोई भी दस्तावेज पेश नहीं किए हैं। ऐसे में बीएनएस के तहत संगठित अपराध की धारा 111 लागू नहीं की जा सकती क्योंकि फाइल में कोई एफएसएल रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। इससे पहले आरोपी अंकित और अर्जुन उर्फ अरुण को भी अदालत जमानत दे चुकी है।
मामले में पुलिस को शिकायत जसप्रीत सिंह नामक व्यक्ति ने दी थी। शिकायत में कहा गया था कि जसप्रीत को गुरुग्राम बुलाया गया और पंजाब के मुख्यमंत्री से संबंधित वीडियो पर फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार कर देने के लिए दबाव डाला गया। जसप्रीत ने आरोप लगाया कि एक पूर्व-नियोजित साजिश के तहत फर्जी रिपोर्ट तैयार करने का प्रयास किया गया। इस मामले में अंकित और अरुण को 23 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान उनके बयानों के आधार पर देहरादून और दिल्ली से मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य उपकरण बरामद किए गए। बाद में 29 जून 2026 को पंकज यादव नामक एक और आरोपी को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी ने बताया कि सिफर सेंटिनल नामक एक लैब का भौतिक अस्तित्व नहीं था, केवल एक औपचारिक नाम पंजीकृत था।
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पंकज यादव के अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि उसे केस में झूठा फंसाया गया है। पुलिस ने बिना किसी आधार के धारा 111 बीएनएस लगाई है। उन्होंने कहा कि संगठित अपराध में उसकी संलिप्तता का कोई सबूत नहीं है। जांच एजेंसी ने अभी तक कोई फॉरेंसिक लैब रिपोर्ट पेश नहीं की है, जिससे आरोप साबित हो सकें।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। पंजाब सीएम के कथित वीडियो मामले में गुरुग्राम पुलिस की ओर से गिरफ्तार किए गए तीसरे आरोपी पंकज यादव को भी जमानत मिल गई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुदीप गोयल की अदालत ने पंकज यादव की जमानत याचिका मंजूर कर दी। पंकज यादव पर संगठित अपराध और फर्जी रिपोर्ट तैयार करने के आरोप पुलिस ने लगाए हैं। अदालत ने पंकज को एक लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दी है। उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करने और जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया है।
गुरुग्राम पुलिस की एसआईटी ने केस में संगठित अपराध की धारा बीएनएस 111 जोड़ी थी। मामले में आरोपी पंकज की जमानत याचिका के दौरान आरोपी के अधिवक्ता की ओर से इस पर आपत्ति जताते हुए दलील दी गई। सभी पक्षों को सुनकर अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी ने जांच के दौरान इकट्ठा किए गए कोई भी दस्तावेज पेश नहीं किए हैं। ऐसे में बीएनएस के तहत संगठित अपराध की धारा 111 लागू नहीं की जा सकती क्योंकि फाइल में कोई एफएसएल रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। इससे पहले आरोपी अंकित और अर्जुन उर्फ अरुण को भी अदालत जमानत दे चुकी है।
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मामले में पुलिस को शिकायत जसप्रीत सिंह नामक व्यक्ति ने दी थी। शिकायत में कहा गया था कि जसप्रीत को गुरुग्राम बुलाया गया और पंजाब के मुख्यमंत्री से संबंधित वीडियो पर फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार कर देने के लिए दबाव डाला गया। जसप्रीत ने आरोप लगाया कि एक पूर्व-नियोजित साजिश के तहत फर्जी रिपोर्ट तैयार करने का प्रयास किया गया। इस मामले में अंकित और अरुण को 23 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान उनके बयानों के आधार पर देहरादून और दिल्ली से मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य उपकरण बरामद किए गए। बाद में 29 जून 2026 को पंकज यादव नामक एक और आरोपी को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी ने बताया कि सिफर सेंटिनल नामक एक लैब का भौतिक अस्तित्व नहीं था, केवल एक औपचारिक नाम पंजीकृत था।
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पंकज यादव के अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि उसे केस में झूठा फंसाया गया है। पुलिस ने बिना किसी आधार के धारा 111 बीएनएस लगाई है। उन्होंने कहा कि संगठित अपराध में उसकी संलिप्तता का कोई सबूत नहीं है। जांच एजेंसी ने अभी तक कोई फॉरेंसिक लैब रिपोर्ट पेश नहीं की है, जिससे आरोप साबित हो सकें।