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Gurugram News: टावर ऑफ जस्टिस तैयार...लगेंगी 56 कोर्ट
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नई इमारत में बैंक, डाकघर, जिला बार पुस्तकालय, कैंटीन, जिला अटॉर्नी कार्यालय, लिफ्ट व एस्केलेटर की व्यवस्था
नंबर गेम - 400 वाहनों के लिए पार्किंग की होगी सुविधा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। कोर्ट रोड पर करीब सात एकड़ जमीन पर बनाए गए नए जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर (टावर ऑफ जस्टिस) में 56 कोर्ट लगेंगी। जबकि पुराने परिसर में सिर्फ 21 कोर्ट लगने की व्यवस्था ही थी। 12 जुलाई से शुरू होने वाले टावर ऑफ जस्टिस में एक ही छत के नीचे विभिन्न मामलों की कोर्ट में सुनवाई होने से वकीलों को भी सुविधा मिलेगी। टावर ऑॅफ जस्टिस में 400 वाहनों के पार्क करने की सुविधा होगी।
पुरानी इमारत काफी जर्जर हो चुकी थी। पिछले करीब पांच साल से पुरानी इमारत में फायर एनओसी संबंधी मानक भी पूरे नहीं हो पा रहे थे। 24 मई को पुरानी कोर्ट इमारत में बने रिकॉर्ड रूम में आग लगने से छत का हिस्सा भी गिर गया था।
इसके बाद पुरानी इमारत को बंद कर दिया गया था।
नई इमारत में मिलेंगी सुविधाएं
करीब सात एकड़ जमीन पर बने टावर ऑफ जस्टिस को सात मंजिला बनाया गया है। इसमें 56 कोर्ट लगाने की व्यवस्था की गई है। इसमें पहली मंजिल पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट लगेगी। दूसरी से छठी मंजिल तक 10-10 कोर्ट लगाई जाएंगी। इमारत की सातवीं मंजिल पर पांच काेर्ट लगेंगी। वहीं, इमारत के ऊपर जजों व वकीलों के लिए पुस्तकालय व कैंटीन बनेगी। परिसर में बैंक, डाकघर, जिला बार पुस्तकालय, कैंटीन, जिला अटॉर्नी कार्यालय और मध्यस्थता कक्ष जैसी सुविधाएं भी होंगी। जांच अधिकारियों, कैदियों और डॉक्टरों के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से लेने के लिए अलग कमरे उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा नई इमारत को दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाया जा रहा है।
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पुरानी इमारत में व्यवस्था से चल रहा था काम
वकीलों से मिली जानकारी के अनुसार पुरानी इमारत में शुरूआत में सिर्फ 10 कोर्ट लगाने की व्यवस्था थी। बाद में रीडर रूम व कैंटीन के लिए बनाए गए कमरों को कोर्ट रूम में बदलकर अदालतें लगाने की व्यवस्था करके काम चलाया जा रहा था। पुरानी इमारत में आग लगने की घटना होने से यहां पर पहले 21 कोर्ट लगती थी व 21 अल्हमद रूम थे। यहां पर सिविल काेर्ट व डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के लिए अलग-अलग दो रिकॉर्ड रूम भी बनाए गए थे। वकीलों के बैठने के लिए तीन हॉल मौजूद हैं, जिसमें करीब 1500 वकील अपने क्लाइंटों के लिए काम करते हैं। इसके अलावा हॉल में नक्शा नवीस, टाइपिस्ट, स्टैंप वेंडर सहित अन्य लोगों के बैठने की व्यवस्था है। इसके अलावा लेबर कोर्ट में करीब 12 कोर्ट लगाई जाती हैं। विकास सदन में बने कमरों में छह कोर्ट बनाई गई थी और उसके ऊपर बनाए गए पोर्टा केबिन में करीब 14 कोर्ट लगती हैं। पुरानी इमारत में बैंक और डाकखाने के लिए भी कमरा उपलब्ध था।
नई इमारत में वकीलों के बैठने की व्यवस्था नहीं
टावर ऑफ जस्टिस की नई इमारत में वकीलों के बैठने के लिए व्यवस्था नहीं की है। ऐसे में काफी संख्या में वकील नई इमारत के पास चेंबर की मांग कर रहे हैं। वकीलों को कहना है कि उनके पुराने चेबरों से नई इमारत काफी दूर पड़ती है, ऐसे में केस की पैरवी के लिए आने-जाने में उनको परेशानी होगी। वकीलों का कहना है कि केस की पैरवी के दौरान किसी जरूरी दस्तावेज की जरूरत पड़ती है तो चेंबर से नई इमारत में संचालित कोर्ट तक जाने-आने में ही काफी समय लगेगा। इससे कोर्ट को समय बर्बाद होने के साथ ही वकील व उसके क्लाइंट को काफी परेशानी होगी। वहीं, नई इमारत में नक्शा नवीस, टाइपिस्ट, स्टैंप वेंडर के नहीं बैठने के कारण अदालत संबंधी कार्य भी प्रभावित होंगे।
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टावर ऑफ जस्टिस के पास ही वकीलों के चेंबर के लिए जमीन अलॉट की जानी चाहिए, ताकि कोर्ट में केस की पैरवी के दौरान वकीलों को परेशानी न हो। पास में चेंबर होगा तो केस से संबंधी दस्तावेज जल्द ले जाकर सबूत व पक्ष रखा जा सकेगा। - संतोख सिंह, पूर्व अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन, गुरुग्राम।
नई इमारत वकीलों के चेंबर से दूर होने के कारण केस संबंधी पैरवी के लिए काफी समय बर्बाद होगा। वर्तमान में केस की पैरवी के समय का पता करके तुरंत कोर्ट में चले जाते थे। अब नई इमारत में कोर्ट के बाद ही केस शुरू होने का इंतजार करना पड़ेगा। इससे वकीलों को परेशानी होगी। -राव भगत सिंह, एडवोकेट
प्रदेश सरकार ने कोर्ट लगाने के लिए नई इमारत बनाकर अच्छा काम किया है, लेकिन वकीलों की परेशानियों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। सरकार को वकीलों के चेंबर के लिए नई इमारत के पास ही जमीन देनी चाहिए, ताकि वकील अपने चेंबर बनाकर बैठने की व्यवस्था कर सकें।
- विनोद कुमार भारद्वाज, एडवोकेट
नई इमारत के पास चेंबर बनाने से वकीलों को अपने क्लाइंट के केस की कोर्ट में पैरवी करने में सुविधा हाेगी। कोर्ट परिसर से चेंबर दूर होने के कारण सभी वकीलों को कोर्ट तक जाने में परेशानी होगी। ऐसे में प्रदेश सरकार को वकीलों की समस्या पर ध्यान देना हाेगा। - प्रवेश यादव, मैंबर, बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा
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नंबर गेम - 400 वाहनों के लिए पार्किंग की होगी सुविधा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। कोर्ट रोड पर करीब सात एकड़ जमीन पर बनाए गए नए जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर (टावर ऑफ जस्टिस) में 56 कोर्ट लगेंगी। जबकि पुराने परिसर में सिर्फ 21 कोर्ट लगने की व्यवस्था ही थी। 12 जुलाई से शुरू होने वाले टावर ऑफ जस्टिस में एक ही छत के नीचे विभिन्न मामलों की कोर्ट में सुनवाई होने से वकीलों को भी सुविधा मिलेगी। टावर ऑॅफ जस्टिस में 400 वाहनों के पार्क करने की सुविधा होगी।
पुरानी इमारत काफी जर्जर हो चुकी थी। पिछले करीब पांच साल से पुरानी इमारत में फायर एनओसी संबंधी मानक भी पूरे नहीं हो पा रहे थे। 24 मई को पुरानी कोर्ट इमारत में बने रिकॉर्ड रूम में आग लगने से छत का हिस्सा भी गिर गया था।
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इसके बाद पुरानी इमारत को बंद कर दिया गया था।
नई इमारत में मिलेंगी सुविधाएं
करीब सात एकड़ जमीन पर बने टावर ऑफ जस्टिस को सात मंजिला बनाया गया है। इसमें 56 कोर्ट लगाने की व्यवस्था की गई है। इसमें पहली मंजिल पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट लगेगी। दूसरी से छठी मंजिल तक 10-10 कोर्ट लगाई जाएंगी। इमारत की सातवीं मंजिल पर पांच काेर्ट लगेंगी। वहीं, इमारत के ऊपर जजों व वकीलों के लिए पुस्तकालय व कैंटीन बनेगी। परिसर में बैंक, डाकघर, जिला बार पुस्तकालय, कैंटीन, जिला अटॉर्नी कार्यालय और मध्यस्थता कक्ष जैसी सुविधाएं भी होंगी। जांच अधिकारियों, कैदियों और डॉक्टरों के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से लेने के लिए अलग कमरे उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा नई इमारत को दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाया जा रहा है।
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पुरानी इमारत में व्यवस्था से चल रहा था काम
वकीलों से मिली जानकारी के अनुसार पुरानी इमारत में शुरूआत में सिर्फ 10 कोर्ट लगाने की व्यवस्था थी। बाद में रीडर रूम व कैंटीन के लिए बनाए गए कमरों को कोर्ट रूम में बदलकर अदालतें लगाने की व्यवस्था करके काम चलाया जा रहा था। पुरानी इमारत में आग लगने की घटना होने से यहां पर पहले 21 कोर्ट लगती थी व 21 अल्हमद रूम थे। यहां पर सिविल काेर्ट व डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के लिए अलग-अलग दो रिकॉर्ड रूम भी बनाए गए थे। वकीलों के बैठने के लिए तीन हॉल मौजूद हैं, जिसमें करीब 1500 वकील अपने क्लाइंटों के लिए काम करते हैं। इसके अलावा हॉल में नक्शा नवीस, टाइपिस्ट, स्टैंप वेंडर सहित अन्य लोगों के बैठने की व्यवस्था है। इसके अलावा लेबर कोर्ट में करीब 12 कोर्ट लगाई जाती हैं। विकास सदन में बने कमरों में छह कोर्ट बनाई गई थी और उसके ऊपर बनाए गए पोर्टा केबिन में करीब 14 कोर्ट लगती हैं। पुरानी इमारत में बैंक और डाकखाने के लिए भी कमरा उपलब्ध था।
नई इमारत में वकीलों के बैठने की व्यवस्था नहीं
टावर ऑफ जस्टिस की नई इमारत में वकीलों के बैठने के लिए व्यवस्था नहीं की है। ऐसे में काफी संख्या में वकील नई इमारत के पास चेंबर की मांग कर रहे हैं। वकीलों को कहना है कि उनके पुराने चेबरों से नई इमारत काफी दूर पड़ती है, ऐसे में केस की पैरवी के लिए आने-जाने में उनको परेशानी होगी। वकीलों का कहना है कि केस की पैरवी के दौरान किसी जरूरी दस्तावेज की जरूरत पड़ती है तो चेंबर से नई इमारत में संचालित कोर्ट तक जाने-आने में ही काफी समय लगेगा। इससे कोर्ट को समय बर्बाद होने के साथ ही वकील व उसके क्लाइंट को काफी परेशानी होगी। वहीं, नई इमारत में नक्शा नवीस, टाइपिस्ट, स्टैंप वेंडर के नहीं बैठने के कारण अदालत संबंधी कार्य भी प्रभावित होंगे।
टावर ऑफ जस्टिस के पास ही वकीलों के चेंबर के लिए जमीन अलॉट की जानी चाहिए, ताकि कोर्ट में केस की पैरवी के दौरान वकीलों को परेशानी न हो। पास में चेंबर होगा तो केस से संबंधी दस्तावेज जल्द ले जाकर सबूत व पक्ष रखा जा सकेगा। - संतोख सिंह, पूर्व अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन, गुरुग्राम।
नई इमारत वकीलों के चेंबर से दूर होने के कारण केस संबंधी पैरवी के लिए काफी समय बर्बाद होगा। वर्तमान में केस की पैरवी के समय का पता करके तुरंत कोर्ट में चले जाते थे। अब नई इमारत में कोर्ट के बाद ही केस शुरू होने का इंतजार करना पड़ेगा। इससे वकीलों को परेशानी होगी। -राव भगत सिंह, एडवोकेट
प्रदेश सरकार ने कोर्ट लगाने के लिए नई इमारत बनाकर अच्छा काम किया है, लेकिन वकीलों की परेशानियों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। सरकार को वकीलों के चेंबर के लिए नई इमारत के पास ही जमीन देनी चाहिए, ताकि वकील अपने चेंबर बनाकर बैठने की व्यवस्था कर सकें।
- विनोद कुमार भारद्वाज, एडवोकेट
नई इमारत के पास चेंबर बनाने से वकीलों को अपने क्लाइंट के केस की कोर्ट में पैरवी करने में सुविधा हाेगी। कोर्ट परिसर से चेंबर दूर होने के कारण सभी वकीलों को कोर्ट तक जाने में परेशानी होगी। ऐसे में प्रदेश सरकार को वकीलों की समस्या पर ध्यान देना हाेगा। - प्रवेश यादव, मैंबर, बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा