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Gurugram News: अंडरपास हादसे में युवक की मौत, मां को मिलेगा पांच लाख मुआवजा
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- बीमा कंपनी की दलील खारिज, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने दिया भुगतान का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अंडरपास में कार अनियंत्रित होकर दीवार से टकराने से हुई युवक की मौत के मामले में उसकी मां को पांच लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के न्यायाधीश यशविंदर पाल सिंह ने बीमा कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया है।
सेक्टर-52 निवासी मिथिलेश ने दायर याचिका में बताया कि 10 फरवरी 2023 को उनका बेटा उमेश शर्मा दोस्त के साथ कार से जा रहा था। हुडा सिटी सेंटर के पास अंडरपास में कार अनियंत्रित होकर दीवार से टकरा गई। हादसे में उमेश गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बीमा कंपनी ने मुआवजे का विरोध करते हुए कहा कि मृतक खुद वाहन चला रहा था और उसकी वार्षिक आय 40 हजार रुपये से अधिक थी। कंपनी ने यह भी कहा कि याचिका गलत अधिनियम के तहत दायर की गई है।
न्यायाधिकरण ने कहा कि दुर्घटना के समय मोटर वाहन अधिनियम की संशोधित धारा 164 लागू थी। इसके तहत सड़क हादसे में मृत्यु होने पर पांच लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित है। इसमें चालक की गलती या आय सीमा का विचार नहीं किया जाता। न्यायाधिकरण ने यह भी पाया कि मालिक-चालक के लिए 914 रुपये का बीमा प्रीमियम जमा किया गया था, जो 15 लाख रुपये के बीमा कवर से संबंधित था। ऐसे में बीमा कंपनी मुआवजे की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अंडरपास में कार अनियंत्रित होकर दीवार से टकराने से हुई युवक की मौत के मामले में उसकी मां को पांच लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के न्यायाधीश यशविंदर पाल सिंह ने बीमा कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया है।
सेक्टर-52 निवासी मिथिलेश ने दायर याचिका में बताया कि 10 फरवरी 2023 को उनका बेटा उमेश शर्मा दोस्त के साथ कार से जा रहा था। हुडा सिटी सेंटर के पास अंडरपास में कार अनियंत्रित होकर दीवार से टकरा गई। हादसे में उमेश गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बीमा कंपनी ने मुआवजे का विरोध करते हुए कहा कि मृतक खुद वाहन चला रहा था और उसकी वार्षिक आय 40 हजार रुपये से अधिक थी। कंपनी ने यह भी कहा कि याचिका गलत अधिनियम के तहत दायर की गई है।
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न्यायाधिकरण ने कहा कि दुर्घटना के समय मोटर वाहन अधिनियम की संशोधित धारा 164 लागू थी। इसके तहत सड़क हादसे में मृत्यु होने पर पांच लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित है। इसमें चालक की गलती या आय सीमा का विचार नहीं किया जाता। न्यायाधिकरण ने यह भी पाया कि मालिक-चालक के लिए 914 रुपये का बीमा प्रीमियम जमा किया गया था, जो 15 लाख रुपये के बीमा कवर से संबंधित था। ऐसे में बीमा कंपनी मुआवजे की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
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