Health: ग्लास स्किन की चाह युवाओं को बना रही बीमार, सोशल मीडिया के चक्कर में बढ़ रहा 'कॉस्मेटिकोरिया' का खतरा
कम उम्र में जरूरत से ज्यादा और उम्र के हिसाब से गलत स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न सिर्फ त्वचा को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रहा है।
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सोशल मीडिया पर दिखने वाली ग्लास स्किन और बेदाग चेहरे की चाह अब युवाओं में एक नई समस्या बनती जा रही है। त्वचा विशेषज्ञ इस बढ़ते चलन को कॉस्मेटिकोरिया नाम दे रहे हैं।
हालांकि, इसे अभी तक आधिकारिक बीमारी का दर्जा नहीं मिला है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में जरूरत से ज्यादा और उम्र के हिसाब से गलत स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न सिर्फ त्वचा को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रहा है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डर्मेटोलॉजी विभाग के प्रो. व विभागाध्यक्ष डॉ. कबीर सरदाना बताते हैं कि हाल ही में 18 वर्षीय एक युवती मुंहासों के इलाज के लिए उनके पास पहुंची। पूछने पर उसने बताया कि वह टोनर, मॉइस्चराइजर, एंटी-एजिंग क्रीम, सनस्क्रीन और मैच्योर स्किन के लिए बने एक्सफोलिएटिंग एसिड स्क्रब सहित कई महंगे स्किनकेयर उत्पाद रोजाना इस्तेमाल कर रही थी।
डॉ. सरदाना ने उसके अधिकांश कॉस्मेटिक उत्पाद बंद कर केवल जरूरत के अनुसार मॉइस्चराइजर, कम डोज की ओरल रेटिनॉइड दवा, रात में लगाने वाला एंटीबायोटिक जेल और एक साधारण फेस वॉश इस्तेमाल करने की सलाह दी। सिर्फ एक महीने में उसकी त्वचा साफ हो गई।
सोशल मीडिया और ब्यूटी मार्केटिंग बढ़ा रहे ट्रेंड
डॉ. सरदाना का कहना है कि कई किशोर अपनी सबसे स्वस्थ और प्राकृतिक त्वचा को सिर्फ एंटी-एजिंग उत्पादों के इस्तेमाल से नुकसान पहुंचा रहे हैं। जबकि, वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं हुआ है कि कम उम्र में ऐसे उत्पादों की जरूरत होती है। उनके अनुसार ग्लास स्किन, कोरियन स्किन, रेटिनॉल क्रीम, विटामिन-सी सीरम और 10-स्टेप स्किनकेयर रूटीन जैसे ट्रेंड अब किशोरों और युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
बिना डॉक्टर की सलाह के बढ़ रहा खतरा
डर्मेटोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीरिता हजारिका कहती हैं कि भारतीयों में चेहरे की त्वचा का रंग थोड़ा असमान होना सामान्य बात है लेकिन सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर लोग बिना डॉक्टर की सलाह के तरह-तरह की क्रीम और सीरम इस्तेमाल करने लगते हैं। उनका कहना है कि किशोरों की त्वचा अधिक संवेदनशील होती है। रेटिनॉल, एक्सफोलिएटिंग एसिड और पीलिंग एजेंट जैसे उत्पादों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे एलर्जी, डर्मेटाइटिस, जलन और पिगमेंटेशन जैसी नई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। कई युवा एक साथ कई नए उत्पाद आजमाते हैं, जिससे साइड इफेक्ट्स का खतरा और बढ़ जाता है।
कॉस्मेटिकोरिया के प्रमुख संकेत
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बार-बार आईना देखना और लगातार नए स्किनकेयर प्रोडक्ट खरीदना।
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स्किनकेयर रूटीन टूटने पर बेचैनी या तनाव होना।
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बिना मेकअप लोगों से मिलने से बचना।
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पोर्स, हल्के दाग या असमान स्किन टोन जैसी सामान्य बातों को लेकर जरूरत से ज्यादा परेशान रहना।
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कम उम्र में एंटी-एजिंग प्रोडक्ट्स और लंबे स्किनकेयर रूटीन अपनाना।
स्वस्थ त्वचा के लिए डॉक्टरों की सलाह
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संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
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पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और अच्छी नींद लें।
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हल्का फेस क्लींजर, जरूरत के अनुसार मॉइस्चराइजर और धूप में सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें।
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बिना डॉक्टर की सलाह के रेटिनॉल, एसिड या एंटी-एजिंग उत्पादों का इस्तेमाल न करें।
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सोशल मीडिया ट्रेंड के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह पर भरोसा करें।