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Mohammed Zubair: ऑल्ट न्यूज के मोहम्मद जुबैर की जमानत पर सुनवाई 14 जुलाई तय, सरकारी वकील के न होने पर लिया निर्णय

Wed, 13 Jul 2022 08:57 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Wed, 13 Jul 2022 08:57 AM IST
सार

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश हुए विशेष अभियोजन अधिकारी अतुल श्रीवास्तव ने अदालत से मामले को स्थगित करने का आग्रह करते हुए कहा कि जुबैर के खिलाफ एक अलग मामला मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया है।

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Hearing on bail of Mohammad Zubair fixed for July 14
मोहम्मद जुबैर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अदालत ने मंगलवार को आपत्तिजनक ट्वीट से संबंधित एक मामले में ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की जमानत पर सुनवाई 14 जुलाई तय की है। आरोप है कि जुबैर ने 2018 में हिंदू देवी-देवता के खिलाफ पोस्ट किए थे।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार जांगला ने मामले में विस्तृत बहस के लिए अभियोजन पक्ष द्वारा समय मांगे जाने के बाद सुनवाई स्थगित की है। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश हुए विशेष अभियोजन अधिकारी अतुल श्रीवास्तव ने अदालत से मामले को स्थगित करने का आग्रह करते हुए कहा कि जुबैर के खिलाफ एक अलग मामला मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया है।
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इस पर आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत से बुधवार को मामले में सुनवाई का आग्रह किया। अधिवक्ता अतुल श्रीवास्तव ने हालांकि कहा कि वह भोपाल में हैं और कल अदालत में पेश होने के लिए उपलब्ध नहीं होंगे। ग्रोवर ने कहा कि श्रीवास्तव के उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में कोई अन्य अभियोजक इस मामले में बहस कर सकता है या वे वीसी के माध्यम से पेश हो सकते हैं।
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उन्होंने कहा जमानत दाखिल की गई है, यह एक आदमी की स्वतंत्रता का मामला है। कल सुनवाई की जाए वह वीसी पर पेश हो सकते हैं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले की सुनवाई 14 जुलाई तय कर दी। संक्षिप्त सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने पुलिस के इस तर्क का विरोध किया कि जुबैर द्वारा पोस्ट किया गया ट्वीट अत्यधिक उत्तेजक और लोगों के बीच घृणा की भावना को भड़काने के लिए पर्याप्त से अधिक है जो सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए हानिकारक हो सकता है।

उन्होंने कहा कि ट्वीट में इस्तेमाल की गई तस्वीर ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म किसी से ना कहना की थी, जो 1983 में रिलीज हुई थी। तीन दशकों में, किसी को भी कोई आपत्ति नहीं थी। मेरा ट्वीट दूसरे ट्विटर हैंडल भी यही ट्वीट करते हैं 2018 के बाद से किसी की भावना को ठेस नहीं पहुंची... आज तक इनमें से किसी को भी हटाने के लिए नहीं कहा गया है। सौभाग्य से समाज में कोई अशांति नहीं है। उन्होंने विचाराधीन फिल्म से एक वीडियो चलाने के लिए अदालत की अनुमति मांगी। अदालत ने हालांकि कहा कि वकील बाद में वीडियो चला सकते हैं।


मजिस्ट्रेट अदालत ने 2 जुलाई को जुबैर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत (जेसी) में भेज दिया था, जिसमें आरोपी के खिलाफ अपराधों की प्रकृति और गंभीरता का हवाला दिया गया था और यह देखते हुए कि मामला जांच के प्रारंभिक चरण में था।

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