जंतर मंतर प्रदर्शन: रणनीति तार-तार होने के बाद संभली सरकार, राहुल के धरने के बाद अचानक पहुंची वांगचुक के द्वार
मंगलवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के पास धरने के बाद सरकार को न सिर्फ लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक का दरवाजा खटखटाना पड़ा, बल्कि मंत्रियों को आंदोलन के दौरान घायल युवाओं से मुलाकात के लिए अस्पताल के भी चक्कर लगाने पड़े।
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नीट पेपर लीक मामले से निपटने की सरकार की रणनीति एक-एक कर औंधे मुंह गिरी। पुरानी रणनीति के पूरी तरह नाकाम होने के बाद सरकार को नई रणनीति बनानी पड़ी। खासतौर से मंगलवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के पास धरने के बाद सरकार को न सिर्फ लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक का दरवाजा खटखटाना पड़ा, बल्कि मंत्रियों को आंदोलन के दौरान घायल युवाओं से मुलाकात के लिए अस्पताल के भी चक्कर लगाने पड़े। इतना ही नहीं बुधवार को सरकार ने पहली बार इस मुद्दे पर संसद में विपक्ष की मांग के अनुरूप चर्चा पर हामी भी भर दी। हालांकि मौके की नजाकत को भांपते हुए विपक्ष ने चर्चा के लिए अब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की शर्त रख दी है।
दरअसल बीते महीने जंतर-मंतर पर शुरू हुए आंदोलन में गिने-चुने लोगों की उपस्थिति से सरकार निश्चिंत हो गई। सरकार के रणनीतिकार यह अंदाजा नहीं लगा पाए कि यह आंदोलन देर-सबेर नया रूप ले सकता है। फिर सोमवार को जब संसद मार्च के बाद आंदोलन ने नया रूप लिया और राहुल के धरने के बाद परिस्थितियां बदलीं तो सरकार अपनी रणनीति में बदलाव के लिए मजबूर हो गई।
23 दिन बाद आई वांगचुक की याद
जब सोमवार को कॉकरोच पार्टी के प्रतिनिधिमंडल में शामिल आशुतोष रांका और सौरव दास केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिलने गए तो उन्हें दस मिनट की मुलाकात के लिए दो घंटे इंतजार कराया गया। बाद में नड्डा ने कहा कि प्रतिनिधि ने उनसे मिलने का अनुरोध किया था। महज 24 घंटे बाद स्थिति में ऐसा बदलाव आया कि नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को भूख हड़ताल के 24वें दिन वांगचुक से मिलने पर मजबूर होना पड़ा।
क्यों बदलनी पड़ी रणनीति
सरकार तब हरकत में आई जब आंदोलन में राहुल की एंट्री हुई। प्रधानमंत्री आवास पर उनके धरने से इस आंदोलन को नई धार मिली। सरकार के रणनीतिकारों को लगा कि अब तक चेहरा विहीन यह आंदोलन अब राजनीतिक हो जाएगा। यही कारण है कि 23 दिन तक वांगचुक से दूर रही सरकार न सिर्फ उनके पास पहुंची, उनसे भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की, बल्कि अगले ही दिन इस मुद्दे पर संसद में किसी भी दिन चर्चा की विपक्ष की मांग स्वीकार की।
अनुमान नहीं लगा पाई सरकार
शुरू से देखें तो सरकार इस आंदोलन के प्रभाव का अनुमान नहीं लगा पाई। जबकि हकीकत यह है कि नीट ही नहीं विभिन्न राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र लीक होने की घटनाओं की बाढ़ आने से युवा वर्ग आहत और नाराज था।
65 सांसदों ने किया आग्रह- वांगचुक खत्म करें अनशन
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा किया है। उन्होंने पत्र में बताया है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर या व्यक्तिगत रूप से मिलकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। यह याद भी दिलाया है कि देश की सेवा में मुझे अभी भी बहुत काम करना है। मैं उनसे सहमत हूं। मैं जीना चाहता हूं और अपने छात्रों, शिक्षा और उस काम में वापस लौटना चाहता हूं जिसने मेरे जीवन को परिभाषित किया है।