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जंतर-मंतर प्रदर्शन: पुलिस ने 15 वायरल वीडियो खारिज किये, स्रोत पता लगाने का प्रयास; भ्रम फैलाने वालों पर नजर

Thu, 23 Jul 2026 03:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 23 Jul 2026 03:57 AM IST
सार

पुलिस की तथ्य-जांच (फैक्ट-चेक) टीमें सैकड़ों वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट का विश्लेषण कर उनके स्रोत का पता लगाने तथा कथित तौर पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों की पहचान करने में जुटी हैं।

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Jantar Mantar Protest: Police dismiss 15 viral videos, work to trace sources
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार खुद संसद मार्ग स्थित नई दिल्ली जिला पुलिस उपायुक्त कार्यालय में बैठकर पूरे माहौल पर नजर रखे हुए हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली पुलिस ने सोमवार को हुए प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर प्रसारित कम से कम 15 फर्जी वीडियो और भ्रामक दावों का खंडन किया है। पुलिस की तथ्य-जांच (फैक्ट-चेक) टीमें सैकड़ों वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट का विश्लेषण कर उनके स्रोत का पता लगाने तथा कथित तौर पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों की पहचान करने में जुटी हैं।

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दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार खुद संसद मार्ग स्थित नई दिल्ली जिला पुलिस उपायुक्त कार्यालय में बैठकर पूरे माहौल पर नजर रखे हुए हैं। वह हालात संभालने के लिए सीनियर पुलिस अधिकारियों के साथ नई दिल्ली जिला पुलिस डीसीपी कार्यालय में ही बैठक कर रहे हैं। सीजेपी के सोमवार को संसद चलो मार्च के दौरान भी वह नइ्र दिल्ली स्थित डीसीपी कार्यालय में डटे रहे थे।
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दिल्ली पुलिस के एक अधिकारियों के अनुसार दिल्ली पुलिस ने जिन वीडियो का खंडन किया है, उनमें 12 वर्षीय एक लड़की और एक महिला प्रदर्शनकारी के साथ पुलिस की कथित मारपीट, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत डिपके को हिरासत में लिए जाने, पुलिस के लाठीचार्ज के बाद भगदड़ में एक लड़की की मौत होने तथा पुलिसकर्मियों की ओर से पैलेट गन या कील लगी लाठियों के इस्तेमाल जैसे दावे शामिल हैं। नीट मुद्दे पर संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान हुई हिंसा के लिए दिल्ली पुलिस और सीजेपी के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे लोग एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। 
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सोशल मीडिया पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प, लाठीचार्ज, आंसू गैस के इस्तेमाल और पथराव से जुड़े अनेक वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस पर कथित बर्बरता के आरोप भी लगे हैं। पुलिस की एक आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार सोमवार से सोशल मीडिया पर प्रसारित कई दावे झूठे, भ्रामक, पुराने अथवा संदर्भ से हटकर साझा किए गए पाए गए। इसके बाद पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यमों से उनका खंडन किया। एक पुलिस सूत्र ने बताया कि जांचकर्ता एक वायरल ऑडियो क्लिप की भी जांच कर रहे हैं, जिसमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की आवाज से कथित छेड़छाड़ की गई है। 

सूत्र ने कहा कि प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था का पालन करने की अपील वाले अधिकारी के मूल संदेश में छेड़छाड़ की गई। पाकिस्तान में बैठे लोगों ने आवाज में बदलाव कर उसमें मनगढ़ंत ऑडियो जोड़ दिया। यह वायरल क्लिप पूरी तरह फर्जी है और इसका पहले ही खंडन किया जा चुका है। दिल्ली पुलिस ने एक विशेष तथ्य-जांच टीम गठित की है, जो प्रदर्शन से जुड़े हर वायरल वीडियो, तस्वीर और ऑडियो क्लिप की जांच कर रही है।

वीडियो का स्रोत पता किया जा रहा है-
एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टीम प्रत्येक वीडियो के स्रोत का पता लगाती है, सभी पहलुओं से उसकी जांच करती है, उपलब्ध अभिलेखों का मिलान करती है और डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण करती है। यदि कोई दावा झूठा या भ्रामक पाया जाता है तो दिल्ली पुलिस के आधिकारिक ‘एक्स’ खाते के माध्यम से स्पष्टीकरण जारी किया जाता है। पुलिस ने बताया कि जांचकर्ता उन वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट का भी विश्लेषण कर रहे हैं, जिनमें पुलिसकर्मियों पर हमले, पथराव, पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं दिखाई गई हैं।


एआई से मिलान 
इन वीडियो का मिलान सीसीटीवी फुटेज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित कैमरों से प्राप्त रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से किया जा रहा है, ताकि हिंसा में कथित रूप से शामिल लोगों की पहचान कर जांच को आगे बढ़ाया जा सके। अधिकारियों ने कहा कि लोगों में दहशत फैलाने, जनता को गुमराह करने या कानून-व्यवस्था बाधित करने के उद्देश्य से जानबूझकर फर्जी सामग्री तैयार करने, उसमें बदलाव करने या उसे प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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