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Delhi NCR News: घुटने की टीबी से 12 साल नहीं चल सका युवक, सर्जरी से फिर चले कदम
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के एक निजी अस्पताल ने उज्बेकिस्तान के 25 साल के युवक के घुटने की टीबी की सर्जरी कर उसे फिर चलने लायक बना दिया। मरीज जामशेदबेक का पैर, घुटने में टीबी होने की वजह से डंडे जैसा सख्त हो गया था। 12 साल से ज्यादा समय से उसे यह शिकायत थी। डॉक्टरों के अनुसार, मरीज को 13 साल की उम्र में घुटने में हल्का संक्रमण हुआ था, जो बाद में घुटने की टीबी में बदल गया। इससे घुटना जम गया और चलना-फिरना मुश्किल हो गया। मांसपेशियां भी बहुत कमजोर हो गईं।
अस्पताल के ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट के हेड डॉ. आशीष चौधरी ने बताया कि उन्होंने विशेष हिंग इम्प्लांट से नया घुटना जोड़ बनाया। सर्जरी और फिजियोथेरेपी के बाद अब मरीज फिर से चल-फिर सकता है।
टीबी के मामले में भारत सबसे अधिक प्रभावित
हड्डी की टीबी कुल एक्स्ट्रा-पल्मोनरी टीबी के करीब 10 प्रतिशत मामलों में होती है। इसमें घुटने की टीबी लगभग 8 प्रतिशत मामलों में पाई जाती है। टीबी के मामले में भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। समय पर इलाज से ऐसी विकलांगता से बचा जा सकता है।
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अस्पताल के ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट के हेड डॉ. आशीष चौधरी ने बताया कि उन्होंने विशेष हिंग इम्प्लांट से नया घुटना जोड़ बनाया। सर्जरी और फिजियोथेरेपी के बाद अब मरीज फिर से चल-फिर सकता है।
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टीबी के मामले में भारत सबसे अधिक प्रभावित
हड्डी की टीबी कुल एक्स्ट्रा-पल्मोनरी टीबी के करीब 10 प्रतिशत मामलों में होती है। इसमें घुटने की टीबी लगभग 8 प्रतिशत मामलों में पाई जाती है। टीबी के मामले में भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। समय पर इलाज से ऐसी विकलांगता से बचा जा सकता है।