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Delhi NCR News: एक सप्ताह बाद सामान्य हुई लुटियंस दिल्ली, जंतर-मंतर से हटे आंदोलन के सभी निशान
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दीवारों पर लिखे नारों को मिटाते कर्मचारी।
- फोटो : Amar Ujala
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जंतर-मंतर से हटे बैरिकेड, रातभर चला सफाई अभियान; संसद मार्ग समेत सभी प्रमुख रास्तों पर यातायात सामान्य
दीवारों से मिटे आंदोलन के निशान, पर्यटकों की चहल-पहल लौटी; सोशल मीडिया बना विरोध की सबसे बड़ी ताकत
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। प्रदर्शन, कड़े सुरक्षा इंतजाम और यातायात प्रतिबंधों के कारण एक सप्ताह तक प्रभावित रही लुटियंस दिल्ली ने शनिवार रात आंदोलन समाप्त होने के बाद रविवार को सामान्य स्थिति में वापसी कर ली। जंतर-मंतर पर धरना खत्म होते ही प्रशासन ने रातभर सफाई अभियान चलाया। सुबह तक जंतर-मंतर, संसद मार्ग और आसपास की सड़कों से पोस्टर, बैनर, प्लास्टिक की बोतलें और अन्य सामान हटा दिया गया। आंदोलन के लगभग सभी निशान मिटा दिए गए।
इलाके में लगाए गए अस्थायी बैरिकेड और सुरक्षा नाके भी हटा लिए गए। इसके बाद संसद मार्ग, अशोक रोड, जनपथ, कनॉट प्लेस, विंडसर प्लेस, बाबा खड़क सिंह मार्ग और मंडी हाउस की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर यातायात सामान्य हो गया। कई दिनों से लंबे डायवर्जन और जाम से परेशान वाहन चालकों, कार्यालय आने-जाने वालों तथा टैक्सी-ऑटो चालकों ने राहत की सांस ली। उनका कहना था कि मार्ग परिवर्तन के कारण समय और ईंधन दोनों की अतिरिक्त खपत हो रही थी, जबकि रविवार को सफर पहले की तरह सहज रहा।
आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर के साथ-साथ मोबाइल फोन और सोशल मीडिया भी विरोध का प्रमुख माध्यम बने। इंटरनेट युग की युवा पीढ़ी ने प्रदर्शन की गतिविधियों, भाषणों और नारों को मोबाइल कैमरों में रिकॉर्ड कर विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर साझा किया। वीडियो, तस्वीरें और मीम्स तेजी से वायरल हुए, जिससे आंदोलन को व्यापक पहचान मिली और बड़ी संख्या में युवा इससे जुड़े।
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टॉलस्टॉय मार्ग की दीवारें रातों-रात पुराने स्वरूप में लौटीं
उधर, जंतर-मंतर और टॉलस्टॉय मार्ग की दीवारों को भी रातों-रात पुराने स्वरूप में लौटा दिया गया। नगर परिषद के कर्मचारियों ने सफेद रंग से सभी ग्रैफिटी, नारों और संदेशों को ढक दिया। इंपीरियल होटल के सामने की लंबी दीवार, जिस पर लोकतंत्र, संविधान, अभिव्यक्ति की आजादी और बदलाव जैसे विषयों पर युवाओं ने अपने विचार लिखे थे, रविवार तक फिर सामान्य दिखाई देने लगी। पेड़ों, लोहे के गेटों और फुटपाथों पर बने अधिकांश निशान भी हटा दिए गए।
-रविवार शाम तक पूरा जंतर-मंतर ऐसा दिखाई दे रहा था, मानो यहां पिछले सप्ताह हजारों युवाओं का जमावड़ा कभी लगा ही न हो। प्रशासन के अनुसार, पूरे इलाके को सामान्य स्थिति में लौटाने और सार्वजनिक संपत्ति को पहले जैसी अवस्था में बहाल करने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया गया।
इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ी पर्यटकों की चहल-पहल
आंदोलन समाप्त होने के बाद सबसे अधिक राहत वाहन चालकों और आम लोगों को मिली। जहां पिछले कई दिनों से कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में लंबा समय लग रहा था, वहीं रविवार को बिना किसी डायवर्जन के लोग आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंचे। छुट्टी होने के कारण इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा और आसपास के क्षेत्रों में परिवारों और पर्यटकों की चहल-पहल भी लौट आई। लोगों ने कहा कि कई दिनों बाद राजधानी ने बिना सायरन, जाम और पुलिस की रोक-टोक वाला सुकून भरा रविवार देखा।
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दीवारों से मिटे आंदोलन के निशान, पर्यटकों की चहल-पहल लौटी
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। प्रदर्शन, कड़े सुरक्षा इंतजाम और यातायात प्रतिबंधों के कारण एक सप्ताह तक प्रभावित रही लुटियंस दिल्ली ने शनिवार रात आंदोलन समाप्त होने के बाद रविवार को सामान्य स्थिति में वापसी कर ली। जंतर-मंतर पर धरना खत्म होते ही प्रशासन ने रातभर सफाई अभियान चलाया। सुबह तक जंतर-मंतर, संसद मार्ग और आसपास की सड़कों से पोस्टर, बैनर, प्लास्टिक की बोतलें और अन्य सामान हटा दिया गया। आंदोलन के लगभग सभी निशान मिटा दिए गए।
इलाके में लगाए गए अस्थायी बैरिकेड और सुरक्षा नाके भी हटा लिए गए। इसके बाद संसद मार्ग, अशोक रोड, जनपथ, कनॉट प्लेस, विंडसर प्लेस, बाबा खड़क सिंह मार्ग और मंडी हाउस की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर यातायात सामान्य हो गया। कई दिनों से लंबे डायवर्जन और जाम से परेशान वाहन चालकों, कार्यालय आने-जाने वालों तथा टैक्सी-ऑटो चालकों ने राहत की सांस ली। उनका कहना था कि मार्ग परिवर्तन के कारण समय और ईंधन दोनों की अतिरिक्त खपत हो रही थी, जबकि रविवार को सफर पहले की तरह सहज रहा।
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आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर के साथ-साथ मोबाइल फोन और सोशल मीडिया भी विरोध का प्रमुख माध्यम बने। इंटरनेट युग की युवा पीढ़ी ने प्रदर्शन की गतिविधियों, भाषणों और नारों को मोबाइल कैमरों में रिकॉर्ड कर विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर साझा किया। वीडियो, तस्वीरें और मीम्स तेजी से वायरल हुए, जिससे आंदोलन को व्यापक पहचान मिली और बड़ी संख्या में युवा इससे जुड़े।
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टॉलस्टॉय मार्ग की दीवारें रातों-रात पुराने स्वरूप में लौटीं
उधर, जंतर-मंतर और टॉलस्टॉय मार्ग की दीवारों को भी रातों-रात पुराने स्वरूप में लौटा दिया गया। नगर परिषद के कर्मचारियों ने सफेद रंग से सभी ग्रैफिटी, नारों और संदेशों को ढक दिया। इंपीरियल होटल के सामने की लंबी दीवार, जिस पर लोकतंत्र, संविधान, अभिव्यक्ति की आजादी और बदलाव जैसे विषयों पर युवाओं ने अपने विचार लिखे थे, रविवार तक फिर सामान्य दिखाई देने लगी। पेड़ों, लोहे के गेटों और फुटपाथों पर बने अधिकांश निशान भी हटा दिए गए।
-रविवार शाम तक पूरा जंतर-मंतर ऐसा दिखाई दे रहा था, मानो यहां पिछले सप्ताह हजारों युवाओं का जमावड़ा कभी लगा ही न हो। प्रशासन के अनुसार, पूरे इलाके को सामान्य स्थिति में लौटाने और सार्वजनिक संपत्ति को पहले जैसी अवस्था में बहाल करने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया गया।
इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ी पर्यटकों की चहल-पहल
आंदोलन समाप्त होने के बाद सबसे अधिक राहत वाहन चालकों और आम लोगों को मिली। जहां पिछले कई दिनों से कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में लंबा समय लग रहा था, वहीं रविवार को बिना किसी डायवर्जन के लोग आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंचे। छुट्टी होने के कारण इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा और आसपास के क्षेत्रों में परिवारों और पर्यटकों की चहल-पहल भी लौट आई। लोगों ने कहा कि कई दिनों बाद राजधानी ने बिना सायरन, जाम और पुलिस की रोक-टोक वाला सुकून भरा रविवार देखा।