पिस्तौल की नोक पर सामूहिक यौन उत्पीड़न: सिर-पेट और गुप्तांगों पर चोटें मारीं; मुख्य आरोपी था फरार, अब अरेस्ट
पुलिस ने 29 अप्रैल को पालम से गुलजार उर्फ सोनू को गिरफ्तार किया। उस पर तीन साथियों संग नाबालिग लड़के से पिस्तौल के बल पर सामूहिक यौन उत्पीड़न का आरोप है।
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दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने पिस्तौल के बल पर नाबालिग लड़के के साथ अपने तीन साथियों समेत सामूहिक यौन उत्पीड़न (सामूहिक कुकर्म) करने वाले आरोपी गुलजार उर्फ सोनू (30) निवासी पालम, दिल्ली को 29 अप्रैल को गिरफ्तार किया है। अदालत ने उसे 15 दिसंबर, 2025 को बदमाश घोषित कर दिया था।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त पंकज कुमार ने बताया कि चार आरोपी अजय, नीरज, कमल और गुलजार उर्फ सोनू ने एक नाबालिग लड़के पर क्रूर शारीरिक हमला और साथ ही यौन उत्पीड़न 5 अक्तूबर 2024 को किया था। आरोपी गुलजार उर्फ सोनू के पास एक पिस्तौल थी और उसने पीड़ित को जान से मारने की धमकी दी थी। इससे पीड़ित डर गया था।
आरोपी नीरज ने एक ब्लेड से पीड़ित के सिर, पेट और गुप्तांगों पर चोटें पहुंचाईं, जबकि आरोपी अजय ने भी पीड़ित की पीठ पर ब्लेड से हमला किया। सभी आरोपियों ने पीड़ित पर पिस्तौल तानकर उसे जान से मारने की धमकी दी देकर गंभीर यौन उत्पीड़न किया। इससे पीड़ित बेहोश हो गया था। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
एक स्थानीय निवासी ने पीड़ित को बेहोशी की हालत में पड़ा देखा और तुरंत उसे चिकित्सकीय उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। स्थानीय थाना पुलिस ने आरोपी अजय, नीरज और कमल को गिरफ्तार किया। मुख्य आरोपी गुलजार उर्फ सोनू फरार हो गया और गिरफ्तारी से बचता रहा। इस आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस उपायुक्त पंकज कुमार ने शाखा में तैनात इंस्पेक्टर योगेश और इंस्पेक्टर विनोद यादव की टीम को विशेष रूप से लगाया।
इस टीम को 29 अप्रैल को सूचना मिली थी कि आरोपी गुलजार पालम गांव आएगा। पुलिस टीम ने यहां घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर, नाबालिग पीड़ित को हथियार से धमकाकर इस अपराध को अंजाम दिया था।
म़ृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान है
आरोपी के खिलाफ पालम गांव थाने में पॉक्सो अधिनियम की धारा-6 और बीएनएस की धारा 118(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पॉक्सो की इस धारा के तहत कठोर दंड का प्रावधान है, जिसमें न्यूनतम 20 वर्ष की सजा शामिल है। इसे सबसे जघन्य मामलों में आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक बढ़ाया जा सकता है।
