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Monsoon Planning: पानी भरा तो जवाबदेह होंगे इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी ने 448 पॉइंट के लिए जारी किया एक्शन प्लान

अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 15 May 2026 06:44 AM IST
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सार

पिछले वर्षों (2023, 2024 और 2025) के अनुभवों और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के इनपुट के आधार पर विभाग ने दिल्ली में 448 ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान की है जहां भारी बारिश के दौरान पानी भरने की सबसे अधिक संभावना रहती है।

Monsoon Planning: Engineers will be held accountable if water fills up
दिल्ली में तेज बारिश से जलभराव, फाइल चित्र - फोटो : X @ANI
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विस्तार

मानसून की दस्तक से पहले लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने राजधानी को डूबने से बचाने के लिए सख्त और विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। पिछले वर्षों (2023, 2024 और 2025) के अनुभवों और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के इनपुट के आधार पर विभाग ने दिल्ली में 448 ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान की है जहां भारी बारिश के दौरान पानी भरने की सबसे अधिक संभावना रहती है।

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इस बार पीडब्ल्यूडी का रुख पहले से कहीं अधिक कड़ा है। बीते दिनों जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, इन सभी 448 जलभराव वाले बिंदुओं के लिए विशेष रूप से जिम्मेदार अधिकारी और समीक्षा अधिकारी तैनात किए गए हैं। आदेश में बताया गया है कि नामित अधिकारियों को मानसून 2026 के दौरान जलभराव रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी बनाया गया है। यदि उनके आवंटित क्षेत्र में जलभराव या बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली को तीन मुख्य जोन ईस्ट, साउथ और नॉर्थ में विभाजित किया गया है। विभाग की ओर से प्रत्येक जाेन के लिए विस्तृत एनेक्सर जारी किए गए हैं, जिनमें सड़क का नाम, सटीक स्थान, संबंधित डिवीजन, और वहां तैनात कार्यकारी अभियंता (ईई), सहायक अभियंता (एई) और कनिष्ठ अभियंता (जेई) के नाम व मोबाइल नंबर दिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि विभाग ने इस बार प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय विधायकों के साथ भी समन्वय बिठाने की कोशिश की है।

हर पॉइंट पर ट्रिपल लेयर निगरानी
विभाग ने इस बार प्रत्येक जलभराव वाले स्थानों के लिए तीन-तीन अधिकारियों की तैनाती की है। इसमें कार्यकारी अभियंता (ईई), सहायक अभियंता (एई) और कनिष्ठ अभियंता (जेई) शामिल है। ऐसा इसलिए किया गया है कि अधिकार क्षेत्र को लेकर कोई विवाद नहीं हो। कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि जब अधिकार क्षेत्र को लेकर कई विभागों में तालमेल का अभाव रहा है। विभागीय आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारी अपने आवंटित पॉइंट की निगरानी, जलनिकासी व्यवस्था और आपात प्रतिक्रिया के लिए सीधे जिम्मेदार होंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे फील्ड स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी।

यहां पर सबसे ज्यादा जलभराव के हैं स्थान

  • जंगपुरा : यह पूरी दिल्ली में सबसे अधिक जलभराव वाले बिंदुओं वाला क्षेत्र है। दस्तावेज के अनुसार, यहां भैरो मार्ग (8 बिंदु), बहादुर शाह जफर मार्ग, मथुरा रोड, रिंग रोड (आईजीआई स्टेडियम से सराय काले खां तक), प्रगति मैदान टनल और लोधी रोड जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं।
  • चांदनी चौक : 57 स्थान के साथ दूसरे स्थान पर चांदनी चौक है। यहां बुलेवार्ड रोड, राजपुर रोड, रिंग रोड (कश्मीरी गेट के पास), रानी झांसी रोड, खारी बावली, नया बाजार जलभराव के सबसे अधिक हॉटस्पॉट हैं।
  • मुंडका : 26 स्थान नॉर्थ जोन के इस क्षेत्र में मुख्य रूप से रोहतक रोड पर समस्या है। यहां मुंडका मेट्रो स्टेशन, टिकरी बॉर्डर, राजधानी पार्क, घेवरा और स्वर्ण पार्क जैसे 26 महत्वपूर्ण बिंदुओं को चिन्हित किया गया है।
  • शालीमार बाग : 19 स्थान यहां 19 संवेदनशील बिंदु हैं। मुख्य स्थानों में मुकरबा चौक, आउटर रिंग रोड (हैदरपुर, पीतमपुरा), और रिंग रोड (शालीमार बाग टी-पॉइंट) शामिल हैं।
  • दिल्ली कैंट : 16 स्थान इस क्षेत्र में जलभराव के 16 बिंदु चिन्हित हैं। इसमें बेनीटो जुआरेज मार्ग, एनएच-48, रिंग रोड (धौला कुआं, बरार स्क्वायर), और उलान बटार मार्ग जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक रास्ते शामिल हैं।

मानसून से पहले एमसीडी अलर्ट, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
मानसून से पहले दिल्ली की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एमसीडी अलर्ट है। इस कड़ी में महापौर प्रवेश वाही ने निगम मुख्यालय में स्वच्छता और मानसून की तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ मिशन मोड में काम करने के निर्देश दिए।

महापौर ने कहा कि मानसून से पहले नालों की सफाई, कचरा प्रबंधन और जलभराव रोकने की तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। महापौर ने दिल्ली की सीमाओं और प्रवेश मार्गों की विशेष सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि राजधानी में आने वाले लोगों के सामने दिल्ली की स्वच्छ और बेहतर छवि दिखनी चाहिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग, फ्लड विभाग, दिल्ली जल बोर्ड और अन्य एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करने पर जोर दिया।

इस दौरान जवाबदेही तय करने पर भी विशेष जोर दिया गया। महापौर ने निर्देश दिए कि हर वार्ड में स्वच्छता अधिकारियों और नोडल अधिकारियों के संपर्क नंबर सार्वजनिक रूप से नोटिस बोर्ड पर लगाए जाएं। नेता सदन जय भगवान यादव ने कचरा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए कॉम्पैक्टर लगाने के कार्य में तेजी लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संसाधनों की कोई कमी नहीं है और यदि कहीं लापरवाही मिली तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उपमहापौर डॉक्टर मोनिका पंत ने अधिकारियों से जमीनी स्तर पर सक्रिय रहकर सफाई व्यवस्था मजबूत करने को कहा। वहीं निगम आयुक्त संजीव खिरवार ने अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए।

सरकार का दावा, 76% बड़े नाले हुए साफ, मानसून से पहले एक्शन मोड में मशीनरी
मानसून से पहले जलभराव की समस्या से निपटने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सरकार के मुताबिक राजधानी के बड़े ड्रेनों की डी-सिल्टिंग का करीब 76 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। राजधानी में कुल 29 लाख मीट्रिक टन सिल्ट हटाने का लक्ष्य तय किया गया था, जिसमें अब तक 22 लाख मीट्रिक टन से अधिक सिल्ट निकाली जा चुकी है।

दिल्ली सरकार ने बताया कि इस बार मनसून के दौरान लोगों को जलभराव से राहत दिलाने के लिए समयबद्ध तरीके से नालों की सफाई कराई जा रही है। डी-सिल्टिंग के काम में आधुनिक मशीनों और तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे काम की गति और गुणवत्ता दोनों बेहतर हुई हैं। विभिन्न विभागों की ओर से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि बारिश के दौरान जिन इलाकों में हर साल जलभराव की समस्या सामने आती है, वहां विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नालों की सफाई के साथ जल निकासी व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि बारिश का पानी तेजी से निकल सके।

तैयारियां पहले के मुकाबले व्यवस्थित
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस बार मानसून से पहले की तैयारियों को पहले के मुकाबले ज्यादा व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाया गया है। लक्ष्य है कि बारिश के मौसम में लोगों को सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी परेशानियों का कम से कम सामना करना पड़े।

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