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नीट-पीजी-2026: दो आर्मी डॉक्टरों को परीक्षा में बैठने की अंतरिम अनुमति देने से हाईकोर्ट का इन्कार
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कहा- अंतरिम राहत देना 2025 के नियमों के अमल पर रोक लगाने जैसा होगा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने नीट-पीजी-2026 के लिए आवेदन करने और परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मांग रहे दो आर्मी डॉक्टरों को अंतरिम राहत देने से इन्कार कर दिया है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा और न्यायमूर्ति विनोद कुमार की खंडपीठ ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (एएफटी) के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि केवल नियमों की वैधता पर सवाल उठाने के आधार पर अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ताओं को अंतरिम तौर पर परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाती है, तो यह 2025 के नियमों के अमल पर रोक लगाने के समान होगा, जबकि उनकी वैधता पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है।
याचिकाकर्ता मेजर जयंती चंद्रा और मेजर ईशान सेगन ने आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज के मेडिकल/नॉन-टेक्निकल अधिकारियों के लिए लागू ट्रेनिंग एंड प्रोफेशनल प्रोग्रेशन नियम-2025 को चुनौती दी है। उन्होंने विशेष रूप से नियम 7.2 का विरोध किया है, जिसके तहत शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) अधिकारियों के लिए पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल पाठ्यक्रम में आवेदन की पात्र सेवा अवधि 4-10 वर्ष से घटाकर 4-7 वर्ष कर दी गई है।
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28 अगस्त को एएफटी में सुनवाई
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 2018 के पुराने नियमों के अनुसार उन्हें 4 से 10 वर्ष की सेवा के दौरान नीट-पीजी के लिए आवेदन करने का अधिकार था। उन्होंने यह भी दलील दी कि आवेदन की अंतिम तिथि 30 जून होने के कारण उन्हें तत्काल राहत मिलनी चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों अधिकारी क्रमशः 2017 और 2018 में सेवा में आए थे तथा चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद 2022 और 2023 से ही नीट-पीजी परीक्षा के लिए पात्र थे, लेकिन अब तक कोई सीट हासिल नहीं कर सके। अदालत ने यह भी कहा कि उनकी मुख्य अपील 28 अगस्त को एएफटी में सूचीबद्ध है। यदि वे वहां सफल होते हैं, तो पुराने नियमों के तहत 2028 तक नीट-पीजी परीक्षा में शामिल होने के पात्र रहेंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने नीट-पीजी-2026 के लिए आवेदन करने और परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मांग रहे दो आर्मी डॉक्टरों को अंतरिम राहत देने से इन्कार कर दिया है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा और न्यायमूर्ति विनोद कुमार की खंडपीठ ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (एएफटी) के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि केवल नियमों की वैधता पर सवाल उठाने के आधार पर अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ताओं को अंतरिम तौर पर परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाती है, तो यह 2025 के नियमों के अमल पर रोक लगाने के समान होगा, जबकि उनकी वैधता पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है।
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याचिकाकर्ता मेजर जयंती चंद्रा और मेजर ईशान सेगन ने आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज के मेडिकल/नॉन-टेक्निकल अधिकारियों के लिए लागू ट्रेनिंग एंड प्रोफेशनल प्रोग्रेशन नियम-2025 को चुनौती दी है। उन्होंने विशेष रूप से नियम 7.2 का विरोध किया है, जिसके तहत शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) अधिकारियों के लिए पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल पाठ्यक्रम में आवेदन की पात्र सेवा अवधि 4-10 वर्ष से घटाकर 4-7 वर्ष कर दी गई है।
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28 अगस्त को एएफटी में सुनवाई
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 2018 के पुराने नियमों के अनुसार उन्हें 4 से 10 वर्ष की सेवा के दौरान नीट-पीजी के लिए आवेदन करने का अधिकार था। उन्होंने यह भी दलील दी कि आवेदन की अंतिम तिथि 30 जून होने के कारण उन्हें तत्काल राहत मिलनी चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों अधिकारी क्रमशः 2017 और 2018 में सेवा में आए थे तथा चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद 2022 और 2023 से ही नीट-पीजी परीक्षा के लिए पात्र थे, लेकिन अब तक कोई सीट हासिल नहीं कर सके। अदालत ने यह भी कहा कि उनकी मुख्य अपील 28 अगस्त को एएफटी में सूचीबद्ध है। यदि वे वहां सफल होते हैं, तो पुराने नियमों के तहत 2028 तक नीट-पीजी परीक्षा में शामिल होने के पात्र रहेंगे।