प्रदूषण नियंत्रण का मास्टर प्लान: दिल्ली में बिना वैध PUC ईंधन नहीं, जुर्माना भी बड़ा, जानें कौन से नियम लागू
दिल्ली सरकार ने 1 जुलाई को सर्दियों के प्रदूषण पर स्थायी मास्टर प्लान अधिसूचित किया। 1 नवंबर से 28 फरवरी तक बिना वैध पीयूसी वाहन को ईंधन नहीं मिलेगा और बाहरी बीएस-6 वाहनों पर रोक रहेगी। विस्तार से पढ़ें पूरी खबर-
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दिल्ली में सर्दियों के प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने स्थायी मास्टर प्लान 1 जुलाई को अधिसूचित कर दिया है। इसके तहत अब बिना वैध पीयूसी के किसी वाहन को पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा, भारी जुर्माना भी लगेगा। बाहरी बीएस-6 से नीचे के वाहनों की एंट्री पर रोक रहेगी, पार्किंग शुल्क दोगुना होगा और दफ्तरों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को ही बुलाने की व्यवस्था लागू की जाएगी। यह पूरी व्यवस्था हर वर्ष 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगी।
दिल्ली सरकार ने पर्यावरण एवं वन विभाग के माध्यम से अधिसूचित दिशा-निर्देशों में वाहनों, निर्माण गतिविधियों, धूल प्रदूषण और खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए स्थायी नियम तय किए हैं। सरकार का कहना है कि अब हर साल अलग-अलग आदेश जारी करने की जरूरत नहीं होगी और सभी विभाग पहले से तय नियमों के अनुसार कार्रवाई करेंगे।
पीयूसी नहीं तो पेट्रोल-डीजल भी नहीं
प्रदूषण नियंत्रण के लिए सबसे बड़ा बदलाव वाहनों को लेकर किया गया है। अब पूरे साल दिल्ली के पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी पंपों पर केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन मिलेगा, जिनके पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) प्रमाणपत्र होगा। पीयूसी की जांच केवल प्रमाणपत्र दिखाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वाहन डेटाबेस और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भी इसकी पुष्टि की जाएगी। तेल कंपनियों, परिवहन विभाग, दिल्ली नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस को इस व्यवस्था को लागू कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
बाहर से आने वाले प्रदूषणकारी वाहनों पर रोक
सर्दियों में प्रदूषण बढ़ाने वाले बाहरी वाहनों पर भी सख्ती की गई है। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-6 से नीचे के मोटर वाहनों के प्रवेश और संचालन पर प्रतिबंध रहेगा। हालांकि सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस वाहन और जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी।
दफ्तरों में आधे कर्मचारी, घर से काम को बढ़ावा
प्रदूषण के दौरान सड़क पर वाहनों का दबाव कम करने के लिए दिल्ली सरकार और निजी कार्यालयों में भी बदलाव किया गया है। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक एक समय में केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही कार्यालय आएंगे, जबकि बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। सरकारी विभागों में आवश्यक सेवाओं और वरिष्ठ अधिकारियों को नियमित रूप से कार्यालय आने की अनुमति रहेगी। निजी संस्थानों को भी अलग-अलग शिफ्ट, कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।
पार्किंग महंगी कर निजी वाहनों पर रोक की कोशिश
दिल्ली में 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है। हालांकि दिल्ली मेट्रो की पार्किंग और पार्क-एंड-राइड सुविधा वाले स्थान इस व्यवस्था से बाहर रहेंगे।
1 नवंबर से 31 जनवरी तक तोड़फोड़ और खुले निर्माण पर रोक
धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण गतिविधियों पर भी कड़ा नियंत्रण किया गया है। हर वर्ष 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाली तोड़फोड़ और खुले में होने वाले सिविल निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध रहेगा। जरूरी सार्वजनिक परियोजनाओं को इससे छूट मिलेगी, लेकिन निर्माण स्थलों को धूल नियंत्रण के सभी मानकों का पालन करना होगा। 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक प्रदूषण की सबसे गंभीर अवधि में निर्माण और तोड़फोड़ के नियम और सख्त रहेंगे।
बड़े भवनों में एंटी-स्मॉग गन अनिवार्य
सरकार ने बड़े व्यावसायिक और संस्थागत भवनों में धूल नियंत्रण के लिए भी नए नियम बनाए हैं। 3,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र वाले मॉल, होटल, कार्यालय भवन और अन्य संस्थानों में एंटी-स्मॉग गन या मिस्ट सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। निर्माणाधीन 1,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र वाले प्रोजेक्ट्स में भी मिस्ट सिस्टम लगाना जरूरी होगा। इसकी निगरानी दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, एमसीडी, एनडीएमसी और डीडीए करेंगे।
कचरा जलाने पर संस्थानों की भी जिम्मेदारी
खुले में कचरा, पत्तियां या अन्य सामग्री जलाने पर अब केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि संबंधित संस्थान भी जिम्मेदार होंगे। आरडब्ल्यूए, हाउसिंग सोसाइटी, सरकारी और निजी संस्थानों को अपने परिसर में निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। लापरवाही पाए जाने पर पर्यावरण कानूनों के तहत कार्रवाई और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली जा सकेगी। रात के समय ऐसी घटनाओं पर नजर रखने के लिए ड्रोन निगरानी का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
अनुभवों और आंकणों का विस्तृत विधान: रेखा गुप्ता
मुख्यमंत्री ने कहा है कि अधिसूचना में पिछले वर्षों के अनुभवों और वायु गुणवत्ता के आंकड़ों के आधार पर विस्तृत विधान तय किए हैं। साल 2023-26 के दौरान यह पाया गया कि 1 नवंबर से 15 फरवरी के बीच दिल्ली का औसत एक्यूआई 312 से 342 के बीच रहा, जबकि अधिकतम एक्यूआई 461 से 494 तक पहुंचा। इसी आधार पर सर्दियों के लिए विशेष नियंत्रण उपायों को स्थायी स्वरूप दिया गया है। साथ ही सीएक्यूएम द्वारा जारी संशोधित ग्रैप और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को भी इन नियमों में शामिल किया है।
एक नजर में ऐसे समझें:
- हर साल अलग-अलग आदेशों की जगह स्थायी नियम तय
- 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू व्यवस्था
- विभागों की जिम्मेदारी तय
- बिना पीयूसी पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा, लापरवाह लोगों पर बड़ा होगा जुर्माना, पीयूसी जांच की डिजिटल व्यवस्था
- पार्किंग महंगी होगी
- दफ्तरों में 50% वर्क फ्रॉम होम, टाइमिंग भी बदली
- प्रदूषण फैलाने वाले बीएस-6 से नीचे के बाहरी वाहनों की एंट्री बंद
- 1 नवंबर से 31 जनवरी तक तोड़फोड़ पर रोक, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक और सख्ती
- एंटी स्मॉग गन और मिस्ट सिस्टम अनिवार्य
- आरडब्ल्यूए, सोसाइटी, संस्थानों पर खुले में कचरा जलाने से रोकने की जिम्मेदारी, ड्रोन से निगरानी और पर्यावरणीय जुर्माना