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Delhi NCR News: यमुना में प्रदूषण नियंत्रण के लिए एसटीपी की हुई समीक्षा
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आईआईटी दिल्ली 60,70,500 रुपये से करेगा 14 एसटीपी का अध्ययन
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने यमुना नदी में प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली में स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों (एसटीपी) की समीक्षा की। अधिकरण ने कहा कि कई एसटीपी प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की।
एनजीटी ने कहा कि पिछले आदेश में आईआईटी दिल्ली से 14 एसटीपी में पराबैंगनी(यूवी) तकनीक के उपयोग की जांच कराने के लिए कहा गया था। इस तकनीक से सीवेज में मौजूद फीकल कोलीफॉर्म को मानक स्तर तक कम करने में मदद करेगी। सुनवाई के दौरान आईआईटी ने 14 एसटीपी के अध्ययन के लिए 60,70,500 रुपये की लागत बताई है। दिल्ली जल बोर्ड ने भुगतान के लिए समय मांगा, जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने स्थगन की मांग की। एनजीटी ने निर्देश दिया कि दिल्ली जल बोर्ड 10 दिनों के भीतर आईआईटी को भुगतान से संबंधित शपथपत्र दाखिल करे। मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी।
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने यमुना नदी में प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली में स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों (एसटीपी) की समीक्षा की। अधिकरण ने कहा कि कई एसटीपी प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की।
एनजीटी ने कहा कि पिछले आदेश में आईआईटी दिल्ली से 14 एसटीपी में पराबैंगनी(यूवी) तकनीक के उपयोग की जांच कराने के लिए कहा गया था। इस तकनीक से सीवेज में मौजूद फीकल कोलीफॉर्म को मानक स्तर तक कम करने में मदद करेगी। सुनवाई के दौरान आईआईटी ने 14 एसटीपी के अध्ययन के लिए 60,70,500 रुपये की लागत बताई है। दिल्ली जल बोर्ड ने भुगतान के लिए समय मांगा, जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने स्थगन की मांग की। एनजीटी ने निर्देश दिया कि दिल्ली जल बोर्ड 10 दिनों के भीतर आईआईटी को भुगतान से संबंधित शपथपत्र दाखिल करे। मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी।
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