Noida Engineer Death: तकनीकी जांच में अधिकारियों के झूठ उजागर, जिसे सौंपी जांच... वही पहुंचा तीन दिन बाद
सूत्रों के अनुसार इस जांच में कई अधिकारियों के दावे गलत साबित हुए हैं। एसआईटी को दिए गए लिखित जवाबों में कुछ अधिकारियों ने घटना स्थल पर पहुंचने का समय गलत बताया।
विस्तार
सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने लिखित जवाबों और बयानों के साथ तकनीकी जांच का सहारा लिया है। सूत्रों के अनुसार इस जांच में कई अधिकारियों के दावे गलत साबित हुए हैं। एसआईटी को दिए गए लिखित जवाबों में कुछ अधिकारियों ने घटना स्थल पर पहुंचने का समय गलत बताया। वहीं कुछ ने हादसे के एक दिन बाद मौके पर जाने का दावा किया, जबकि वे दो दिन तक वहां नहीं पहुंचे। जिस अधिकारी को प्राधिकरण की ओर से जांच की जिम्मेदारी दी गई थी, वह भी तीन दिन तक सेक्टर-150 नहीं गया।
जवाबों और बयानों में अंतर
नोएडा प्राधिकरण, पुलिस, अग्निशमन विभाग और प्रशासन के अधिकारियों ने लिखित जवाब दिए थे। शुक्रवार को एसआईटी के सामने बयान भी दर्ज हुए। तकनीकी रिपोर्ट को जांच में शामिल कर एसआईटी ने लिखित जवाबों और मौखिक बयानों के बीच अंतर की छंटनी की है।
सुरक्षा उपायों की कमी
जांच में सामने आया है कि घटना स्थल पर सुरक्षा उपायों की कमी थी। प्लॉट की खोदाई के बाद लंबे समय तक उसमें पानी भरा रहा। कार गिरने के बाद युवराज को सूचना मिलने पर भी समय पर बचाव नहीं किया गया। अब तक सामने आए तथ्य गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करते हैं।
अधिकारियों को लगा नहीं डूबेगी कार
एसआईटी ने जांच की शुरुआत युवराज के पिता के पास आई पहली फोन कॉल से की। उनके बयान दर्ज किए गए। कुछ चश्मदीदों, जो सोसाइटी के निवासी थे और मौके पर मौजूद थे, के बयान भी लिए गए। घटना की रात के वीडियो की जांच कर सही टाइमलाइन बनाई गई। इन तथ्यों से स्पष्ट हुआ कि पूरे तंत्र में सामंजस्य की कमी रही, समय पर निर्णय नहीं लिया गया और सूचना ऊपर तक नहीं पहुंचाई गई। जिम्मेदार अधिकारियों को देर तक यह लगता रहा कि युवराज की कार डूबेगी नहीं और थोड़ी देर में निकाल ली जाएगी।
इन बिंदुओं पर भी पूछे सवाल
- हादसे के अगले दिन भी किसी प्रशासनिक अधिकारी का मौके पर न पहुंचना
- 31 दिसंबर को ट्रक के नाले में गिरने की घटना की जानकारी जिम्मेदारों को न होना
- 90 डिग्री मोड़ पर सड़क सुरक्षा उपायों का अभाव - ब्रेकर पर पेंट, ब्लिंकर, रेडियम संकेतक और तीव्र मोड़ का बोर्ड न होना
- बिल्डर को प्लॉट आवंटन के बाद बेसमेंट की खोदाई कर खाली छोड़ने की छूट देना और बैरिकेडिंग न कराना
- प्लॉट में जलभराव, सीवर और नालियों का पानी भरना
नीचे तक तय होगी जिम्मेदारी
एसआईटी अपनी रिपोर्ट में प्राधिकरण, पुलिस और बचाव दल की जिम्मेदारी स्पष्ट करेगी। इसमें नोएडा प्राधिकरण में कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होगी। हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटाकर सख्त कार्रवाई का संदेश दिया था। अब जिम्मेदारी सीईओ के नीचे के स्तर पर तय की जानी है।
डिलीवरी बॉय का बयान लिया
चश्मदीद डिलीवरी बॉय मोनिंदर शनिवार को दोपहर बाद एसआईटी के सामने बयान दर्ज कराने के लिए पहुंचे। दोपहर बाद करीब 3 बजे प्राधिकरण दफ्तर में दाखिल हुए मोनिंदर रात में 8:30 बजे निकले। इस दौरान मोनिंदर का भाई नरेंद्र व पिता मेहर चंद बाहर इंतजार करते रहे। वापसी में मोनिंदर पुलिस सुरक्षा में निकला। भाई नरेंद्र ने बताया कि पुलिस सुरक्षा के साथ घर के लिए छोड़ने निकली। प्राधिकरण दफ्तर पहुंचने पर मोनिंदर ने कहा कि उन्होंने जो भी बोला है सच बोला है। वहीं मेहर चंद ने कहा कि उनका बेटा न तो बयानवीर है न ही अपराधी है।