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Alert: मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं दिल्ली के 11.23 फीसदी लोग, अकेलापन और तनाव झेल रही राजधानी की आबादी
सिमरन, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 25 Jan 2026 02:04 AM IST
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सार
दिल्ली स्टैटिस्टिकल हैंडबुक 2025 की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। 4.28 फीसदी लोग अवसाद, चिंता और सिजोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी से प्रभावित हैं।
सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
दिल्ली की 11.23 फीसदी आबादी मानसिक बीमारियों से जूझ रही है। दिल्ली स्टैटिस्टिकल हैंडबुक 2025 की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। करीब 7 फीसदी लोगों का बौद्धिक विकास नहीं हो पाया है, जिससे उनके सीखने और रोजमर्रा के जीवन में कठिनाइयां झेलनी पड़ रहीं। 4.28 फीसदी लोग अवसाद, चिंता और सिजोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी से प्रभावित हैं।
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दिल्ली सरकार की इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य, शिक्षा और जनसंख्या के आंकड़े हैं, जो दिल्ली की बदलती तस्वीर दिखाते हैं। इससे पता चलता है कि दिव्यांगता भी चिंता का विषय है। 12.83 फीसदी लोग आंखों की समस्या से ग्रस्त हैं। 21.11 फीसदी मूकबधिर, 28.69 फीसदी लोग शारीरिक गतिशीलता की कमी से जूझ रहे हैं। ये आंकड़े 2011 की जनगणना पर आधारित हैं। मौजूदा स्थिति और गंभीर है।
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अकेलापन और तनाव झेल रही आबादी
मनोचिकित्सक डॉ राहुल शर्मा ने बताया कि शहर की तेज जीवनशैली, काम का बोझ, ट्रैफिक जाम और प्रदूषण मानसिक स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे। प्रदूषण से दिमाग पर असर पड़ रहा। कोरोना महामारी के बाद से मामले 30-40 फीसदी बढ़े हैं। अकेलापन और तनाव लोगों को तोड़ रहा। डॉ प्रिया मेहता ने बताया कि महिलाओं में घरेलू जिम्मेदारियां, नौकरी का दबाव और लिंग भेदभाव बड़ा कारण है। बच्चों में मेंटल रिटार्डेशन जेनेटिक हो सकता है, लेकिन पोषण की कमी और जन्म के समय की जटिलताएं भी जिम्मेदार हैं।
काउंसलिंग से मिलती है राहत
दिल्ली में कुल दिव्यांगों की संख्या 2.34 लाख है, जो कुल आबादी का 1.4 फीसदी है। मानसिक स्वास्थ्य के मामले में आंकड़े अलग हैं, क्योंकि कई लोग स्टिग्मा के कारण इलाज नहीं कराते। विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित व्यायाम, अच्छी डाइट, योग और काउंसलिंग से इन समस्याओं को कम किया जा सकता है।