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Noida News: भीषण गर्मी में बढ़े एसी ब्लास्ट के मामले, लापरवाही पड़ सकती है भारी
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नोएडा। भीषण गर्मी के बीच घरों और दफ्तरों में एयर कंडीशनर (एसी) का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही एसी में आग लगने और ब्लास्ट होने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। अग्निशमन विभाग का कहना है कि अधिकांश हादसे तकनीकी खराबी और रखरखाव में लापरवाही के कारण होते हैं। समय पर सर्विसिंग, सही वायरिंग और सुरक्षित तरीके से एसी चलाकर ऐसे हादसों से काफी हद तक बचा जा सकता है। नोएडा में हाल में ही कई आग लगने की घटनाएं एसी फटने से हुई है।
अग्निशमन विभाग की तरफ से जानकारी दी गई है कि 45 से 50 डिग्री तक तापमान पहुंचने पर यदि एसी को लगातार कई घंटे तक 16 या 18 डिग्री पर चलाया जाए तो उसके कंप्रेसर पर काफी दबाव पड़ता है। लंबे समय तक लगातार काम करने से कंप्रेसर का तापमान बहुत बढ़ जाता है और वह खराब होने के साथ आग या ब्लास्ट का कारण बन सकता है। एसी में इस्तेमाल होने वाली गैस भी हादसे की एक वजह बन सकती है। यदि पाइपलाइन में रिसाव हो जाए और बाहर निकली गैस के संपर्क में कोई चिंगारी आ जाए तो आग लगने या तेज धमाका होने का खतरा रहता है। इसलिए गैस रिसाव के संकेत मिलते ही एसी बंद कर अधिकृत तकनीशियन से जांच करानी चाहिए। मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार चौबे का कहना है कि कई घरों में पुरानी या कमजोर बिजली की वायरिंग होने के कारण भी खतरा बढ़ जाता है। एसी अधिक बिजली खपत करने वाला उपकरण है। यदि सॉकेट ढीला हो, तार पतले हों या वायरिंग खराब हो तो शॉर्ट सर्किट होकर आग लग सकती है। एसी की नियमित सफाई और सर्विसिंग नहीं होने पर उसके फिल्टर और कंडेंसर में धूल जमा हो जाती है। इससे हवा का प्रवाह कम हो जाता है और मशीन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। नतीजतन कंप्रेसर तेजी से गर्म होने लगता है और खराब होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके साथ ही कम खर्च के लालच में स्थानीय और गैर-प्रमाणित तकनीशियनों से गैस भरवाना जोखिम भरा हो सकता है। घटिया या मिलावटी गैस का इस्तेमाल एसी की कार्यक्षमता घटाने के साथ दुर्घटना का कारण भी बन सकता है।
एसी चलाते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- एसी की साल में कम से कम एक या दो बार सर्विसिंग जरूर कराएं।
- काफी देर तक लगातार 16 या 18 डिग्री पर एसी नहीं चलाएं।
- गैस रिसाव या जलने जैसी गंध आने पर तुरंत एसी बंद करें।
- अधिकृत तकनीशियन से ही मरम्मत और गैस भरवाएं।
- घर की वायरिंग और शॉकेट की समय-समय पर जांच कराएं।
- आउटडोर यूनिट के आसपास हवा आने-जाने की पर्याप्त जगह रखें।
ब्लास्ट से ऐसे बच सकते हैं
- एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखें।
- लगातार कई घंटे चलाने के बजाय बीच-बीच में कुछ समय का अंतर दें।
- धूल जमा होने पर फिल्टर की सफाई करें।
- एमसीबी और अर्थिंग की जांच कराएं।
- किसी भी खराबी की स्थिति में खुद मरम्मत करने की कोशिश न करें।
एसी फटने की हाल की घटनाएं
नोएडा में जून महीने में ही एसी ब्लास्ट होने की कई घटनाएं सामने आई है। चार जून को सेक्टर-100 स्थित लोटस बुलेवर्ड सोसाइटी में एसी के इनडोर यूनिट में आग लग गई थी। वहीं जून में ही सेक्टर-75 स्थित आईवी काउंटी सोसाइटी में भी उसी में ब्लास्ट होने से आग लग गई थी।
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अग्निशमन विभाग की तरफ से जानकारी दी गई है कि 45 से 50 डिग्री तक तापमान पहुंचने पर यदि एसी को लगातार कई घंटे तक 16 या 18 डिग्री पर चलाया जाए तो उसके कंप्रेसर पर काफी दबाव पड़ता है। लंबे समय तक लगातार काम करने से कंप्रेसर का तापमान बहुत बढ़ जाता है और वह खराब होने के साथ आग या ब्लास्ट का कारण बन सकता है। एसी में इस्तेमाल होने वाली गैस भी हादसे की एक वजह बन सकती है। यदि पाइपलाइन में रिसाव हो जाए और बाहर निकली गैस के संपर्क में कोई चिंगारी आ जाए तो आग लगने या तेज धमाका होने का खतरा रहता है। इसलिए गैस रिसाव के संकेत मिलते ही एसी बंद कर अधिकृत तकनीशियन से जांच करानी चाहिए। मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार चौबे का कहना है कि कई घरों में पुरानी या कमजोर बिजली की वायरिंग होने के कारण भी खतरा बढ़ जाता है। एसी अधिक बिजली खपत करने वाला उपकरण है। यदि सॉकेट ढीला हो, तार पतले हों या वायरिंग खराब हो तो शॉर्ट सर्किट होकर आग लग सकती है। एसी की नियमित सफाई और सर्विसिंग नहीं होने पर उसके फिल्टर और कंडेंसर में धूल जमा हो जाती है। इससे हवा का प्रवाह कम हो जाता है और मशीन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। नतीजतन कंप्रेसर तेजी से गर्म होने लगता है और खराब होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके साथ ही कम खर्च के लालच में स्थानीय और गैर-प्रमाणित तकनीशियनों से गैस भरवाना जोखिम भरा हो सकता है। घटिया या मिलावटी गैस का इस्तेमाल एसी की कार्यक्षमता घटाने के साथ दुर्घटना का कारण भी बन सकता है।
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एसी चलाते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- एसी की साल में कम से कम एक या दो बार सर्विसिंग जरूर कराएं।
- काफी देर तक लगातार 16 या 18 डिग्री पर एसी नहीं चलाएं।
- गैस रिसाव या जलने जैसी गंध आने पर तुरंत एसी बंद करें।
- अधिकृत तकनीशियन से ही मरम्मत और गैस भरवाएं।
- घर की वायरिंग और शॉकेट की समय-समय पर जांच कराएं।
- आउटडोर यूनिट के आसपास हवा आने-जाने की पर्याप्त जगह रखें।
ब्लास्ट से ऐसे बच सकते हैं
- एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखें।
- लगातार कई घंटे चलाने के बजाय बीच-बीच में कुछ समय का अंतर दें।
- धूल जमा होने पर फिल्टर की सफाई करें।
- एमसीबी और अर्थिंग की जांच कराएं।
- किसी भी खराबी की स्थिति में खुद मरम्मत करने की कोशिश न करें।
एसी फटने की हाल की घटनाएं
नोएडा में जून महीने में ही एसी ब्लास्ट होने की कई घटनाएं सामने आई है। चार जून को सेक्टर-100 स्थित लोटस बुलेवर्ड सोसाइटी में एसी के इनडोर यूनिट में आग लग गई थी। वहीं जून में ही सेक्टर-75 स्थित आईवी काउंटी सोसाइटी में भी उसी में ब्लास्ट होने से आग लग गई थी।
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