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Noida News: जमीनी विवाद में आरोपी को मिली जमानत
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। लखनावली गांव में जमीनी विवाद को लेकर दर्ज मारपीट, फायरिंग और जान से मारने की धमकी के मामले में अदालत ने आरोपी प्रकाश उर्फ चंद्रू सिंह की चार गंभीर धाराओं में रिमांड की मांग खारिज कर उसे जमानत दी है। मामला सूरजपुर थाने में दर्ज है। प्राथमिकी के अनुसार वादी व उसके भाई की गांव लखनावली में जमीन है। जिसकी बाउंड्री कर वह मकान बनाकर रह रहे थे। 1 अप्रैल 2026 की सुबह विपक्षीगण लाठी-डंडे लेकर घर में घुसे, चारदीवारी गिराने का प्रयास किया। वादी पर अवैध असलहे से गोली चलाई गई, हालांकि वह बाल-बाल बच गया। पुलिस के अनुसार आरोपी प्रकाश के खिलाफ पहले से 26 मुकदमे दर्ज हैं।
दोनों पक्षों को सुनने और दस्तावेज के अवलोकन के बाद अदालत ने पाया कि गोली चलाए जाने के आरोप के समर्थन में केवल गवाहों के बयान दर्ज हैं, जबकि किसी हथियार की बरामदगी या खोखा कारतूस मिलने का कोई साक्ष्य केस डायरी में मौजूद नहीं है। घटनास्थल के नक्शा-नजरी में भी गोली लगने के किसी स्थान का उल्लेख नहीं मिला। इसी तरह जमीन अदालत ने पाया कि 24 दिसंबर 2025 के प्रस्तुत बैनामे में आरोपी का नाम न तो विक्रेता, न क्रेता और न ही गवाह के रूप में दर्ज है। इस कारण आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। लखनावली गांव में जमीनी विवाद को लेकर दर्ज मारपीट, फायरिंग और जान से मारने की धमकी के मामले में अदालत ने आरोपी प्रकाश उर्फ चंद्रू सिंह की चार गंभीर धाराओं में रिमांड की मांग खारिज कर उसे जमानत दी है। मामला सूरजपुर थाने में दर्ज है। प्राथमिकी के अनुसार वादी व उसके भाई की गांव लखनावली में जमीन है। जिसकी बाउंड्री कर वह मकान बनाकर रह रहे थे। 1 अप्रैल 2026 की सुबह विपक्षीगण लाठी-डंडे लेकर घर में घुसे, चारदीवारी गिराने का प्रयास किया। वादी पर अवैध असलहे से गोली चलाई गई, हालांकि वह बाल-बाल बच गया। पुलिस के अनुसार आरोपी प्रकाश के खिलाफ पहले से 26 मुकदमे दर्ज हैं।
दोनों पक्षों को सुनने और दस्तावेज के अवलोकन के बाद अदालत ने पाया कि गोली चलाए जाने के आरोप के समर्थन में केवल गवाहों के बयान दर्ज हैं, जबकि किसी हथियार की बरामदगी या खोखा कारतूस मिलने का कोई साक्ष्य केस डायरी में मौजूद नहीं है। घटनास्थल के नक्शा-नजरी में भी गोली लगने के किसी स्थान का उल्लेख नहीं मिला। इसी तरह जमीन अदालत ने पाया कि 24 दिसंबर 2025 के प्रस्तुत बैनामे में आरोपी का नाम न तो विक्रेता, न क्रेता और न ही गवाह के रूप में दर्ज है। इस कारण आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
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