2021 की वह खूनी पंचायत..: जहां ताबड़तोड़ बरसी थीं गोलियां, पहले दो भाइयों का कत्ल, फिर मुख्य गवाह भी मारा गया
ग्रेटर नोएडा के गिरधरपुर गांव में प्लॉट विवाद के चलते हुए दोहरे हत्याकांड में आठ आरोपियों को अदालत ने दोषी ठहराया है। इस मामले में दो लोगों की हत्या के बाद मुख्य गवाह की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह मामला आठ फरवरी 2021 का है। जब प्लॉट के विवाद को लेकर पंचायत बुलाई गई थी। पंचायत के दौरान विवाद इतना बढ़ गया था कि ताबड़तोड़ फायरिंग कर दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया।
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करीब पांच वर्ष पहले बादलपुर के गिरधरपुर गांव में प्लॉट के विवाद को लेकर पंचायत के दौरान हुए दोहरे हत्याकांड में अदालत ने आठ आरोपियों को दोषी करार दिया। मामले में दोष सिद्ध होने के बाद आज सत्र अदालत सजा पर फैसला सुनाएगी। इस हत्याकांड में दो लोगों की हत्या के बाद मुख्य चश्मदीद गवाह की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
अदालत ने गिरधरपुर गांव निवासी पांच सगे भाइयों देवेंद्र चंदेला, रविंद्र चंदेला, जितेंद्र चंदेला, सतेंद्र चंदेला और धर्मेंद्र चंदेला के अलावा बागपत निवासी भोपाल, उसके भाई महिपाल उर्फ अल्लू और पैरामाउंट, सूरजपुर निवासी अमरजीत बंसल को दोषी ठहराया है। सभी फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में हैं।
यह मामला आठ फरवरी 2021 का है। गिरधरपुर गांव में प्लॉट के विवाद को लेकर पंचायत बुलाई गई थी। आरोप है कि पंचायत के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि देवेंद्र पक्ष के लोगों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी में दो चचेरे भाई सलेक उर्फ सुरेश और अमित की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उनके चाचा प्रेम सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
मुख्य गवाह की हत्या से दहशत
प्रेम सिंह इलाज के बाद स्वस्थ हुए और इस दोहरे हत्याकांड के सबसे महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी गवाह बने। परिजनों का आरोप था कि शुरुआती चार महीनों तक पुलिस ने उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई, लेकिन कुछ समय बाद सुरक्षा वापस ले ली गई। इसी बीच 16 दिसंबर 2021 को खेत से घर लौटते समय बाइक सवार बदमाशों ने प्रेम सिंह को तीन गोलियां मार दीं थी। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
इस मामले में भी देवेंद्र, रविंद्र समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। मुख्य गवाह की हत्या के बाद पीड़ित परिवार में दहशत फैल गई थी। मृतक सुरेश के परिवार तथा उसके भाई जयदीप, जो स्वयं भी इस मामले के गवाह हैं, को गांव छोड़कर पलायन करना पड़ा था। परिजनों का आरोप था कि जेल में बंद आरोपी अपने परिचितों के माध्यम से समझौते का दबाव बना रहे थे और इन्कार करने पर जान से मारने की धमकियां दी जा रही थीं।
आरोपी की चार करोड़ रुपये की संपत्ति की थी कुर्क
घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश में व्यापक अभियान चलाया। मुख्य आरोपी देवेंद्र, रविंद्र और भोपाल पर 25-25 हजार का इनाम घोषित किया गया था। बाद में सूचना मिलने पर पुलिस ने आरोपियों को कार में भागने की कोशिश के दौरान घेर लिया था। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने घिरा देखकर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद हुई मुठभेड़ में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में अन्य को गिरफ्तार किया गया था।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने लाइसेंसी राइफल, पिस्टल, तमंचा, कारतूस और घटना में प्रयुक्त कार बरामद की थी। पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की। मुख्य आरोपी देवेंद्र चंदेला की चार करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्ति गैंगस्टर अधिनियम की धारा 14 (1) के तहत कुर्क की गई थी। कुर्क की गई संपत्तियों में स्कूल, आठ भूखंड, कृषि भूमि और कार शामिल थी।
पीड़ित परिवार को उम्मीद-अदालत से न्याय मिलेगा
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, चिकित्सीय साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आठ आरोपियों को दोषी करार दिया। अब अदालत दोषियों की भूमिका, अपराध की गंभीरता और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सजा का निर्धारण करेगी। इस बहुचर्चित मामले में दोष सिद्ध होने के बाद पीड़ित परिवार ने उम्मीद जताई है कि अदालत से उन्हें न्याय मिलेगा।