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Noida News: बिना उचित कारण, क्लेम को इन्कार नहीं कर सकती बीमा कंपनी
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जिला उपभोक्ता आयोग
ग्रेटर नोएडा के कनारसी निवासी विजेंद्र सिंह ने आयोग में की थी शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। उपभोक्ता आयोग ने कहा है कि बीमा कंपनी बिना उचित कारण के क्लेम देने से इन्कार नहीं कर सकती। आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को इलाज में खर्च रकम 30 दिनों के अंदर 6% सालाना ब्याज की दर पर पीड़ित को भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने मामले की सुनवाई की।
ग्रेटर नोएडा के कनारसी निवासी विजेंद्र सिंह ने कंपनी से मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी, जो 22 अक्टूबर, 2022 तक प्रभावी थी। इसके तहत उन्हें एक साल के लिए पांच लाख रुपये तक के इलाज का कवरेज दिया गया था। लेकिन, 27 सितंबर, 2022 को बुखार आने पर उन्हें दनकौर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। तीन दिनों तक चले इलाज के दौरान बीमा कंपनी को मामले की सूचना दे दी गई थी। कंपनी के प्रतिनिधि ने डिस्चार्ज के बाद पूरा खर्च 14,706 रुपये देने का आश्वासन उन्हें दिया था। उन्होंने सभी दस्तावेज भी बीमा कंपनी में जमा कर दिए थे, लेकिन उन्हें क्लेम का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से किसी के प्रस्तुत नहीं होने पर एक तरफा सुनवाई हुई। आयोग ने शिकायतकर्ता को एक हजार रुपये वाद व्यय और एक हजार रुपये मानसिक पीड़ा के लिए भी देने का आदेश दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। उपभोक्ता आयोग ने कहा है कि बीमा कंपनी बिना उचित कारण के क्लेम देने से इन्कार नहीं कर सकती। आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को इलाज में खर्च रकम 30 दिनों के अंदर 6% सालाना ब्याज की दर पर पीड़ित को भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने मामले की सुनवाई की।
ग्रेटर नोएडा के कनारसी निवासी विजेंद्र सिंह ने कंपनी से मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी, जो 22 अक्टूबर, 2022 तक प्रभावी थी। इसके तहत उन्हें एक साल के लिए पांच लाख रुपये तक के इलाज का कवरेज दिया गया था। लेकिन, 27 सितंबर, 2022 को बुखार आने पर उन्हें दनकौर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। तीन दिनों तक चले इलाज के दौरान बीमा कंपनी को मामले की सूचना दे दी गई थी। कंपनी के प्रतिनिधि ने डिस्चार्ज के बाद पूरा खर्च 14,706 रुपये देने का आश्वासन उन्हें दिया था। उन्होंने सभी दस्तावेज भी बीमा कंपनी में जमा कर दिए थे, लेकिन उन्हें क्लेम का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से किसी के प्रस्तुत नहीं होने पर एक तरफा सुनवाई हुई। आयोग ने शिकायतकर्ता को एक हजार रुपये वाद व्यय और एक हजार रुपये मानसिक पीड़ा के लिए भी देने का आदेश दिया है।
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