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Noida News: विपरीत परिस्थितियों में खुद को सुरक्षित रखने के लिए तकनीक सीखी
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सूरजपुर स्थित मलकपुर स्टेडियम में खिलाड़ियों को मिले आत्मरक्षा के टिप्स
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। आत्मरक्षा के गुर सीख कर न केवल हमलावर से अपने को बचाया जा सकता है बल्कि दूसरों की मदद भी की जा सकती है। यदि आप पहले से ही सतर्क हैं तो आपके साथ कोई भी घटना नहीं हो सकती है। आप मानसिक रूप से मजबूत हैं तो हमलावर की हिम्मत नहीं बढ़ेगी। ये बातें शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से सूरजपुर स्थित मलकपुर स्टेडियम में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में प्रशिक्षक भारती श्रीवास्तव ने कहीं।
उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि आत्मरक्षा केवल लड़ाई करना नहीं बल्कि खतरे को पहचान कर सही समय पर सही निर्णय लेना भी है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में खुद को सुरक्षित रखने के लिए कई तकनीक की सीख दी। प्रशिक्षक ज्योतिर्मयी पांडेय ने खिलाड़ियों को विपरीत परिस्थितियों से बचने के तरीके बताएं। उन्होंने कहा कि पैनिक होंगे तो दिमाग में कुछ नहीं आएगा। यह आप पर निर्भर है कि किसी परिस्थिति का सामना कैसे किया जा सकता है। जब कोई हमला करे तो डरें नहीं।
जूडो कोच साक्षी सिंह व रेसलिंग कोच अंजूम मलिक ने खिलाड़ियों को हाथ पकड़ने पर छुड़ाने की तकनीक, पीछे से पकड़ लिए जाने पर बचाव, बाल खींचने या धक्का देने जैसी स्थितियों से निकलने के तरीके सिखाए गए। साथ ही शरीर के संवेदनशील हिस्सों की जानकारी देकर जरूरत पड़ने पर प्रभावी बचाव करने की विधियां भी बताई गईं। अगर किसी मुसीबत में फंस जाएं तो दोनों हाथ और पैरों का पूरा उपयोग करना चाहिए। ऐसा करने से सामने वाले की हिम्मत टूट जाएगी और आप उसे धराशायी कर सकेंगी। मुश्किल समय में जो हाथ लगे, उसे हथियार बना लें। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि पढ़ने के साथ-साथ खेलकूद में भी भाग लेना चाहिए। इस मौके पर प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी डॉ. परवेज अली के साथ अन्य लोग मौजूद रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। आत्मरक्षा के गुर सीख कर न केवल हमलावर से अपने को बचाया जा सकता है बल्कि दूसरों की मदद भी की जा सकती है। यदि आप पहले से ही सतर्क हैं तो आपके साथ कोई भी घटना नहीं हो सकती है। आप मानसिक रूप से मजबूत हैं तो हमलावर की हिम्मत नहीं बढ़ेगी। ये बातें शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से सूरजपुर स्थित मलकपुर स्टेडियम में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में प्रशिक्षक भारती श्रीवास्तव ने कहीं।
उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि आत्मरक्षा केवल लड़ाई करना नहीं बल्कि खतरे को पहचान कर सही समय पर सही निर्णय लेना भी है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में खुद को सुरक्षित रखने के लिए कई तकनीक की सीख दी। प्रशिक्षक ज्योतिर्मयी पांडेय ने खिलाड़ियों को विपरीत परिस्थितियों से बचने के तरीके बताएं। उन्होंने कहा कि पैनिक होंगे तो दिमाग में कुछ नहीं आएगा। यह आप पर निर्भर है कि किसी परिस्थिति का सामना कैसे किया जा सकता है। जब कोई हमला करे तो डरें नहीं।
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जूडो कोच साक्षी सिंह व रेसलिंग कोच अंजूम मलिक ने खिलाड़ियों को हाथ पकड़ने पर छुड़ाने की तकनीक, पीछे से पकड़ लिए जाने पर बचाव, बाल खींचने या धक्का देने जैसी स्थितियों से निकलने के तरीके सिखाए गए। साथ ही शरीर के संवेदनशील हिस्सों की जानकारी देकर जरूरत पड़ने पर प्रभावी बचाव करने की विधियां भी बताई गईं। अगर किसी मुसीबत में फंस जाएं तो दोनों हाथ और पैरों का पूरा उपयोग करना चाहिए। ऐसा करने से सामने वाले की हिम्मत टूट जाएगी और आप उसे धराशायी कर सकेंगी। मुश्किल समय में जो हाथ लगे, उसे हथियार बना लें। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि पढ़ने के साथ-साथ खेलकूद में भी भाग लेना चाहिए। इस मौके पर प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी डॉ. परवेज अली के साथ अन्य लोग मौजूद रहे।
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