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Noida News: 64 खानों की बिसात पर जिले के सितारों की नई चाल
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- वंतिका अग्रवाल और अजय संतोष से प्रेरणा लेकर शतरंज में भविष्य तलाश रही नई पीढ़ी
नितेश कुमार
ग्रेटर नोएडा। कभी घरों और क्लबों तक सीमित रहने वाला शतरंज अब गौतमबुद्ध नगर के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रहा है। 20 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस के अवसर पर जिले के उन खिलाड़ियों की उपलब्धियां चर्चा में हैं, जिन्होंने 64 खानों के इस खेल में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ी वंतिका अग्रवाल और इंटरनेशनल मास्टर अजय संतोष पर्वथारेड्डी ने अपनी उपलब्धियों से जिले का नाम देश-दुनिया में रोशन किया है। अब नई पीढ़ी के खिलाड़ी भी इन्हीं से प्रेरणा लेकर शतरंज की दुनिया में आगे बढ़ रहे हैं।
गौतमबुद्ध नगर में शतरंज को लेकर खिलाड़ियों और अभिभावकों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। जिले के स्कूलों, अकादमियों और निजी क्लबों में बड़ी संख्या में बच्चे इस खेल का प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रशिक्षकों का कहना है कि शतरंज केवल प्रतिस्पर्धा का खेल नहीं, बल्कि बच्चों में एकाग्रता, धैर्य, रणनीतिक सोच और निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित करता है। वंतिका अग्रवाल ने कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल कर जिले की बेटियों के लिए प्रेरणा का उदाहरण पेश किया है। वहीं, इंटरनेशनल मास्टर अजय संतोष पर्वथारेड्डी ने लगातार शानदार प्रदर्शन कर जिले के युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का हौसला दिया है। उनकी सफलता से जिले में शतरंज के प्रति युवाओं की रुचि तेजी से बढ़ी है। खिलाड़ियों का मानना है कि बेहतर सुविधाएं और अधिक प्रतियोगिताएं उपलब्ध होने से जिले से आने वाले समय में कई और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।
कोट-
जिले में बेहतर सुविधाएं और अधिक प्रतियोगिताएं मिलती रहीं तो आने वाले वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकलेंगे। -आरव, खिलाड़ी
शतरंज हर चाल के साथ धैर्य, अनुशासन और सही समय पर निर्णय लेना सिखाता है। -ऑरियाना, खिलाड़ी
शतरंज में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं, लगातार अभ्यास और सही मार्गदर्शन ही आगे बढ़ाता है। -मोक्ष रावत, खिलाड़ी
शौक से शुरू किया शतरंज अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का लक्ष्य बन गया है। -अवान, खिलाड़ी
शतरंज ने पढ़ाई और सोचने की क्षमता बेहतर बनाई, अब भारत का प्रतिनिधित्व करना सपना है। -श्रेयांश, खिलाड़ी
शतरंज के खेल ने हर परिस्थिति में शांत रहकर सही फैसला लेना सिखाया है। -राघव दुबे, खिलाड़ी
गौतमबुद्ध नगर में प्रतिभाओं की कमी नहीं, जरूरत सिर्फ बेहतर प्रशिक्षण और अवसरों की है। -अतुल निगम, सचिव, गौतमबुद्ध नगर चेस स्पोर्ट्स एसोसिएशन
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नितेश कुमार
ग्रेटर नोएडा। कभी घरों और क्लबों तक सीमित रहने वाला शतरंज अब गौतमबुद्ध नगर के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रहा है। 20 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस के अवसर पर जिले के उन खिलाड़ियों की उपलब्धियां चर्चा में हैं, जिन्होंने 64 खानों के इस खेल में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ी वंतिका अग्रवाल और इंटरनेशनल मास्टर अजय संतोष पर्वथारेड्डी ने अपनी उपलब्धियों से जिले का नाम देश-दुनिया में रोशन किया है। अब नई पीढ़ी के खिलाड़ी भी इन्हीं से प्रेरणा लेकर शतरंज की दुनिया में आगे बढ़ रहे हैं।
गौतमबुद्ध नगर में शतरंज को लेकर खिलाड़ियों और अभिभावकों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। जिले के स्कूलों, अकादमियों और निजी क्लबों में बड़ी संख्या में बच्चे इस खेल का प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रशिक्षकों का कहना है कि शतरंज केवल प्रतिस्पर्धा का खेल नहीं, बल्कि बच्चों में एकाग्रता, धैर्य, रणनीतिक सोच और निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित करता है। वंतिका अग्रवाल ने कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल कर जिले की बेटियों के लिए प्रेरणा का उदाहरण पेश किया है। वहीं, इंटरनेशनल मास्टर अजय संतोष पर्वथारेड्डी ने लगातार शानदार प्रदर्शन कर जिले के युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का हौसला दिया है। उनकी सफलता से जिले में शतरंज के प्रति युवाओं की रुचि तेजी से बढ़ी है। खिलाड़ियों का मानना है कि बेहतर सुविधाएं और अधिक प्रतियोगिताएं उपलब्ध होने से जिले से आने वाले समय में कई और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।
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कोट-
जिले में बेहतर सुविधाएं और अधिक प्रतियोगिताएं मिलती रहीं तो आने वाले वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकलेंगे। -आरव, खिलाड़ी
शतरंज हर चाल के साथ धैर्य, अनुशासन और सही समय पर निर्णय लेना सिखाता है। -ऑरियाना, खिलाड़ी
शतरंज में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं, लगातार अभ्यास और सही मार्गदर्शन ही आगे बढ़ाता है। -मोक्ष रावत, खिलाड़ी
शौक से शुरू किया शतरंज अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का लक्ष्य बन गया है। -अवान, खिलाड़ी
शतरंज ने पढ़ाई और सोचने की क्षमता बेहतर बनाई, अब भारत का प्रतिनिधित्व करना सपना है। -श्रेयांश, खिलाड़ी
शतरंज के खेल ने हर परिस्थिति में शांत रहकर सही फैसला लेना सिखाया है। -राघव दुबे, खिलाड़ी
गौतमबुद्ध नगर में प्रतिभाओं की कमी नहीं, जरूरत सिर्फ बेहतर प्रशिक्षण और अवसरों की है। -अतुल निगम, सचिव, गौतमबुद्ध नगर चेस स्पोर्ट्स एसोसिएशन