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नर्सरी एडमिशन : स्कूलों में होगा पैरेंट्स इंटरेएक्शन
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बच्चों की दिनचर्या, व्यवहार और परिवार के माहौल को जानेंगे स्कूल
नेहा शर्मा
नोएडा। निजी स्कूलों में नर्सरी एडमिशन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अभिभावकों ने भी तैयारी तेज कर दी है। रजिस्ट्रेशन के बाद अक्तूबर से दिसंबर के बीच बच्चों और अभिभावकों के इंटरेक्शन की प्रक्रिया शुरू होगी। स्कूलों में सिर्फ बच्चे की जानकारी ही नहीं ली जाएगी, बल्कि अभिभावकों के जरिये बच्चे की दिनचर्या, व्यवहार और परिवार के माहौल को भी समझने का प्रयास किया जाएगा।
स्कूल प्रबंधन के अनुसार, नर्सरी एडमिशन का इंटरेक्शन बच्चे की परीक्षा नहीं होता, बल्कि बच्चे और परिवार को समझने का माध्यम होता है। स्कूल यह जानने की कोशिश करते हैं कि बच्चा घर में किस तरह का वातावरण पाता है और अभिभावक उसकी पढ़ाई व विकास में किस तरह सहयोग करते हैं।
एपीजे स्कूल की प्रिंसिपल और सीबीएसई कोऑर्डिनेटर नेहा शर्मा ने बताया कि नर्सरी स्तर पर बच्चों को ऐसा होमवर्क दिया जाता है जिसे वे खुद कर सकें, लेकिन अभिभावकों की निगरानी जरूरी होती है। इसलिए स्कूल यह समझना चाहते हैं कि पैरेंट्स बच्चे को पढ़ाई के लिए किस तरह प्रोत्साहित करते हैं।
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प्रॉमिनेंस वर्ल्ड स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. मृणालिनी ने बताया कि इंटरेक्शन के दौरान बच्चे की पसंद-नापसंद, सीखने की क्षमता, एलर्जी, वैक्सीनेशन, घर की दिनचर्या और स्वास्थ्य से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। स्कूल यह भी देखते हैं कि अभिभावक अपने बच्चे के व्यवहार और आदतों को कितना समझते हैं। इसका उद्देश्य बच्चे और परिवार के बीच जुड़ाव को समझना होता है।
बच्चों से पूछे जा सकते हैं ये सवाल
- अपना नाम और माता-पिता का नाम
- रंगों और आकृतियों की पहचान करना
- 1 से 10 तक गिनती
- फलों और आसपास की चीजों के नाम
- चित्र देखकर कहानी बताना
- दोस्तों के नाम और पसंदीदा खेल
पैरेंट्स से पूछे जाने वाले सवाल
स्कूल अभिभावकों से बच्चे की दिनचर्या, खाने-पीने की आदत, पढ़ाई में रुचि, खेलने का समय, घर में बोली जाने वाली भाषा और अनुशासन सिखाने के तरीके के बारे में जानकारी लेते हैं। साथ ही यह भी पूछा जाता है कि बच्चा मोबाइल, टीवी या अन्य स्क्रीन का कितना इस्तेमाल करता है।
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नेहा शर्मा
नोएडा। निजी स्कूलों में नर्सरी एडमिशन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अभिभावकों ने भी तैयारी तेज कर दी है। रजिस्ट्रेशन के बाद अक्तूबर से दिसंबर के बीच बच्चों और अभिभावकों के इंटरेक्शन की प्रक्रिया शुरू होगी। स्कूलों में सिर्फ बच्चे की जानकारी ही नहीं ली जाएगी, बल्कि अभिभावकों के जरिये बच्चे की दिनचर्या, व्यवहार और परिवार के माहौल को भी समझने का प्रयास किया जाएगा।
स्कूल प्रबंधन के अनुसार, नर्सरी एडमिशन का इंटरेक्शन बच्चे की परीक्षा नहीं होता, बल्कि बच्चे और परिवार को समझने का माध्यम होता है। स्कूल यह जानने की कोशिश करते हैं कि बच्चा घर में किस तरह का वातावरण पाता है और अभिभावक उसकी पढ़ाई व विकास में किस तरह सहयोग करते हैं।
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एपीजे स्कूल की प्रिंसिपल और सीबीएसई कोऑर्डिनेटर नेहा शर्मा ने बताया कि नर्सरी स्तर पर बच्चों को ऐसा होमवर्क दिया जाता है जिसे वे खुद कर सकें, लेकिन अभिभावकों की निगरानी जरूरी होती है। इसलिए स्कूल यह समझना चाहते हैं कि पैरेंट्स बच्चे को पढ़ाई के लिए किस तरह प्रोत्साहित करते हैं।
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प्रॉमिनेंस वर्ल्ड स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. मृणालिनी ने बताया कि इंटरेक्शन के दौरान बच्चे की पसंद-नापसंद, सीखने की क्षमता, एलर्जी, वैक्सीनेशन, घर की दिनचर्या और स्वास्थ्य से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। स्कूल यह भी देखते हैं कि अभिभावक अपने बच्चे के व्यवहार और आदतों को कितना समझते हैं। इसका उद्देश्य बच्चे और परिवार के बीच जुड़ाव को समझना होता है।
बच्चों से पूछे जा सकते हैं ये सवाल
- अपना नाम और माता-पिता का नाम
- रंगों और आकृतियों की पहचान करना
- 1 से 10 तक गिनती
- फलों और आसपास की चीजों के नाम
- चित्र देखकर कहानी बताना
- दोस्तों के नाम और पसंदीदा खेल
पैरेंट्स से पूछे जाने वाले सवाल
स्कूल अभिभावकों से बच्चे की दिनचर्या, खाने-पीने की आदत, पढ़ाई में रुचि, खेलने का समय, घर में बोली जाने वाली भाषा और अनुशासन सिखाने के तरीके के बारे में जानकारी लेते हैं। साथ ही यह भी पूछा जाता है कि बच्चा मोबाइल, टीवी या अन्य स्क्रीन का कितना इस्तेमाल करता है।