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चिंताजनक: गौतमबुद्ध नगर में सिर्फ शारीरिक ही नहीं, दिमागी रूप से भी कमजोर हो रहे लोग, देखें तीन साल के आंकड़े

नेहा शर्मा, अमर उजाला, नोएडा Published by: आकाश दुबे Updated Sun, 11 Jan 2026 10:04 PM IST
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सार

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में बौद्धिक अक्षमता के 112 प्रमाण पत्र जारी किए गए थे, जो 2025 में बढ़कर 186 हो गए। वर्ष 2023 में यह संख्या लगभग 160 थी।

People in Gautam Buddha Nagar are becoming weak not only physically but also mentally
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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गौतमबुद्ध नगर जिले में लोग केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि दिमागी रूप से भी कमजोर हो रहे हैं। इसका अंदाजा स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए जा रहे विकलांगता प्रमाण पत्रों के बढ़ते आंकड़ों से लगाया जा सकता है। खासतौर पर बौद्धिक अक्षमता (इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी) के मामलों में तेजी देखने को मिली है।

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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2025 में बौद्धिक अक्षमता के 186 प्रमाण पत्र जारी किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या 112 थी। इससे पहले 2023 में करीब 160 बौद्धिक अक्षमता के प्रमाण पत्र बनाए गए थे। बौद्धिक अक्षमता एक स्थिति होती है, जिसमें व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता सीमित हो जाती है और स्वतंत्र रूप से जीवन जीने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके लक्षण अक्सर बचपन में ही दिखाई देने लगते हैं।

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लोकोमोटर विकलांगता के मामलों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। लोकोमोटर विकलांगता वह स्थिति है, जिसमें हड्डियों, जोड़ों, मांसपेशियों या तंत्रिका तंत्र में समस्या के कारण शरीर की गतिशीलता प्रभावित होती है। 2023 में लोकोमोटर विकलांगता के 437 प्रमाण पत्र बनाए गए थे। 2024 में यह संख्या घटकर 320 रह गई, जबकि 2025 में फिर से बढ़कर 511 तक पहुंच गई।

कम दृष्टि के मामले भी बढ़े
जिले में लो विजन (कम दृष्टि) से संबंधित विकलांगता प्रमाण पत्रों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2023 में लो विजन के सिर्फ 18 प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 49 हो गई, जबकि 2025 में आंकड़ा बढ़कर 57 तक पहुंच गया। वहीं 2023 और 2024 में कुल 1,042 व 1,042 विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,189 हो गई।

हर सोमवार को बैठता है विशेष मेडिकल बोर्ड
विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए हर सोमवार को जिला अस्पताल में विशेष मेडिकल बोर्ड की बैठक होती है। बोर्ड में विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल रहते हैं। आवेदकों की विस्तृत जांच के बाद विकलांगता का प्रतिशत तय किया जाता है और बीमारी की प्रकृति के अनुसार निर्धारित समय अवधि के लिए प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।

प्रमाण पत्र मिलने से दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं, शिक्षा, रोजगार और अन्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने में मदद मिलती है। विकलांगता के आधार पर सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। - डॉ. टीकम सिंह, डिप्टी सीएमओ

सर्टिफिकेट का आंकड़ा -

वर्ष 2023 2024 2025
बौद्धिक अक्षमता 160 112 186
लोकोमोटर डिसेबिलिटी 437 320 511
कुल सर्टिफिकेट 1042 1042 1189
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