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Noida News: संतोष आनंद ने गाए गीत...और शाम रंगीन हो गई
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बाराही मेले में प्रसिद्ध गीतकार संतोष आनंद ने दी प्रस्तुति, एक प्यार का नगमा है... पर दर्शकों ने मिलाया सुर में सुर
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। बाराही मेले में रविवार की शाम रंगीन हो गई जब हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध गीतकार संतोष आनंद ने गीत गए। मंच पर आते ही संतोष आनंद ने अपने मशहूर गीतों की प्रस्तुति से ऐसा जादू बिखेरा कि मानो समय ठहर गया हो। जब उन्होंने एक प्यार का नगमा है गुनगुनाया तो हजारों दर्शक खुद ही उनके साथ सुर में सुर मिलाने लगे। पूरा पंडाल तालियों और भावनाओं की गूंज से भर उठा। उनके गीतों की गहराई और संवेदनशीलता ने हर किसी के दिल को छू लिया।
काव्य संध्या के दौरान अन्य कवियों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को विविध रंगों से सजाया। इस अवसर पर विभिन्न कलाकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं से दर्शकों का मनोरंजन किया। हास्य, व्यंग्य, वीर रस और गजलों का सुंदर मिश्रण देखने को मिला। कार्यक्रम में उपस्थित दर्शकों ने देर रात तक इस सांस्कृतिक संध्या का आनंद लिया।आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि बाराही मेला केवल मनोरंजन का मंच नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों को संजोने का एक प्रयास है।
चौपाल बनी मेले की जान
इस वर्ष मेले में पारंपरिक चौपाल विशेष आकर्षण का केंद्र है। फूंस के छप्पर से निर्मित इस चौपाल ने ग्रामीण जीवन की झलक को जीवंत कर दिया है। यहां विशाल खाट, हुक्का, बैलगाड़ी और पारंपरिक उपकरणों की प्रदर्शनी ने लोगों को गांव की पुरानी संस्कृति से जोड़ने का काम किया।
चौपाल के सामने स्थित विशाल पीपल का वृक्ष और पास का प्राचीन कुआं इस स्थल को ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करते हैं। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और सामाजिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। बाराही मेले में रविवार की शाम रंगीन हो गई जब हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध गीतकार संतोष आनंद ने गीत गए। मंच पर आते ही संतोष आनंद ने अपने मशहूर गीतों की प्रस्तुति से ऐसा जादू बिखेरा कि मानो समय ठहर गया हो। जब उन्होंने एक प्यार का नगमा है गुनगुनाया तो हजारों दर्शक खुद ही उनके साथ सुर में सुर मिलाने लगे। पूरा पंडाल तालियों और भावनाओं की गूंज से भर उठा। उनके गीतों की गहराई और संवेदनशीलता ने हर किसी के दिल को छू लिया।
काव्य संध्या के दौरान अन्य कवियों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को विविध रंगों से सजाया। इस अवसर पर विभिन्न कलाकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं से दर्शकों का मनोरंजन किया। हास्य, व्यंग्य, वीर रस और गजलों का सुंदर मिश्रण देखने को मिला। कार्यक्रम में उपस्थित दर्शकों ने देर रात तक इस सांस्कृतिक संध्या का आनंद लिया।आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि बाराही मेला केवल मनोरंजन का मंच नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों को संजोने का एक प्रयास है।
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चौपाल बनी मेले की जान
इस वर्ष मेले में पारंपरिक चौपाल विशेष आकर्षण का केंद्र है। फूंस के छप्पर से निर्मित इस चौपाल ने ग्रामीण जीवन की झलक को जीवंत कर दिया है। यहां विशाल खाट, हुक्का, बैलगाड़ी और पारंपरिक उपकरणों की प्रदर्शनी ने लोगों को गांव की पुरानी संस्कृति से जोड़ने का काम किया।
चौपाल के सामने स्थित विशाल पीपल का वृक्ष और पास का प्राचीन कुआं इस स्थल को ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करते हैं। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और सामाजिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।