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Noida News: 25 साल से नहीं पहुंचा पानी पर बिल का मीटर लगातार चालू
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- औद्योगिक सेक्टर इकोटेक-3 के उद्योग केंद्र-वन के 500 उद्यमी प्राधिकरण की अनदेखी से परेशान
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। औद्योगिक सेक्टर इकोटेक-3 के उद्योग केंद्र-1 में पानी आपूर्ति की पाइपलाइन नहीं है लेकिन यहां के उद्यमियों के बिल का मीटर लगातार चालू है। हर साल उनके भूखंड की फाइल में पानी बिल बकाया जुड़ जाता है। बिल जमा नहीं करने पर उद्यमियों को डिफॉल्टर घोषित कर दिया जाता है। उद्यमियों के मुताबिक कि 25 साल से प्राधिकरण यहां पर पानी नहीं पहुंचा पाया है। पानी नहीं होने से काफी उद्योग बंद हो चुके हैं।
बुधवार को इकोटेक-3 के उद्योग केंद्र वन में आयोजित अमर उजाला संवाद में उद्यमियों ने अपनी समस्याएं रखीं। उद्यमियों ने कहा कि पिछले नवंबर में प्राधिकरण की तरफ से सेक्टर में शिविर लगाया गया। वहां 50 से अधिक उद्यमियों ने बिना कनेक्शन के बिल भेजने की शिकायत की। शिकायत पत्र लेकर बकाया को हटाने का वादा किया गया। छह माह बाद भी कुछ नहीं हुआ है। कई भूखंड कूड़ा घर बन गए है। सफाई की व्यवस्था नहीं है। ड्रेनेज सिस्टम खराब है। पानी निकासी नहीं होने से सड़कों पर जलभराव रहता है। अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। सार्वजनिक यातायात की व्यवस्था नहीं है। सेक्टर में श्रमिकों के लिए भी कोई सुविधा नहीं है। प्राधिकरण में सिंगल विंडो सिस्टम नहीं है। अगर कुछ काम कराना है तो 10 से 15 बार चक्कर लगाने होते है। स्ट्रीट लाइटें शुरू नहीं हो सकी हैं। सड़क किनारे पटरी कच्ची होने के कारण धूल उड़ती रही है।
सेक्टर में पानी की पाइपलाइन भी नहीं है। बार-बार शिकायत के बाद भी प्राधिकरण पानी नहीं दे सका पर उद्यमियों को बिल हर साल भेजा जा रहा है।- संजय त्यागी
सेक्टर में अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। सार्वजनिक यातायात की कोई सुविधा नहीं है। कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी सुविधा नहीं है। - विमलेश सिंह
प्राधिकरण में सिटीजन चार्टर की सुविधा नहीं है। कुछ काम कराना है तो 10 से 15 बार चक्कर लगाना पड़ता है। निवेश मित्र पोर्टल का भी फायदा नहीं है। - श्रीकृष्ण शर्मा
अगर कंपनी को बेचना या खरीदना है तो प्राधिकरण नो-ड्यूज सर्टिफिकेट देता है। उसके बाद भी बकाया दिखा दिया जाता है। कंप्लीशन सर्टिफिकेट की प्रक्रिया जटिल है। - अजय राणा
भूखंड खरीदने में स्टाम्प की कमी का भार उद्यमी पर डाल दिया जाता है। यह जुर्माना अधिवक्ता पर पड़ना चाहिए। उनकी कमी से ही स्टाम्प का आकलन सही नहीं होता है। - सुनीत दत्त
पता बदलने के लिए जीएसटी विभाग में छह माह पहले आवेदन किया था। अब तक नहीं बदला गया। भविष्य में विभाग अगर कार्रवाई करता है तो मेरी ही गलती दिखेगी। - संदीप कुमार
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। औद्योगिक सेक्टर इकोटेक-3 के उद्योग केंद्र-1 में पानी आपूर्ति की पाइपलाइन नहीं है लेकिन यहां के उद्यमियों के बिल का मीटर लगातार चालू है। हर साल उनके भूखंड की फाइल में पानी बिल बकाया जुड़ जाता है। बिल जमा नहीं करने पर उद्यमियों को डिफॉल्टर घोषित कर दिया जाता है। उद्यमियों के मुताबिक कि 25 साल से प्राधिकरण यहां पर पानी नहीं पहुंचा पाया है। पानी नहीं होने से काफी उद्योग बंद हो चुके हैं।
बुधवार को इकोटेक-3 के उद्योग केंद्र वन में आयोजित अमर उजाला संवाद में उद्यमियों ने अपनी समस्याएं रखीं। उद्यमियों ने कहा कि पिछले नवंबर में प्राधिकरण की तरफ से सेक्टर में शिविर लगाया गया। वहां 50 से अधिक उद्यमियों ने बिना कनेक्शन के बिल भेजने की शिकायत की। शिकायत पत्र लेकर बकाया को हटाने का वादा किया गया। छह माह बाद भी कुछ नहीं हुआ है। कई भूखंड कूड़ा घर बन गए है। सफाई की व्यवस्था नहीं है। ड्रेनेज सिस्टम खराब है। पानी निकासी नहीं होने से सड़कों पर जलभराव रहता है। अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। सार्वजनिक यातायात की व्यवस्था नहीं है। सेक्टर में श्रमिकों के लिए भी कोई सुविधा नहीं है। प्राधिकरण में सिंगल विंडो सिस्टम नहीं है। अगर कुछ काम कराना है तो 10 से 15 बार चक्कर लगाने होते है। स्ट्रीट लाइटें शुरू नहीं हो सकी हैं। सड़क किनारे पटरी कच्ची होने के कारण धूल उड़ती रही है।
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सेक्टर में पानी की पाइपलाइन भी नहीं है। बार-बार शिकायत के बाद भी प्राधिकरण पानी नहीं दे सका पर उद्यमियों को बिल हर साल भेजा जा रहा है।- संजय त्यागी
सेक्टर में अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। सार्वजनिक यातायात की कोई सुविधा नहीं है। कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी सुविधा नहीं है। - विमलेश सिंह
प्राधिकरण में सिटीजन चार्टर की सुविधा नहीं है। कुछ काम कराना है तो 10 से 15 बार चक्कर लगाना पड़ता है। निवेश मित्र पोर्टल का भी फायदा नहीं है। - श्रीकृष्ण शर्मा
अगर कंपनी को बेचना या खरीदना है तो प्राधिकरण नो-ड्यूज सर्टिफिकेट देता है। उसके बाद भी बकाया दिखा दिया जाता है। कंप्लीशन सर्टिफिकेट की प्रक्रिया जटिल है। - अजय राणा
भूखंड खरीदने में स्टाम्प की कमी का भार उद्यमी पर डाल दिया जाता है। यह जुर्माना अधिवक्ता पर पड़ना चाहिए। उनकी कमी से ही स्टाम्प का आकलन सही नहीं होता है। - सुनीत दत्त
पता बदलने के लिए जीएसटी विभाग में छह माह पहले आवेदन किया था। अब तक नहीं बदला गया। भविष्य में विभाग अगर कार्रवाई करता है तो मेरी ही गलती दिखेगी। - संदीप कुमार