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Noida News: सफर जोखिम भरा... मानकों के हिसाब से नहीं ई-रिक्शा की हालत

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 29 Apr 2026 05:59 PM IST
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Travel is risky... the condition of e-rickshaws is not up to standard.
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- जिले में 27 हजार से ज्यादा ई रिक्शा पंजीकृत, रोजाना होते हैं हादसे



माई सिटी रिपोर्टर



नोएडा। शहर की सड़कों पर अधिकांश ई-रिक्शे अधूरे मानकों के साथ दौड़ रहे हैं। इनसे न केवल सफर करने वालों को खतरा है बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की जान भी हर वक्त जोखिम में रहती है। बीते तीन महीनों में 135 से ज्यादा हादसे ई-रिक्शा के कारण हुए हैं। इसमें कई लोग घायल भी हुए।

परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में लगभग 27 हजार से अधिक ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। इनमें से अधिकतर अधूरे मानकों और जर्जर हालत में सड़कों पर चलते हैं। सबसे बड़ी समस्या ई-रिक्शाओं की खराब हालत है। कई रिक्शाओं के ब्रेक सही से काम नहीं करते, बैटरी लीकेज होता है, बॉडी जंग खाकर कमजोर हो चुकी है और छत व सीटें भी टूटी हालत में है। रात के समय अधिकांश ई-रिक्शा में लाइट तक नहीं होती।
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ओवरलोडिंग और नियमों की अनदेखी
ई-रिक्शा चालकों के लिए क्षमता से अधिक सवारियां बैठाना आम बात हो गई है। चार सवारी की जगह छह से आठ लोगों को बैठाकर सड़कों पर दौड़ना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ भी है। कई चालक बिना लाइसेंस या प्रशिक्षण के वाहन चला रहे हैं, जिससे हादसे का खतरा रहता है।

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ट्रैफिक व्यवस्था पर भी असर

अव्यवस्थित ढंग से खड़े होने वाले ई-रिक्शा शहर में जाम की एक बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। मेट्रो स्टेशनों, बाजारों और प्रमुख चौराहों के आसपास ये सड़क के बीचों-बीच सवारी भरते हैं। जिससे ट्रैफिक की रफ्तार थम जाती है। अधिकांश ई-रिक्शा में इंडिकेटर तक ठीक से काम नहीं करते।
सेक्टर-62 और सेक्टर-63 के बीच ओवरलोडेड ई-रिक्शा पलटने से बीते समय कई सवारियां घायल हो चुकी हैं। करीब दो महीने पहले सेक्टर-15 मेट्रो स्टेशन के पास ब्रेक फेल होने के कारण ई-रिक्शा डिवाइडर से टकरा गया था। इसी तरह करीब पांच महीने पहले सेक्टर-18 बाजार क्षेत्र में अचानक मोड़ लेने के कारण ई-रिक्शा और बाइक की टक्कर में गंभीर हादसा हुआ था। इसी तरह और भी हादसे हो चुके हैं।
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ऐसे ई-रिक्शा चालकों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए नियमित अभियान चलाया जाता है। अधूरे मानक मिलने पर जुर्माना लगाया जाता है और वाहन सीज भी किए जाते हैं। -डॉ. उदित नारायण पांडेय, एआरटीओ (प्रवर्तन)
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