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Noida News: युवाओं और बच्चों को जकड़ रही टाइप-2 डायबिटीज
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बदलती जीवनशैली और जंक फूड बढ़ती बीमारी का मुख्य कारण
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। बदलती जीवनशैली, जंक फूड का बढ़ता चलन और शारीरिक सक्रियता में कमी के कारण युवाओं और बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज (मधुमेह) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। अब यह गंभीर बीमारी केवल बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि कम उम्र के बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल और टीवी के सामने घंटों बिताना, खेलकूद से दूरी और रोजाना बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज व शुगरयुक्त कोल्ड ड्रिंक्स जैसे फास्ट फूड खाने की आदत से बच्चों में मोटापा खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. आशीष गुप्ता ने सचेत किया है कि इन पैकेट बंद और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में मौजूद रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, अतिरिक्त चीनी, नमक और ट्रांस फैट शरीर की इंसुलिन प्रणाली को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। इनका लगातार सेवन करने से रक्त में ग्लूकोज का स्तर अचानक बढ़ जाता है, जो कम उम्र में ही इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का मुख्य कारण बन रहा है। समय रहते आदतों में सुधार न करने पर यह समस्या आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा संकट बन सकती है।
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ऐसे करें बचाव
डॉ. आशीष गुप्ता का कहना है कि डायबिटीज से बचाव के लिए जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों का सेवन कम करना जरूरी है। भोजन में हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, फल और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल किए जाने चाहिए। प्रतिदिन कम से कम 30 से 45 मिनट तक व्यायाम या तेज चाल से पैदल चलना, वजन नियंत्रित रखना और पर्याप्त नींद लेना भी उतना ही आवश्यक है। परिवार में यदि किसी को डायबिटीज है तो नियमित ब्लड शुगर जांच करानी चाहिए, ताकि बीमारी का समय रहते पता लगाकर उसका प्रभावी उपचार शुरू किया जा सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। बदलती जीवनशैली, जंक फूड का बढ़ता चलन और शारीरिक सक्रियता में कमी के कारण युवाओं और बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज (मधुमेह) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। अब यह गंभीर बीमारी केवल बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि कम उम्र के बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल और टीवी के सामने घंटों बिताना, खेलकूद से दूरी और रोजाना बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज व शुगरयुक्त कोल्ड ड्रिंक्स जैसे फास्ट फूड खाने की आदत से बच्चों में मोटापा खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. आशीष गुप्ता ने सचेत किया है कि इन पैकेट बंद और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में मौजूद रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, अतिरिक्त चीनी, नमक और ट्रांस फैट शरीर की इंसुलिन प्रणाली को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। इनका लगातार सेवन करने से रक्त में ग्लूकोज का स्तर अचानक बढ़ जाता है, जो कम उम्र में ही इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का मुख्य कारण बन रहा है। समय रहते आदतों में सुधार न करने पर यह समस्या आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा संकट बन सकती है।
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ऐसे करें बचाव
डॉ. आशीष गुप्ता का कहना है कि डायबिटीज से बचाव के लिए जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों का सेवन कम करना जरूरी है। भोजन में हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, फल और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल किए जाने चाहिए। प्रतिदिन कम से कम 30 से 45 मिनट तक व्यायाम या तेज चाल से पैदल चलना, वजन नियंत्रित रखना और पर्याप्त नींद लेना भी उतना ही आवश्यक है। परिवार में यदि किसी को डायबिटीज है तो नियमित ब्लड शुगर जांच करानी चाहिए, ताकि बीमारी का समय रहते पता लगाकर उसका प्रभावी उपचार शुरू किया जा सके।